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एलन मस्क बोले- क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं, टकराव की ये है वजह

✍️ Admin 📅 08 October, 2026 ⏰ 09:28 PM 👁 53 views

इमेज स्रोत, Daniel Heuer/Bloomberg via Getty Images मशहूर उद्योगपति एलन मस्क ने एक्स पर एक पोस्ट कर आरोप लगाया है कि कुछ ख़ास उद्योगपति भारत में उनकी कंपनी स्टारलिंक की सैटेलाइट आधारित इंटरनेट सर्विस की एंट्री को "रोक" रहे हैं. भारत सरकार ने एक प्रेस रिलीज़ जारी कर मस्क के आरोपों का खंडन किया है. संचार मंत्रालय ने 8 अक्तूबर को कहा कि भारत का सैटेलाइट कम्युनिकेशन रेगुलेटरी सिस्टम निष्पक्ष और भेदभाव रहित है. सरकार के मुताबिक़ स्टारलिंक समेत तीन कंपनियां इस समय सुरक्षा जांच के एक जैसे रेगुलेटरी फेज में हैं. मस्क ने 8 अक्तूबर को एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "स्टारलिंक को 165 से ज़्यादा देशों में लाइसेंस मिला हुआ है और कंपनी भारत सरकार की हर ज़रूरत को पूरा करने में पांच साल से काम कर रही है, फिर भी भारत में उसे पूरी तरह शुरू करने की मंज़ूरी क्यों नहीं मिल रही. क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं?" इससे पहले मस्क ने भारत में स्टारलिंक को कथित तौर पर रोके जाने को लेकर कहा था कि कुछ "ओलिगार्क" यानी बेहद प्रभावशाली कारोबारी अपने एकाधिकार को बचाने के लिए स्टारलिंक को भारत आने से रोक रहे हैं. उन्होंने एक पोस्ट के जवाब में लिखा, "बदकिस्मती से, हमें कुछ ख़ास उद्योगपति रोक रहे हैं, ताकि भारतीय लोगों पर उनकी एकाधिकारवादी पकड़ बनी रहे. आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि वे कौन हैं... यह भारत के लोगों के ख़िलाफ़ अपराध है." मस्क ने जिस पोस्ट को शेयर करते हुए ये बात लिखी, उस पोस्ट में लिखा था, "भारत के कई गांवों और दूरदराज़ इलाक़ों में अब भी तेज़ इंटरनेट की पहुंच सीमित है. स्टारलिंक का दावा है कि उसकी सैटेलाइट तकनीक ऐसे इलाक़ों में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचा सकती है, जहां फाइबर या मोबाइल नेटवर्क पहुंचाना मुश्किल है. कंपनी ने भारत में 20 गेटवे साइट भी तैयार कर ली हैं. स्टारलिंक शिक्षा, टेलीमेडिसिन, छोटे कारोबार और आपदा के समय कनेक्टिविटी में मदद कर सकता है. कंपनी का कहना है कि वह भारत में सेवा शुरू करने के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए बाकी मंज़ूरियां और स्पेक्ट्रम आवंटन पूरा होना ज़रूरी है." भारत सरकार ने कहा है कि स्टारलिंक के साथ कोई भेदभाव नहीं हो रहा है. संचार मंत्रालय ने एक प्रेस रिलीज़ में कहा, "भारत की सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाओं के नियम-क़ानून निष्पक्ष और सभी के लिए एक जैसे हैं. सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर की जा रही है, जिसमें भारत के सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाओं से जुड़े नियमों की निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए हैं. इसमें कहा गया है कि इन नियमों को भेदभाव के साथ लागू किया जा रहा है." सरकार ने कहा है कि सभी टेलीकॉम सेवाओं, जिसमें सैटेलाइट कम्युनिकेशन भी शामिल है, के लिए निष्पक्ष और गैर-भेदभाव वाला नियम बनाया गया है. सरकार के मुताबिक़, "तीन कंपनियों को सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाओं के लिए टेलीकॉम लाइसेंस दिए गए हैं. इन सभी कंपनियों को लाइसेंस की शर्तों के मुताबिक़ सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन करना होगा." सरकार ने कहा कि इसका मक़सद यह सुनिश्चित करना है कि इन कंपनियों की सेवाएं यूज़र्स और उनके डेटा की सुरक्षा से जुड़े सभी नियमों को पूरा करें. सरकार के मुताबिक़, "तीनों कंपनियों की सुरक्षा जांच अभी चल रही है. किसी कंपनी की यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद वह स्पेक्ट्रम आवंटन के अगले चरण में जा सकती है. इस समय तीनों कंपनियां लगभग एक ही नियामक चरण में हैं. इसलिए यह कहना कि नियम या उन्हें लागू करने का तरीका भेदभावपूर्ण, बेबुनियाद और गलत है." टेलीकम्युनिकेशन कंपनी भारती एयरटेल ने भी एलन मस्क के इस आरोप को ख़ारिज किया है कि उनकी सैटकॉम कंपनी स्टारलिंक को भारत में काम करने से रोका जा रहा है. भारती एयरटेल के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल ने कहा कि उनका सैटकॉम उपक्रम ईयूटेलसेट वनवेब भी भारत में अपनी सेवाएं शुरू करने के लिए मंज़ूरी का इंतज़ार कर रहा है. इमेज स्रोत, Matteo Della Torre/NurPhoto via Getty Images स्टारलिंक, मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा है. इसमें ज़मीन पर लगे मोबाइल टावर या फाइबर के बजाय अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट के ज़रिए इंटरनेट दिया जाता है. इस तकनीक की ख़ासियत यह है कि यह उन इलाक़ों में भी इंटरनेट पहुंचा सकती है जहां फाइबर बिछाना या मोबाइल टावर लगाना मुश्किल है. भारत सरकार ने भी कहा है कि सैटेलाइट कम्युनिकेशन ग्रामीण, दूरदराज़, पहाड़ी, सीमावर्ती और समुद्री इलाक़ों में कनेक्टिविटी बढ़ाने में मदद कर सकता है. इमेज स्रोत, Kent NISHIMURA / AFP via Getty Images बिज़नेस स्टैंडर्ड के मुताबिक़ स्टारलिंक ने 2022 में भारत में सेवा शुरू करने की कोशिश शुरू की थी. जून 2025 में उसे दूरसंचार विभाग से जीएमपीसीएस यानी सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवा का लाइसेंस मिला. इसके बाद सितंबर 2025 में ट्रायल के लिए स्पेक्ट्रम दिया गया. लेकिन व्यावसायिक सेवा शुरू करने के लिए सुरक्षा मंज़ूरियों समेत कुछ और प्रक्रियाएं पूरी होना बाकी हैं. रॉयटर्स के मुताबिक़ दिलचस्प बात यह है कि भारत में स्टारलिंक के दो बड़े संभावित प्रतिद्वंद्वी रिलायंस जियो और भारती एयरटेल उसके साथ साझेदारी भी कर चुके हैं. मार्च 2025 में जियो और एयरटेल ने स्टारलिंक के साथ समझौते किए थे. इनके तहत दोनों कंपनियां स्टारलिंक के उपकरण अपने रिटेल नेटवर्क के ज़रिए उपलब्ध कराने की दिशा में काम करेंगी. हालांकि ब्रॉडबैंड सेवा के बाज़ार में ये कंपनियां स्टारलिंक की प्रतिद्वंद्वी भी हैं. भारत में सैटेलाइट इंटरनेट के लिए फिलहाल तीन कंपनियां लाइसेंस हासिल कर चुकी हैं- स्टारलिंक, रिलायंस जियो और यूटेलसैट वनवेब, जिसे भारती समूह का समर्थन है. स्टारलिंक की भारत में एंट्री के दौरान स्पेक्ट्रम को लेकर भी बड़ा विवाद हुआ था. मस्क चाहते थे कि सैटेलाइट कंपनियों को स्पेक्ट्रम प्रशासनिक तरीके से दिया जाए, जबकि रिलायंस जियो समेत कुछ भारतीय कंपनियां स्पेक्ट्रम की नीलामी के पक्ष में थीं. बाद में भारत सरकार ने सैटेलाइट स्पेक्ट्रम को नीलामी के बजाय प्रशासनिक तरीके से आवंटित करने का रास्ता अपनाया. बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित. 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स्रोत: BBC Hindi

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