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Death

डोनाल्ड ट्रंप ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का नाम बदलकर क्या रख दिया?

✍️ Admin 📅 30 September, 2026 ⏰ 09:02 AM 👁 58 views

इमेज स्रोत, Kevin Dietsch/Getty Images अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आधिकारिक तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का नाम बदलकर सुपर इंटेलिजेंस (एसआई) करने के एक आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं. व्हाइट हाउस में टेक दिग्गजों जैसे- एलन मस्क, सुंदर पिचाई, मार्क ज़करबर्ग और जेनसेन ह्वांग के साथ हुई एक बैठक के बाद यह एग्ज़ीक्यूटिव ऑर्डर साइन किया गया. अब अमेरिकी सरकारी कामकाज, वेबसाइटों और आधिकारिक दस्तावेज़ों में एआई की जगह एसआई शब्द का इस्तेमाल किया जाएगा. ट्रंप ने कहा, "आर्टिफिशियल शब्द सुनने में ऐसा लगता है जैसे तकनीक नकली या बनावटी हो. यह तकनीक असली और बेहद शानदार है, इसलिए सुपर इंटेलिजेंस शब्द ज़्यादा सटीक है." एग्ज़ीक्यूटिव ऑर्डर में कहा गया है, "सुपर इंटेलिजेंस’ शब्द इन तकनीकों की संभावनाओं, क्षमता और तेज़ी से हो रहे विकास को ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ की तुलना में अधिक उपयुक्त तरीके से दर्शाता है." गौरतलब है कि इससे पहले ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोल किया था, जिसमें उन्होंने लोगों से पूछा था कि एआई का नाम बदलकर क्या करना चाहिए. ट्रंप ने कुछ ऑप्शन भी सामने रखे थे. इसके बाद उन्होंने नाम बदला है. एफिल टावर का संचालन करने वाली कंपनी एसईटीई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (चीफ़ एग्जीक्यूटिव) पैट्रिक ब्रांको रुवो इस साल के अंत में अपने पद से इस्तीफ़ा देंगे. उनका यह फ़ैसला उस वाक़ये के बाद आया है, जब एक हिंदू संगठन के प्रतिनिधिमंडल के दौरे पर रहने के दौरान महिला कर्मचारियों को उनके कार्यस्थल से हटाकर पुरुष कर्मचारियों से काम कराया गया. इस मामले में काफ़ी विवाद हुआ था. एसईटीई ने एक बयान में बताया कि रुइवो 2018 से एफिल टावर के डायरेक्टर जनरल के पद पर कार्यरत हैं, वो साल के अंत में अपनी ज़िम्मेदारी छोड़ देंगे. कंपनी ने बताया कि आंतरिक जांच में पाया गया कि प्रतिनिधिमंडल के दौरे की व्यवस्था में 'परिचालन संबंधी ख़ामियां और कमियां' थीं. जांच के मुताबिक, इन्हीं के चलते महिला कर्मचारियों को हटाने जैसी 'अस्वीकार्य स्थिति' पैदा हुई. गौरतलब है कि कंपनी के कर्मचारियों का आरोप था कि एक हिंदू धार्मिक समूह के आने पर महिला कर्मचारियों को वहां से हट जाने के लिए कहा गया था. इस घटना से कर्मचारियों में नाराज़गी फैल गई. फ़्रांस के राजनेताओं ने इसकी आलोचना की और शहर के अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी थी. जापान के आईची-नागोया में खेले जा रहे एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला कंपाउंड तीरंदाजी टीम ने गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया है. भारत ने महिला कंपाउंड टीम इवेंट के फाइनल में चीन को 238-234 के अंतर से हराकर गोल्ड मेडल जीता. यह एशियन गेम्स 2026 में भारत का सातवां स्वर्ण पदक है. भारतीय तीरंदाजों ने 238 अंक के स्कोर के साथ महिला टीम के विश्व रिकॉर्ड की बराबरी भी कर ली. इससे पहले सेमीफाइनल मुकाबले में भारतीय टीम ने दक्षिण कोरिया को कड़े मुकाबले में 235-233 से शिकस्त दी थी. इस जीत के साथ भारतीय महिला टीम ने फाइनल में जगह बनाई थी. जम्मू-कश्मीर के कठुआ ज़िले में मंगलवार शाम एक सीआईएसएफ़ जवान ने कथित तौर पर अपने साथियों पर सर्विस राइफ़ल से फ़ायरिंग कर दी. घटना में असिस्टेंट कमांडेंट समेत सीआईएसएफ़ के चार जवानों की मौत हो गई. अधिकारियों के मुताबिक़, वारदात शाम क़रीब 7:30 बजे बसोहली के पास माश्का में हुई. न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के अनुसार, सीआईएसएफ़ के हेड कांस्टेबल अभिदेश कुमार का कुछ साथियों के साथ किसी बात को लेकर विवाद हुआ था. इसके बाद उन्होंने कथित तौर पर अपनी सर्विस राइफ़ल से फ़ायरिंग शुरू कर दी. फ़ायरिंग में चार सीआईएसएफ़ कर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए. उन्हें इलाज के लिए नज़दीकी एनएचपीसी अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. मृतकों की पहचान असिस्टेंट कमांडेंट अंकित कुमार पांडे, सब-इंस्पेक्टर लक्ष्मण सिंह, कांस्टेबल रफ़ीक़ अहमद और कांस्टेबल संदीप कुमार के रूप में हुई है. घटना के बाद अभियुक्त हेड कांस्टेबल को उसके साथियों ने क़ाबू कर लिया. बाद में उसे गिरफ़्तार कर लिया गया. अधिकारियों के अनुसार, घटना में इस्तेमाल सर्विस राइफ़ल भी जब्त कर ली गई है. घटना की सूचना मिलते ही सीआईएसएफ़ और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौक़े पर पहुंचे. अधिकारियों ने बताया कि विवाद की वास्तविक वजह और फ़ायरिंग की परिस्थितियों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है. इमेज स्रोत, Angelina Katsanis/Bloomberg via Getty Images ईरान ने इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू की संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) दौरे की निंदा करते हुए बयान जारी किया है. ईरान के विदेश मंत्रालय ने मध्य पूर्व के देशों को नेतन्याहू के यूएई दौरे के बाद चेतावनी देते हुए कहा कि इससे अस्थिरता पैदा होगी. विदेश मंत्रालय ने मंगलवार रात जारी बयान में कहा, "क्षेत्र की सुरक्षा सभी देशों की साझा ज़िम्मेदारी है. ऐसा कोई भी कदम, जिससे क्षेत्र में असुरक्षित ताक़तों के आने का रास्ता बने, आख़िरकार क्षेत्र के सभी देशों के लिए नुकसानदेह होगा." "इससे पश्चिम एशिया में बंटवारा, असुरक्षा और अस्थिरता पैदा होगी. इसलिए क्षेत्र की सरकारों से उम्मीद की जाती है कि वे क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने की अपनी ज़िम्मेदारी को समझें." बयान में कहा, "वे (बाकी देशों की सरकारें) इसराइली शासन की नुकसान पहुंचाने वाली मौजूदगी के लिए रास्ता बनाने से बचें और अपनी ज़मीन को दूसरे देशों के ख़िलाफ़ होने वाली गतिविधियों का मंच न बनने दें." गौरतलब है कि नेतन्याहू रविवार को यूएई के दौरे पर थे, उनकी वहां के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायेद अल नाहयान से मुलाक़ात हुई. हालांकि, इसराइल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस दौरे की पुष्टि दो दिन बाद की. संबंधित ख़बर: यूएई ने इसराइली पीएम नेतन्याहू के 'गोपनीय' दौरे की पुष्टि की बीबीसी हिन्दी के लाइव पेज पर आपका स्वागत है. मैं बीबीसी संवाददाता रौनक भैड़ा अब से दोपहर दो बजे तक आप तक अहम ख़बरें पहुंचाऊंगा. कल के लाइव पेज की ख़बरें पढ़ने के लिए आप यहां क्लिक करें. मोदी सरकार से पहले भी क्या एसआईआर होता था, अभी से कितना अलग था? ट्रंप-शी मुलाक़ात क्या वाकई उतनी गर्मजोशी भरी थी जितनी दिखाई दी? भारतीय शेयर बाज़ार में जारी गिरावट की चार बड़ी वजहें, कैसी होगी आगे की राह ईरानी सिंगर को कोड़े मारने की सज़ा बरक़रार, आख़िर उस कन्सर्ट में हुआ क्या था?

स्रोत: BBC Hindi

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