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Death

पैर हिलाना भी कसरत: बिना अलग से समय निकाले दिन भर एक्टिव कैसे रहें?

✍️ Admin 📅 29 October, 2026 ⏰ 08:08 PM 👁 21 views

सुबह दफ़्तर की कुर्सी, फिर कार की सीट और शाम को घर का सोफ़ा. कई बार पूरा दिन बैठे-बैठे ही निकल जाता है. रात के खाने के समय अचानक एहसास होता है कि आपने पूरे दिन कोई कसरत नहीं की. दुनिया भर में हुए कई अध्ययनों में पाया गया है कि लंबे समय तक बैठे रहने वाली जीवनशैली से गंभीर बीमारियों का ख़तरा बढ़ सकता है. इसलिए बैठकर गुज़ारे जाने वाले समय को कम करने के लिए हम जो भी कर सकते हैं, उससे हमारी पूरी सेहत को फ़ायदा होता है. लेकिन कसरत के लिए हर दिन अलग से समय निकालना आसान नहीं होता. यहीं काम आती हैं रोज़मर्रा की वे छोटी-छोटी गतिविधियां, जिन्हें हम बिना कसरत समझे करते रहते हैं. इसे 'इंसिडेंटल एक्सरसाइज़' कहा जाता है. यानी ऐसी शारीरिक गतिविधि, जो जानबूझकर की जाने वाली कसरत का हिस्सा नहीं होती. इसे 'नॉन-एक्सरसाइज़ एक्टिविटी थर्मोजेनेसिस' या 'नीट' भी कहा जाता है. न्यूज़ीलैंड की ऑकलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नोलॉजी के रिसर्च फ़ेलो अनंत नारायणन बताते हैं कि सोने, खाना खाने या जानबूझकर कसरत करने के अलावा शरीर को हिलाने-डुलाने में ख़र्च होने वाली ऊर्जा इसके दायरे में आती है. मसलन, बैठे-बैठे पैर हिलाना या बर्तन धोना भी ऐसी गतिविधि हो सकती है. नारायणन कहते हैं, "बैठने का तरीक़ा बदलना, कंधों को घुमाना या पैरों को मोड़ना और सीधा करना जैसी छोटी गतिविधियां भी इसमें शामिल हैं." सेहत को बेहतर बनाए रखने में ये छोटी-छोटी गतिविधियां उम्मीद से कहीं ज़्यादा असरदार हो सकती हैं. इनसे ज़्यादा कैलोरी ख़र्च करने, दिल और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियों का ख़तरा कम करने और यहां तक कि मौत का जोखिम घटाने में भी मदद मिल सकती है. अगर हमें इन गतिविधियों के बारे में पता हो, तो रोज़मर्रा की आदतों में मामूली बदलाव करके इन्हें आसानी से बढ़ाया जा सकता है. इसके लिए कई तरीक़े आज़माए जा सकते हैं. देश - दुनिया की बड़ी ख़बरें जिन्होंने बटोरी सुर्खियां. बैठे-बैठे पैर हिलाने को ही उदाहरण के तौर पर लीजिए. बचपन से हमें पैर न हिलाने की सलाह दी जाती है. इसे अक्सर ऊबने या किसी बात पर ध्यान न देने की निशानी माना जाता है. लेकिन इस सलाह को न मानने की कई वजहें हैं. जब हम लंबे समय तक बैठे रहते हैं, तो पैरों की मांसपेशियां लगभग निष्क्रिय हो जाती हैं. नारायणन के मुताबिक़, इससे मांसपेशियों का वह नियमित सिकुड़ना कम हो जाता है, जो ख़ून से ग्लूकोज़ हटाने और रक्त का प्रवाह सामान्य बनाए रखने में मदद करता है. इसके उलट, पैर हिलाने से मांसपेशियों की गतिविधि बढ़ती है. हाल में हुए एक अध्ययन में पाया गया कि इससे चुपचाप बैठे रहने के मुक़ाबले ज़्यादा कैलोरी ख़र्च करने में मदद मिलती है. नारायणन कहते हैं, "पहले हुए कुछ शोध बताते हैं कि पैर हिलाने से रक्त वाहिकाओं के कामकाज को सामान्य बनाए रखने और ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है." खड़े होकर ऐसा करने से ये फ़ायदे और बढ़ सकते हैं. एक छोटे अध्ययन में पाया गया कि आदतन पैर हिलाने से चुपचाप बैठे रहने के मुक़ाबले लगभग 16 फ़ीसदी ज़्यादा ऊर्जा ख़र्च होती है. चलना इससे बेहतर हो सकता है, लेकिन हर स्थिति में चल पाना संभव नहीं होता. ऐसे में विमान में सफ़र करते समय, अपनी मेज़ पर काम करते हुए या अभी इसी समय पैर हिलाना एक विकल्प हो सकता है. रोज़मर्रा में शरीर को सक्रिय रखने के इन तरीक़ों के लिए न तो जिम जाना ज़रूरी है और न ही कसरत के लिए अलग से समय निकालना पड़ता है. हम अक्सर भूल जाते हैं कि घर के रोज़ के काम भी लंबे समय तक बैठे रहने से बचाते हैं. खाना बनाना, बाग़वानी करना और वैक्यूम क्लीनर से घर की सफ़ाई करना भी कसरत का हिस्सा हो सकता है. सेहत को फ़ायदा पहुंचाने के लिए घंटों तक शरीर को हिलाते रहने की ज़रूरत नहीं है. साल 2024 में हुई एक बड़ी रिसर्च में पता चला कि हर दिन केवल चार मिनट की छोटी-छोटी शारीरिक गतिविधियां भी फ़ायदेमंद हो सकती हैं. इसमें ऐसी गतिविधियां शामिल थीं, जो एक बार में एक मिनट से भी कम समय तक की गई थीं. रिसर्च में पता चला कि इससे लंबे समय तक बैठे रहने के कारण बढ़ने वाले दिल और ख़ून की नसों से जुड़ी बीमारियों के ख़तरे को कम करने में मदद मिल सकती है. इस रिसर्च में ब्रिटेन के 22 हज़ार से ज़्यादा लोगों से मिली जानकारी का विश्लेषण किया गया. इन लोगों ने एक ऐसा उपकरण पहना था, जो यह रिकॉर्ड करता था कि वे पूरे दिन में कितना चलते-फिरते हैं. रिसर्च में केवल ऐसे लोगों को शामिल किया गया था, जो तय समय पर नियमित रूप से कोई कसरत नहीं करते थे. रिसर्च करने वाली टीम ने आठ साल तक इन लोगों की दिनचर्या पर नज़र रखी. इस दौरान पता चला कि रोज़मर्रा में शरीर की हलचल बढ़ाकर दिन में 11 घंटे से ज़्यादा बैठे रहने से होने वाले सेहत के ख़तरों को कम किया जा सकता है. बाद में हुई रिसर्च में यह भी पता चला कि रोज़मर्रा की ऐसी गतिविधियों से समय से पहले मौत का ख़तरा कम हो सकता है. ऑस्ट्रेलिया की मोनाश यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ शोधकर्ता निकोलस कोएमेल ने इस रिसर्च की अगुवाई की थी. उनके मुताबिक़, सीढ़ियां चढ़ना, सामान से भरे भारी थैले उठाना और बच्चों के साथ खेलना भी शरीर को सक्रिय रखने वाली गतिविधियां हैं. कोएमेल कहते हैं कि अगर हम दिनभर में चलने-फिरने के छोटे-छोटे मौक़ों पर ध्यान दें, तो थोड़ी अधिक मेहनत करके उनका फ़ायदा बढ़ा सकते हैं. मसलन, किसी जगह जाते समय अपनी सामान्य रफ़्तार से थोड़ा तेज़ चल सकते हैं. इसी तरह, दुकान जाते समय गाड़ी कुछ दूरी पर खड़ी करके बाक़ी रास्ता पैदल तय किया जा सकता है. दुकान पहुंचने के बाद ट्रॉली लेने के बजाय टोकरी का इस्तेमाल करना भी शरीर को सक्रिय रखने का एक तरीक़ा हो सकता है. कुछ किलो सामान टोकरी में लेकर दुकान में घूमने से अनजाने में आपकी मांसपेशियों की कसरत हो सकती है. फ़िटनेस का कोई बड़ा लक्ष्य कई बार मुश्किल और थकाने वाला लग सकता है. ऐसे में दिनभर में शरीर की हलचल बढ़ाने का एक आसान तरीक़ा यह है कि उसे उन कामों के साथ जोड़ दिया जाए, जो आप पहले से करते हैं. ब्रिटेन की लॉफ़बरा यूनिवर्सिटी में लोगों के व्यवहार और सेहत पर काम करने वाली प्रोफ़ेसर अमांडा डेली इसे पहले से चली आ रही आदत के साथ एक नई गतिविधि जोड़ना बताती हैं. इसका सीधा मतलब है कि रोज़ के किसी काम के साथ शरीर को हिलाने-डुलाने वाली छोटी-सी गतिविधि भी जोड़ ली जाए. दांत साफ़ करते समय एड़ियां उठाकर पंजों के बल खड़े होने की कोशिश की जा सकती है. मेज़ पर बैठे हुए पैर ऊपर उठाए जा सकते हैं. इसी तरह, फ़ोन पर बात करते समय बैठने के बजाय चलते हुए बातचीत की जा सकती है. डेली बताती हैं कि उनके घर में एक नियम है. ऑनलाइन मंगाया गया सामान घर पर पहुंचाने के बजाय पास के एक लॉकर पर मंगाया जाता है. वह कहती हैं, "अगर हमें कोई सामान चाहिए, तो उसे लेने जाना पड़ता है." "किशोर बच्चों को उनके कमरों से बाहर निकालने और दिनभर में उन्हें थोड़ा चलने का मौक़ा देने का भी यह एक अच्छा तरीक़ा हो सकता है." काम के दौरान भी ऐसी नई आदतें अपनाई जा सकती हैं. एक रिसर्च के दौरान डेली और उनके साथियों ने डॉक्टरों को ऐसी मेज़ें दीं, जिन पर वे खड़े होकर काम कर सकते थे. इससे डॉक्टरों के रोज़ बैठने के समय में लगभग दो घंटे की कमी आई. रिसर्च करने वाली टीम ने पाया कि इसके बाद डॉक्टर अपने मरीज़ों से लंबे समय तक बैठे रहने के नुक़सान के बारे में ज़्यादा बात करने लगे. डेली कहती हैं, "रोज़मर्रा की ये छोटी गतिविधियां शरीर को सक्रिय रखने का ऐसा तरीक़ा हैं, जिनके लिए अलग से बहुत ज़्यादा समय निकालने की ज़रूरत नहीं पड़ती." "ज़रूरी यह है कि ऐसे तरीक़े चुने जाएं, जो मुश्किल न लगें और जिन्हें रोज़मर्रा की ज़िंदगी में आसानी से अपनाया जा सके." दिनभर में की जाने वाली ये छोटी गतिविधियां धीरे-धीरे आपकी नियमित आदतों का हिस्सा बन सकती हैं. कोएमेल के मुताबिक़, यह बदलाव लोगों को लगातार सक्रिय रहने के लिए प्रेरित कर सकता है. वह कहते हैं, "जब कोई गतिविधि बिना ख़ास कोशिश के आपकी ज़िंदगी में शामिल हो जाती है, तो धीरे-धीरे वही आपकी जीवनशैली बन जाती है." बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित. BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.

स्रोत: BBC Hindi

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