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यूएई ने इसराइली पीएम नेतन्याहू के 'गोपनीय' दौरे की पुष्टि की

✍️ Admin 📅 29 September, 2026 ⏰ 10:06 AM 👁 59 views

इमेज स्रोत, Amos Moshe Milner/GPO via Getty Images इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने रविवार को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायेद अल नाहयान से अबूधाबी में मुलाक़ात की. इस मुलाक़ात की पुष्टि यूएई की सरकारी न्यूज़ एजेंसी ने दो दिन बाद की है. इससे पहले इसराइल ने इसी साल मई में कहा था कि फ़रवरी में प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने यूएई का गोपनीय दौरा किया था और राष्ट्रपति से मुलाक़ात की थी, हालांकि तब यूएई ने इसे स्वीकार नहीं किया था. यूएई की सरकारी समाचार एजेंसी डब्ल्यूएएम नेतन्याहू के दौरे की पुष्टि करते हुए लिखा है, ''यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायेद अल नाहयान ने इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू से मुलाक़ात की, जो रविवार को यूएई के दौरे पर पहुँचे थे. बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों और आपसी रिश्तों को मज़बूत करने के तरीक़ों पर चर्चा की.'' इसराइली पीएमओ के मुताबिक़, नेतन्याहू अपनी पत्नी के साथ यूएई पहुँचे थे. दोनों देशों के नेताओं के बीच इसराइल और यूएई के संबंधों को मज़बूत करने के साथ-साथ क्षेत्रीय चुनौतियों पर चर्चा हुई. प्रधानमंत्री कार्यालय के आधिकारिक बयान में बताया गया कि नेतन्याहू के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख, मोसाद प्रमुख, सैन्य सचिव और विदेश नीति सलाहकार भी मौजूद थे. इमेज स्रोत, ilia YEFIMOVICH / AFP via Getty Images समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस ने दोनों नेताओं की बैठक की जानकारी रखने वाले एक शख़्स के हवाले से कुछ जानकारी साझा की. रिपोर्ट में दावा है कि नेतन्याहू और शेख़ मोहम्मद के बीच क़रीब एक घंटे तक बातचीत हुई. इसके मुताबिक़, बातचीत में मुख्य मुद्दों में से एक वह रिपोर्ट थी, जिसमें दावा किया गया था कि सात अक्तूबर 2023 को हमास के हमले से पहले यूएई के राष्ट्रपति ने नेतन्याहू को संभावित हमले के ख़तरे को लेकर चेतावनी दी थी. देश - दुनिया की बड़ी ख़बरें जिन्होंने बटोरी सुर्खियां. यह रिपोर्ट इसराइली अख़बार हारेत्ज़ ने इस महीने की शुरुआत में प्रकाशित की थी. रिपोर्ट में दावा किया गया था कि दक्षिणी इसराइल पर हमास के हमले से कुछ समय पहले शेख़ मोहम्मद ने नेतन्याहू को संभावित ख़तरे के बारे में आगाह किया था. बैठक की जानकारी रखने वाले व्यक्ति के अनुसार, नेतन्याहू ने शेख़ मोहम्मद से इस रिपोर्ट का खंडन करने को कहा. नेतन्याहू का कार्यालय इससे पहले भी हारेत्ज़ की रिपोर्ट को ख़ारिज कर चुका है. इससे पहले इसराइली अख़बार हारेत्ज़ ने 9 सितंबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट में दावा किया था कि हमले से करीब 10 दिन पहले शेख मोहम्मद ने नेतन्याहू से फ़ोन पर बात की थी. रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने उस समय के हमास नेता याह्या सिनवार की ओर से दी गई उस चेतावनी का ज़िक्र किया था, जिसमें बड़े हमले की तैयारी की बात कही गई थी. रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया था कि शेख मोहम्मद ने इससे पहले इसराइल की आंतरिक सुरक्षा एजेंसी शिन बेट को भी इस ख़तरे की जानकारी दी थी. हालांकि, प्रधानमंत्री कार्यालय ने हमले से पहले ऐसी किसी सूचना के प्रधानमंत्री तक पहुंचने से इनकार किया था. नेतन्याहू ने अगले दिन हारेत्ज़ के ख़िलाफ़ मुक़दमा करने की बात कही थी और रिपोर्ट को "गढ़ी हुई" और "राजनीति से प्रेरित" बताया था. इमेज स्रोत, KENNY HOLSTON/POOL/AFP via Getty Images नेतन्याहू की यात्रा की ख़बर सबसे पहले इसराइल के चैनल 12 ने प्रसारित की थी. इसके बाद इसराइल की आंतरिक सुरक्षा एजेंसी शिन बेट ने सैन्य सेंसर के प्रमुख के समक्ष शिकायत दर्ज कराई है. एजेंसी ने चैनल 12 पर गंभीर सेंसरशिप उल्लंघन का आरोप लगाया. शिन बेट के मुताबिक़, रिपोर्ट के प्रसारण का समय प्रधानमंत्री और ज़मीन पर मौजूद बलों की सुरक्षा के लिए ख़तरा पैदा कर सकता था. एजेंसी ने यह भी कहा कि रिपोर्ट से उसके कुछ ऑपरेशनल तरीकों का खुलासा हुआ. इमेज स्रोत, Chris Jackson/Getty Images मई 2026 में भी इसराइल ने कहा था कि नेतन्याहू ने फ़रवरी में यूएई की यात्रा की, लेकिन यूएई ने इसे नहीं माना था. उस समय इसराइली प्रधानमंत्री कार्यालय ने दावा किया था कि नेतन्याहू ने यूएई का "गोपनीय दौरा" किया और राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायेद अल नाहयान से मुलाकात की. इसराइल ने इस मुलाकात को दोनों देशों के संबंधों में "ऐतिहासिक प्रगति" बताया था. हालांकि, यूएई के विदेश मंत्रालय ने नेतन्याहू के दौरे के दावे को ख़ारिज कर दिया था. यूएई और इसराइल ने 2020 में अमेरिकी समर्थन वाले अब्राहम अकॉर्ड पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन कई वर्षों तक दोनों देशों के संबंध तनावपूर्ण रहे. इमेज स्रोत, AHMAD GHARABLI/AFP via Getty Images 7 अक्तूबर 2023 की सुबह हमास ने ग़ज़ा पट्टी से इसराइल पर बड़ा हमला किया था. हमास के लड़ाकों ने रॉकेट हमलों के साथ-साथ ज़मीन और हवा के रास्ते इसराइल की सीमा में घुसपैठ की और दक्षिणी इसराइल के कई रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया. हमले में महिलाओं, बच्चों, बुज़ुर्गों और 300 सैनिकों समेत 1,200 से अधिक लोगों की मौत हुई, जबकि क़रीब 25 लोगों को हमास ने बंधक बनाया. इसके बाद तत्कालीन इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने हमास के ख़िलाफ़ युद्ध की घोषणा की. हमले के बाद इसराइली मीडिया में इस बात को लेकर सवाल उठे कि क्या नेतन्याहू और उनकी सरकार को हमले की पहले से कोई जानकारी थी. इस मुद्दे पर विपक्षी नेताओं ने नेतन्याहू सरकार की भूमिका और सुरक्षा तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए. चार विपक्षी नेताओं- गादी आइज़ेनकोट, नाफ़्ताली बेनेट, एविगडोर लिबरमैन और येर गोलान ने एक संयुक्त बयान जारी कर नेतन्याहू सरकार की भूमिका और 7 अक्तूबर की घटनाओं की "तत्काल और व्यापक जांच" की मांग की. बयान में विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाया, "नेतन्याहू को हमले की जानकारी कब मिली, उन्हें क्या जानकारी थी, उन्होंने सुरक्षा प्रतिष्ठान को इसकी सूचना क्यों नहीं दी और इसराइली नागरिकों की सुरक्षा के लिए समय रहते क़दम क्यों नहीं उठाए." विपक्षी नेताओं ने कहा था कि इसराइली जनता को इन सवालों के स्पष्ट जवाब मिलने चाहिए और 7 अक्तूबर की घटनाओं के लिए ज़िम्मेदारी तय करने के लिए पूरी जांच की जानी चाहिए. बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित. 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स्रोत: BBC Hindi

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