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'मैं राहुल गांधी का पक्ष नहीं रखूंगा, वह खुद...', संसद में नेता प्रतिपक्ष के बवाल पर बोले शशि थरूर

✍️ Admin 📅 02 February, 2026 ⏰ 06:48 PM 👁 58 views

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोमवार (2 फरवरी, 2026) को लोकसभा में मचे बवाल पर कहा है कि सरकार को इतना ओवररिएक्ट करने की जरूरत नहीं है. नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चीन मामले पर एक मैग्जीन में छपे भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित पुस्तक के कुछ अंश पढ़ने की कोशिश की, जिस पर विवाद शुरू हो गया. जब शशि थरूर से राहुल गांधी को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें नेता प्रतिपक्ष का पक्ष रखने की जरूरत नहीं है, वह खुद अपना पक्ष रख रहे हैं.

न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए शशि थरूर ने कहा कि राहुल गांधी को कभी अपनी बात सही से कहने का मौका ही नहीं मिला पाया है. उन्होंने कहा, 'आर्टिकल में सेनाओं या जवानों को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है. मुद्दा उन फैसलों को लेकर है, जो सरकार ने लिए या नहीं लिए और राहुल गांधी सिर्फ यही कहना चाह रहे थे, मैं बस यही सकता हूं कि मुझे लगता है कि सरकार को इतना ओवर रिएक्ट करने की जरूरत नहीं है.'

शशि थरूर ने आगे कहा कि उन्हें राहुल गांधी का पक्ष रखने की जरूरत नहीं है क्योंकि वह खुद मीडिया से बात कर रहे हैं और अपना पक्ष रख रहे हैं, तो मुझे उनका पक्ष रखने की जरूरत नहीं है. शशि थरूर ने इस दौरान पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के कार्यकाल का भी जिक्र किया और कहा कि उस समय चीन के साथ जंग के दौरान संसद लगातार चलती थी और इन मुद्दों पर बात होती थी. यहां तक की कांग्रेस सांसद भी प्रधानमंत्री के फैसलों पर सवाल उठा सकते थे.

शशि थरूर ने कहा, 'इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि जवाहर लाल नेहरू जी के कार्यकाल में कांग्रेस की सरकार ने क्या किया. जब नवंबर, 1962 में चीन के साथ भारत की जंग हुई तब संसद में इस पर चर्चा हुई. कोई व्हिप नहीं था और कांग्रेस के सांसद भी अपनी सरकार से सवाल पूछते थे. यहां तक कि उन्होंने पीएम के सामने उनके फैसलों की आलोचना तक की थी. इस तरह संसद में डिबेट होती थीं. जब 1965 और 1971 की जंग हुई तब भी संसद चलती रहती थी. सदन बुलाया जाता था, संसद होती ताकि देश को सरकार पर भरोसा रहे.'

शशि थरूर ने कहा कि सरकार को डरना नहीं चाहिए. मुझे लगता है कि सरकार को इस तरह रिएक्ट नहीं करना चाहिए, उसे चर्चा को प्रोत्साहित करना चाहिए, चीजों को क्लेरीफाई करना चाहिए. उन्होंने कहा कि चीन का मुद्दा पूरे देश के लिए चिंता का विषय है तो उस पर चर्चा करो. रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री को बोलने दीजिए ताकि जनता को पता चले कि क्या चल रहा है. ऐसी स्थिति पैदा मत कीजिए कि सारी चीजें छिप जाएं क्योंकि ये न तो देश के लिए अच्छा है और न ही इस तरह संसद की कार्यवाही के लिए.

राहुल गांधी ने सोमवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान बोलना शुरू किया तो उन्होंने एक मैग्जीन में छपे पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे की किताब के कुछ अंश पढ़ने की कोशिश की, तभी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें टोक दिया. राजनाथ सिंह ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को बताना चाहिए कि वह जिस पुस्तक का उल्लेख कर रहे हैं, वो प्रकाशित हुई है या नहीं. गृह मंत्री अमित शाह ने भी कहा कि सदन में पुस्तक और पत्रिका में प्रकाशित बातों को नहीं रखा जा सकता और नेता प्रतिपक्ष को व्यवस्था का पालन करना चाहिए. इस दौरान राहुल गांधी किताब के अंश पढ़ने पर अड़े रहे, जिसके चलते दो बार संसद स्थगित हुई. फिर स्पीकर ने संसद मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी.

स्रोत: ABP Hindi

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