पूर्ण संस्करण देखें
⚡ AMP पेज | पूर्ण वेबसाइट देखें
Death

अमेरिकी क़ानून में चीन को हथियार बेचने पर पाबंदी फिर भी उसे ये पेशकश क्यों?

✍️ Admin 📅 28 September, 2026 ⏰ 01:37 PM 👁 94 views

इमेज स्रोत, Kevin Dietsch/Getty Images चीन में अमेरिका के राजदूत डेविड पर्ड्यू ने दावा किया है कि पिछले सप्ताह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन को हथियार बेचने की पेशकश की थी. डेविड पर्ड्यू ने रविवार को फ़ॉक्स न्यूज़ को दिए इंटरव्यू में बताया कि पिछले सप्ताह ट्रंप ने अमेरिका पहुंचे शी जिनपिंग से बातचीत के दौरान कहा था कि उनका देश दुनिया में कई देशों को हथियार बेचता है. क्या चीन अमेरिका से कुछ हथियार खरीदना चाहेगा? हालांकि पर्ड्यू के इस इंटरव्यू के बाद व्हाइट हाउस ने कहा कि चीन को हथियार बेचने का अमेरिका की कोई योजना नहीं है. वहीं अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिकी क़ानून में चीन को हथियार बेचने पर पाबंदी है. उसे हथियार बेचने की कोई योजना नहीं है. पर्ड्यू के इस इंटरव्यू के बाद इस बात को लेकर चर्चा तेज़ हो गई है कि अमेरिका जिस ताइवान को आत्मरक्षा के लिए हथियार मुहैया कराने के लिए कानूनी तौर पर बाध्य है उसके साथ 14 अरब डॉलर के हथियार सौदे को रोके हुए है. लेकिन अमेरिका चीन को हथियार बेचने की पेशकश कर रहा है जिसे वो अपने क़ानून के मुताबिक़ हथियार नहीं दे सकता. हालांकि अमेरिकी विदेश विभाग ने इससे इनकार किया है. चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और उसे चीन में मिलाने की बात करता है. अमेरिका की ओर से ताइवान को हथियार मुहैया करने का मुद्दा चीन को खटकता रहा है. चीन ने इस पर कई बार अपनी आपत्ति दर्ज कराई है. जून 2025 में चीन ने ताइवान को चेतावनी दी थी कि अमेरिका पर निर्भर रहकर या सैन्य तरीकों के जरिए स्वतंत्रता हासिल करने की कोशिश करना "एक बंद गली" है. देश - दुनिया की बड़ी ख़बरें जिन्होंने बटोरी सुर्खियां. समचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक दिसंबर में ट्रंप ने ताइवान को 11.1 अरब डॉलर के हथियार बेचने की मंजूरी दी थी. लेकिन 14 अरब के हथियार सौदे पर फ़ैसले को रोक रखा है. ट्रंप ने इसे 'चीन से सौदेबाजी करने का अहम दांव' बताया था. ब्रिटिश अख़बार गार्डियन समाचार एजेंसी रॉयटर्स के हवाले से लिखा कि अमेरिका लंबे समय से इस सवाल पर रणनीतिक अस्पष्टता की नीति अपनाता रहा है कि चीन के हमले की स्थिति में वह ताइवान की रक्षा करेगा या नहीं. लेकिन दशकों पुराने 'ताइवान रिलेशंस एक्ट' के तहत अमेरिका को ताइवान को अपनी रक्षा के लिए पर्याप्त सैन्य उपकरण उपलब्ध कराने होते हैं. पिछले सप्ताह वॉशिंगटन में ट्रंप के साथ बैठक के दौरान शी जिनपिंग ने ट्रंप से "ताइवान की स्वतंत्रता" का विरोध करने का आग्रह किया था. पर्ड्यू के इंटरव्यू से पहले ताइवान के उप विदेश मंत्री चेन मिंग-ची ने चीन से पैदा होने वाले गंभीर सैन्य ख़तरे की बात कही थी. उन्होंने ताइपे में पत्रकारों से कहा था, "ताइवान स्ट्रेट में हालात गंभीर हैं. चीन की अर्थव्यवस्था भले ही कमज़ोर हो रही हो, लेकिन वह अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने के लिए लगातार अधिक संसाधन लगा रहा है. ऐसे माहौल में अमेरिका हमारी रक्षा ज़रूरतों को अच्छी तरह समझता है." अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश ने जून 1989 में चीन के तियानमेन चौक पर लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ चीन की सरकार की हिंसक कार्रवाई के बाद उसे हथियारों और मिलिट्री साजो-सामान के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था. इसके बाद अमेरिकी कांग्रेस ने फरवरी 1990 में पीएल 101-246 की धारा 902 के जरिये इन प्रतिबंधों को स्थायी रूप से क़ानून में शामिल कर दिया और उनका दायरा बढ़ा दिया. इस क़ानून के तहत चीन को यूएस म्यूनिशन लिस्ट में शामिल रक्षा संबंधी सामान और रक्षा सेवाओं के निर्यात के लिए लाइसेंस जारी करना रोक दिया गया है. इसके अलावा, अपराध नियंत्रण से जुड़े उपकरणों और कुछ उपग्रहों पर भी यह प्रतिबंध लागू है. सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा हथियार निर्यातक देश है. और यूरोप अमेरिकी हथियारों का सबसे बड़ा ग्राहक है. सीएनएन ने स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (एसआईपीआरआई ) के नए आंकड़ों का हवाला देकर कहा है कि 2020 से 2024 के बीच दुनिया के कुल हथियार निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी 43 फ़ीसदी रही. यह दुनिया के दूसरे सबसे बड़े हथियार निर्यातक फ्रांस की हिस्सेदारी से चार गुना से भी ज्यादा है. एसआईपीआरआई की रिपोर्ट के मुताबिक़, 2015 से 2019 के बीच वैश्विक हथियार निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी 35 फ़ीसदी थी. सीएनएन ने लिखा कि रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि पिछले एक दशक में यूरोप अमेरिकी हथियारों पर लगातार ज्यादा निर्भर हुआ है. पिछले पांच वर्षों में (जिसमें 2022 में यूरोप की सीमा पर रूस का यूक्रेन पर हमला भी शामिल है) यूरोप के नेटो देशों की ओर से आयात किए गए हथियारों में लगभग दो-तिहाई अमेरिका में बने थे. 2015 से 2019 के बीच यह हिस्सेदारी आधे से कुछ ज्यादा थी. एसआईपीआरआई के मुताबिक़, दो दशक में पहली बार अमेरिका के हथियारों के निर्यात का बड़ा हिस्सा यूरोपीय क्षेत्र में गया, न कि मध्य पूर्व में. रूस के हमले के बाद यूक्रेन ने अमेरिका समेत कई देशों से बड़ी मात्रा में हथियार और सैन्य उपकरण खरीदे हैं. बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित. BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.

स्रोत: BBC Hindi

📤 शेयर करें: