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संयुक्त राष्ट्र महासभा में रूस ने कहा, 'स्थाई सीट के लिए हमारा भारत को समर्थन'

✍️ Admin 📅 27 September, 2026 ⏰ 09:04 AM 👁 60 views

इमेज स्रोत, Eduardo Munoz Alvarez/Getty Images अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि वॉशिंगटन ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए कई देशों के साथ काम कर रहा है. उन्होंने कहा कि उनके निर्देश पर कई देशों में प्रतिनिधिमंडल भेजे गए, ताकि ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए उन्हें राज़ी किया जा सके. बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, "मेरे निर्देश पर टीमों को दुनिया के अलग-अलग देशों में भेजा गया, ताकि वे वहाँ की सरकारों से बात करें और ईरानी शासन के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग करें. इन कोशिशों का असर दिख रहा है." "तुर्की और ओमान ने अपने देशों के लिए महान एयर की उड़ानें बंद करने का ऐलान किया. यूएई ने ईरानी एयरलाइनों की सभी उड़ानें रोक दी हैं. वहीं, यूएई और तुर्की के बड़े बैंकों ने ईरान के साथ लेन-देन बंद कर दिया है." उन्होंने लिखा, "ईरान के नेतृत्व ने भी युद्ध से अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे असर को माना है. ईरानी मुद्रा रियाल की क़ीमत रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई है. मैं ब्रिटेन, तुर्की, ओमान और यूएई की सरकारों का आभार व्यक्त करता हूं. हम साथ मिलकर काम करते रहेंगे, क्योंकि ईरान को अपने आतंकवादी एजेंडे को आगे बढ़ाने से रोकने के लिए अभी और काम करना बाकी है." स्कॉट बेसेंट ने द वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट भी साझा की. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के अधिकारी पिछले दो सप्ताह के दौरान 50 से ज़्यादा देशों के साथ तेहरान पर आर्थिक दबाव और बढ़ाने की योजना को लेकर चर्चा कर चुके हैं. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी को रूस का समर्थन मिला है. संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र को संबोधित करते हुए रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने शनिवार को सुरक्षा परिषद में सुधार की वकालत की. साथ ही पश्चिमी देशों को अतिरिक्त स्थायी सीटें दिए जाने का विरोध किया. सर्गेई लावरोव ने कहा, “संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के तहत पश्चिमी देशों, ख़ासकर जर्मनी और जापान को कोई अतिरिक्त सीट नहीं दी जानी चाहिए, क्योंकि वे अब सैन्यवाद और बदला लेने की राह पर बढ़ रहे हैं,” लावरोव ने कहा. लावरोव ने सुरक्षा परिषद में एशिया, अफ़्रीका और लैटिन अमेरिका के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की ज़रूरत बताई. उन्होंने कहा, “हम एशिया, अफ़्रीका और लैटिन अमेरिका के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के पक्ष में हैं. हम स्थायी सीट के लिए ब्राज़ील और भारत की उम्मीदवारी का समर्थन करते हैं.” रूस का यह रुख़ ऐसे समय सामने आया है, जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार को लेकर सदस्य देशों के बीच लंबे समय से चर्चा जारी है. गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा की आम बहस के दौरान मॉरीशस ने भी सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का समर्थन किया. भारत ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में दुनिया के नेताओं से कहा कि खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष के बीच व्यावसायिक जहाज़ों और नाविकों को निशाना बनाना "बिल्कुल अस्वीकार्य" है. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र की आम बहस में कहा, “इस साल हम खाड़ी क्षेत्र में एक संघर्ष देख रहे हैं, जिसने पहले से मुश्किल स्थिति को और गंभीर बना दिया है. हम लगातार जारी हिंसा को लेकर बेहद चिंतित हैं.” उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाज़ों और नाविकों को निशाना बनाना 'बिल्कुल अस्वीकार्य' है. जयशंकर ने कहा, "भारत सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव कम करने, आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और व्यापार की आवाजाही को बिना रुकावट जारी रखने की अपील करता है." उन्होंने कहा कि समुद्री क्षेत्र में नई चुनौतियों ने ज़मीन पर पहले से मौजूद समस्याओं को और बढ़ा दिया है. जयशंकर ने कहा, “खाड़ी क्षेत्र में और लाल सागर से लेकर काला सागर तक व्यावसायिक जहाज़ों और नाविकों पर हमले हुए हैं. भारतीय नाविकों की भी जान गई है और दूसरे देशों के नाविकों की भी. यह पूरी तरह अस्वीकार्य है.” गौरतलब है कि अमेरिका-इसराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के दौरान जहाज़ों पर हुए हमलों में कई भारतीय नाविकों की मौत हुई है. उत्तर प्रदेश में शनिवार को बारिश से जुड़ी घटनाओं में 13 लोगों की मौत हो गई है. राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने समाचार एजेंसी एएनआई से इसकी पुष्टि की. उन्होंने कहा, "पिछले 48 घंटों से राज्य के कई हिस्सों में लगातार भारी बारिश हो रही है. इसका असर खास तौर पर पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल से सटे जिलों में ज्यादा है. यह स्थिति चक्रवात असना के प्रभाव के कारण बनी है." आयुक्त ने कहा, "अधिकारी स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं और अलग-अलग माध्यमों से लोगों को अलर्ट किया गया है. प्रभावित जिलों में स्कूल और कॉलेज बंद कर दिए गए हैं, जबकि मुख्यमंत्री भी स्थिति की निगरानी कर रहे हैं." समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, 17 लोग घायल भी हुए हैं. एजेंसी ने अधिकारियों के हवाले से बताया है कि राज्य के 63 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश हुई और कुछ इलाकों में अचानक बाढ़ का मध्यम खतरा बना हुआ है. पिछले 24 घंटों में उत्तर प्रदेश में सामान्य से 19 गुना अधिक बारिश हुई. भारी बारिश, आंधी और तेज हवाओं से खड़ी फसलों को नुक़सान पहुंचा और 117 मकान क्षतिग्रस्त हुए. पुलिस के मुताबिक़, अलग-अलग घटनाओं में मिट्टी की दीवार गिरने से पांच लोगों की मौत हुई. वहीं, तेज हवाओं और भारी बारिश के दौरान पेड़ उखड़ने से पांच लोगों की मौत हो गई और 14 लोग घायल हुए. लखीमपुर खीरी, अमेठी, बाराबंकी और गोरखपुर जिलों से लोगों के हताहत होने की ख़बर है. लखनऊ के चैना गांव में मिट्टी के मकान की दीवार गिरने से एक परिवार के तीन लोग घायल हो गए. उन्हें मलबे से निकालकर इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया. कन्नौज में लगातार हो रही बारिश से 20 कच्चे मकान क्षतिग्रस्त हो गए. मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, शुक्रवार से शनिवार सुबह तक लखनऊ में 125.8 मिलीमीटर बारिश हुई. फ़र्रुखाबाद में सामान्य से 200 गुना, कानपुर नगर में 160 गुना और कन्नौज, कानपुर देहात और हरदोई में सामान्य से 130 गुना अधिक बारिश दर्ज की गई. भारत मौसम विज्ञान विभाग ने शनिवार को पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान जताया था. रविवार को भी कई जगहों पर बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है. भारत ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान के बयान पर कड़ा जवाब दिया. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, "लगातार आतंकवाद फैलाने वाला देश आतंकवाद को सामान्य बताने और उसके नतीजों से बचने की कोशिश करता है, तो यह स्वीकार नहीं किया जाएगा." दरअसल, एक दिन पहले ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने न्यूयॉर्क में चल रही यूएन जनरल असेंबली में कहा था कि दक्षिण एशिया को 2025 जैसे संघर्ष से दोबारा बचाने के लिए कश्मीर मुद्दे का “न्यायपूर्ण और निष्पक्ष समाधान” ज़रूरी है. उन्होंने कहा था कि भारत का सिंधु जल संधि को स्थगित रखना कानूनी आधार नहीं रखता. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर भारत पाकिस्तान के हिस्से के सिंधु नदी के पानी को रोकता, बाधित करता या मोड़ता है, तो इसे “युद्ध की कार्रवाई” माना जाएगा. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तान की प्रतिक्रिया का जवाब देते हुए कहा, “कल आतंकवाद को लगातार अंजाम देने वाले एक देश ने इस महासभा के सामने तथ्यों को ग़लत तरीके से पेश किया.” जयशंकर ने पाकिस्तान या प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ का नाम नहीं लिया. जयशंकर ने कहा, “हमें आतंकवाद के ख़िलाफ़ अपनी रक्षा करने का अधिकार है और हम इसका इस्तेमाल करेंगे.” उन्होंने कहा कि “दोस्ती और सद्भावना आतंकवाद के साथ नहीं चल सकते.” उन्होंने कहा, “ऐसी किसी समझ या रिश्ते पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है, जो आतंकवाद के साथ रहते हुए बनाए जाएं. आतंकवाद को अंजाम देने वाले को अपने तौर-तरीके बदलने होंगे.” जयशंकर ने दुनिया के नेताओं से कहा कि शांति के लिए लगातार बना हुआ एक बड़ा ख़तरा आतंकवाद है. उन्होंने कहा, “अगर किसी देश की तरफ़ से आतंकवाद को समर्थन दिया जाता है और उसका मक़सद सीमा पार तक फैला हुआ है, तो यह सीधे तौर पर वैश्विक व्यवस्था के ख़िलाफ़ है.” भारत ने ऐसे काम करने वाली सरकारों को जवाबदेह ठहराने की मांग की. जयशंकर ने कहा, “आतंकवाद के ख़िलाफ़ हमारी ज़ीरो-टॉलरेंस की नीति में कोई ढील नहीं होनी चाहिए. ख़ास तौर पर आतंकवाद के वित्तीय स्रोतों को सामने लाना और उन पर रोक लगाना ज़रूरी है.” शहबाज़ शरीफ़ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण के दौरान 2025 में भारत के साथ हुए संघर्ष में “समय पर दख़ल” देने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को श्रेय दिया था. बीबीसी हिन्दी के लाइव पेज पर आपका स्वागत है. मैं बीबीसी संवाददाता रौनक भैड़ा अब से दोपहर दो बजे तक आप तक अहम ख़बरें पहुंचाऊंगा. कल के लाइव पेज की ख़बरें पढ़ने के लिए आप यहां क्लिक करें. - ज्ञानेश कुमार और 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स्रोत: BBC Hindi

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