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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कश्मीर पर जो कहा, उस पर भारत ने दिया ये जवाब

✍️ Admin 📅 26 September, 2026 ⏰ 09:00 AM 👁 66 views

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ के संबोधन पर भारत ने राइट तो रिप्लाई का इस्तेमाल करते हुए जवाब दिया है. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की फ़र्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान 'आतंकवाद' को बढ़ावा देता है. उन्होंने कहा, "हमने जो बातें सुनीं, वे उन लोगों की तरफ़ से आईं जिनका लंबे समय से भेदभाव और नफ़रत का रिकॉर्ड रहा है. वे दिन में सुरक्षा की बात करने का दावा करते हैं, लेकिन रात में आतंकवाद करते हैं. इसी सभा में धार्मिक असहिष्णुता को लेकर उस शासन की तरफ़ से बातें कही गईं, जिसकी सबसे बड़ी ताक़त ईशनिंदा के क़ानून हैं." "दुनिया जानती है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है. कोई भी धार्मिक बातें दुनिया को गुमराह नहीं कर सकतीं. जम्मू-कश्मीर का भी ज़िक्र किया गया. यह मेरे देश का अभिन्न और अटूट हिस्सा है और हमेशा रहेगा. लेकिन अगर हमें कश्मीर की बात करनी ही है, तो हमारा ध्यान पाकिस्तान के क़ब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर की ओर होना चाहिए. वहाँ लंबे समय से हो रही बेवजह हत्याओं, हिंसा और बुनियादी अधिकारों से वंचित किए जाने के बारे में पूछा जाना चाहिए." पेटल गहलोत ने कहा, "मुद्दे के केंद्र में पाकिस्तान की लंबे समय से चली आ रही सीमा पार आतंकवाद की नीति है. हमने पिछले साल दिखाया था कि आतंकवादियों के पास भागने और छिपने की कोई जगह नहीं होगी. आतंकवाद से ख़ुद की रक्षा करने के हमारे अधिकार का इस्तेमाल आगे भी किया जाता रहेगा." उन्होंने कहा, "पाकिस्तान की ओर से हो रहे आतंकवाद के गंभीर नतीजे होंगे. हमें भरोसा है कि यह सभा पाकिस्तान और उसकी नीतियों को उसी रूप में देखेगी, जैसी वे वास्तव में हैं, न कि उस रूप में जैसा पाकिस्तान के प्रतिनिधि ने झूठ बोलकर दिखाया है." पेटल ने कहा, "हर साल झूठ दोहराने से वह सच नहीं हो जाता. पाकिस्तान का आतंकवाद, धोखा और दोहरा रवैया न तो उसके लिए और न ही दुनिया के लिए फ़ायदेमंद होगा." गौरतलब है कि इससे पहले पाकिस्तान के पीएम शहबाज़ शरीफ़ ने कहा था कि वो सिंधु नदी के पानी को रोकने के किसी भी भारतीय प्रयास को 'युद्ध की कार्रवाई' (एक्ट ऑफ़ वॉर) मानेंगे. साथ ही उन्होंने कहा, "कश्मीर पाकिस्तान की जुगुलर वेन (गले की नस) है और हमेशा रहेगा." संबंधित स्टोरी: पाकिस्तानी पीएम शहबाज़ शरीफ़ ने संयुक्त राष्ट्र में 'कश्मीर' और 'सिंधु जल संधि' पर क्या कहा अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित हुई रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं. विपक्ष तो इसको लेकर कड़ा रुख अपना ही रहा है, साथ ही एनडीए के कुछ दलों ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी है. केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने कहा कि चुनाव आयोग को अपना पक्ष मज़बूती से रखना चाहिए, ताकि जनता का भरोसा बना रहे. उन्होंने कहा, "अगर चुनाव आयोग के ऊपर ऐसे सवाल खड़े हो रहे हैं तो मैं मानता हूं कि ये ज़िम्मेदारी भी चुनाव आयोग की है कि वो अपने पक्ष में अपनी बातों को मज़बूती से रखें. विपक्ष क्या बोलता है उससे मुझे फ़र्क नहीं पड़ता है क्योंकि विपक्ष का काम राजनीति करना है... चुनाव आयोग को जनता का विश्वास बना रहे क्योंकि अगर चुनावी प्रक्रिया के ऊपर ही जनता का संदेह खड़ा हो जाएगा तो ये ग़लत है ऐसे में चुनाव आयोग अपनी बातों को मज़बूती से रखना चाहिए. ताकि जनता के मन में कोई संदेह न आए." बीजेपी के सहयोगी दल राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने भी चुनाव आयोग से तुरंत स्पष्टीकरण की मांग की है. उन्होंने एक्स पर लिखा, "एसआईआर से संबंधित विवाद पर जनता में काफ़ी उलझन की स्थिति पैदा हो गई है. विषय को एड्रेस करने की ज़रूरत है. कन्फ़्यूज़न दूर करने हेतु चुनाव आयोग के द्वारा अविलंब सही स्थिति पर स्पष्टीकरण आना चाहिए." वहीं, जनता दल यूनाइटेड का कहना है कि विपक्ष चुनाव आयोग पर दोष मढ़ रहा है. जेडीयू नेता राजीव रंजन ने कहा, "राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) को पता था कि उनकी हार तय है. उन्होंने बार-बार चुनाव आयोग पर दोष मढ़ने की कोशिश की है. जब भारत के चुनाव आयोग ने एसआईआर में अनियमितताओं के कथित आरोपों को लेकर सफ़ाई मांगी और पूछा कि अगर इतने सारे आरोप थे तो कोई आधिकारिक शिकायत क्यों नहीं दर्ज कराई गई. किसी भी बूथ पर दोबारा मतदान नहीं हुआ और न ही कोई हिंसा हुई. वोटिंग पूरी तरह पारदर्शी थी और बिहार में जनादेश एनडीए को मिला. इसीलिए वे ऐसे धरना प्रदर्शनों के ज़रिए दबाव बनाने की कोशिश करेंगे, लेकिन उन्हें कोई कामयाबी नहीं मिलेगी." तेलुगु देशम पार्टी के नेता लावू श्री कृष्ण देवरायालु ने कहा कि आंध्र प्रदेश में एसआईआर की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से की गई, लेकिन इस मुद्दे पर चुनाव आयोग को प्रतिक्रिया देनी चाहिए. लावू ने डेक्कन हेराल्ड से कहा, "निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जिसे हमारे लोकतंत्र में एक महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी दी गई है. इसलिए, जब भी कोई सवाल उठाता है, तो उचित जवाब देना और पारदर्शिता बनाए रखने पर ही संस्था के प्रति लोगों का भरोसा मज़बूत होगा." 'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले साल स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न यानी एसआईआर अभियान के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बाकी दो चुनाव आयुक्तों को कई फ़ैसलों की जानकारी नहीं दी गई थी. दोनों चुनाव आयुक्तों (सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी) ने इन फ़ैसलों पर बार-बार आपत्ति जताई थी. रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 10 महीनों में दोनों चुनाव आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा लिए गए फैसलों पर 14 बार लिखित रूप से औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई हैं. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने कहा है कि सिंधु नदी के पानी को रोकने के किसी भी भारतीय प्रयास को पाकिस्तान 'युद्ध की कार्रवाई' (एक्ट ऑफ़ वॉर) मानेगा. न्यूयॉर्क में चल रहे संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें अधिवेशन को संबोधित करते हुए शहबाज़ शरीफ़ ने शुक्रवार को यह बात कही. उन्होंने कहा, "सिंधु नदी का पानी न केवल पाकिस्तान बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए लाइफ़ लाइन है और मौजूदा संधि को रोकने के भारत के एकतरफ़ा फ़ैसले का कोई क़ानूनी आधार नहीं है." "भारत के दावों और क़दमों को यूएन के विशेषज्ञों और कोर्ट ऑफ़ आर्बिट्रेशन ने भी ख़ारिज किया है. पानी का इस्तेमाल कभी भी हथियार के तौर पर नहीं किया जाना चाहिए. नदियों से देशों को समृद्ध बनाना चाहिए, न कि उन्हें बांटना चाहिए." शहबाज़ शरीफ़ ने कहा, "पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने, उसमें बाधा डालने या उसका रुख मोड़ने की किसी भी कोशिश को युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा. भारत को इसे लेकर कोई ग़लती नहीं करनी चाहिए." इसके इतर, पाकिस्तान ने यूएन में एक बार फिर 'कश्मीर' का मुद्दा उठाया है. शहबाज़ शरीफ़ ने कहा, "मैं इस मंच से अपने कश्मीरी भाई-बहनों को पूरी ज़िम्मेदारी के साथ भरोसा दिलाता हूं कि जब तक उन्हें ख़ुद फ़ैसला लेने का अधिकार नहीं मिल जाता, तब तक हम उन्हें कूटनीतिक, राजनीतिक और नैतिक समर्थन देते रहेंगे." उन्होंने कहा, "कश्मीर पाकिस्तान की जुगुलर वेन (गले की नस) है और हमेशा रहेगा." वहीं, भारत का ज़िक्र करते हुए शहबाज़ ने आरोप लगाया कि सीमा पार आरएसएस से प्रभावित विचारधारा धार्मिक नफ़रत को बढ़ावा दे रही है. उन्होंने कहा कि इसका असर भीड़ की हिंसा, सांप्रदायिक हिंसा, धार्मिक स्थलों पर हमलों और धार्मिक आज़ादी पर पाबंदियों के रूप में दिखाई दे रहा है. संबंधित स्टोरी: पाकिस्तान के साथ हुई सिंधु जल संधि क्या है जिसे पहलगाम हमले के बाद भारत ने किया है निलंबित ईरान ने अमेरिका के सामने एक समझौते का प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत होर्मुज़ स्ट्रेट को एक हफ़्ते के भीतर फिर से खोला जा सकता है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि होर्मुज़ स्ट्रेट खोलने की प्रक्रिया तभी शुरू होगी, जब अमेरिका समझौते में तय ज़रूरी शर्तों को पूरा करेगा. अराग़ची ने इन शर्तों का विस्तृत ब्यौरा नहीं दिया. हालांकि, उन्होंने कहा, "इनका उल्लेख जून में अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) में पहले ही किया जा चुका है." ईरानी विदेश मंत्री स्पष्ट तौर पर कहा कि अब फ़ैसला अमेरिका के हाथ में है. उन्होंने बताया कि ईरान का प्रस्ताव क़तर के माध्यम से अमेरिका तक पहुंचाया गया है. ईरान के प्रस्ताव के बारे में पूछे जाने पर एक अमेरिकी अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि दोनों देशों के बीच मध्यस्थों के ज़रिए सकारात्मक बातचीत चल रही है. अधिकारी के मुताबिक़, इन बातचीत में परमाणु मुद्दे भी शामिल हैं. दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच 18 जून को हुए 14 सूत्री एमओयू का उद्देश्य संघर्षविराम लागू करना और होर्मुज़ स्ट्रेट को आंशिक रूप से खोलना था. समझौते में ईरान के परमाणु हथियार हासिल नहीं करने की शर्त शामिल थी. इसके अलावा अमेरिका, ईरान और उनके सहयोगियों की ओर से सभी मोर्चों पर सैन्य अभियान समाप्त करने की बात थी. एमओयू में अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी ख़त्म करने और ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों में राहत से जुड़े प्रावधान भी शामिल थे. बीबीसी हिन्दी के लाइव पेज पर आपका स्वागत है. मैं बीबीसी संवाददाता रौनक भैड़ा अब से दोपहर दो बजे तक आप तक अहम ख़बरें पहुंचाऊंगा. कल के लाइव पेज की ख़बरें पढ़ने के लिए आप यहां क्लिक करें. - शी जिनपिंग को ट्रंप का 'रेड कार्पेट वेलकम' तो मिला, पर क्या वो मिला जो चीन चाहता था? - वर्धा यूनिवर्सिटीः छह निलंबित स्टूडेंट्स की बेमियादी भूख हड़ताल, क्या है पूरा मामला - कोका-कोला का जामनेर प्रोजेक्ट: 50 लाख लीटर पानी, 1,200 करोड़ का निवेश और शुरू हुआ विवाद - दीपके ने विपक्षी दलों से 'फ़िक्स' चुनावों में भाग न लेने को कहा, ज्ञानेश कुमार को दिया ये 'अल्टीमेटम'

स्रोत: BBC Hindi

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