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बांग्लादेश का टी20 वर्ल्ड कप नहीं खेलने का फ़ैसला: सहायक कोच ने कहा- पूर्व खेल सलाहकार ने झूठ बोला

✍️ Admin 📅 21 February, 2026 ⏰ 09:02 AM 👁 50 views

इमेज स्रोत, Munir UZ ZAMAN / AFP) (Photo by MUNIR UZ ZAMAN/AFP via Getty बांग्लादेश क्रिकेट टीम के वरिष्ठ सहायक कोच मोहम्मद सलाहुद्दीन ने बांग्लादेश के टी20 वर्ल्ड कप न खेलने के फ़ैसले पर पूर्व खेल सलाहकार आसिफ़ नज़रुल की आलोचना की है. बांग्लादेशी अख़बार 'द डेली स्टार' के मुताबिक़, नज़रुल ने वर्ल्ड कप न खेलने का फ़ैसला बोर्ड और खिलाड़ियों का बताया था. इस पर मोहम्मद सलाहुद्दीन ने कहा कि नज़रुल ने 'खुलेआम झूठ बोला'. दरअसल, नज़रुल ने पहले कहा था कि सरकार ने टीम को आईसीसी पुरुष टी20 वर्ल्ड कप में न भेजने का फ़ैसला किया था, लेकिन बाद में उन्होंने इसकी ज़िम्मेदारी बोर्ड और खिलाड़ियों पर डालते हुए अपना रुख़ बदल लिया. बांग्लादेश क्रिकेट टीम के वरिष्ठ सहायक कोच ने कहा, "वह ढाका यूनिवर्सिटी में शिक्षक हैं. देश के सर्वोच्च शिक्षण संस्थान से जुड़े व्यक्ति का इस तरह झूठ बोलना हम स्वीकार नहीं कर सकते. हम इसे कैसे मान लें? उन्होंने पहले एक बात कही और बाद में यू-टर्न ले लिया." सलाहुद्दीन ने वर्ल्ड कप से बाहर होने के बाद खिलाड़ियों की मानसिक स्थिति पर भी बात की. उन्होंने कहा कि कुछ खिलाड़ी इतने टूट गए थे कि उन्हें दोबारा मैदान पर लाना मुश्किल हो गया था. उन्होंने कहा, "जब कोई खिलाड़ी वर्ल्ड कप खेलने जाता है, तो वह अपना सपना, 27 साल का सपना लेकर आता है. आप एक पल में वह सपना तोड़ देते हैं. ठीक है, अगर यह देश का फ़ैसला है और राष्ट्रीय कारणों से लिया गया है, तो वे देश के लिए कुर्बानी देंगे. लेकिन अगर नुक़सान की बात होगी, तो मैं केवल व्यक्तिगत नुक़सान की बात करूंगा." इमेज स्रोत, Dianne Manson-ICC/ICC via Getty बांग्लादेश के उप-कप्तान की प्रतिक्रिया इस बीच बांग्लादेश टी20 टीम के उप-कप्तान सैफ़ हसन ने भी टी20 वर्ल्ड कप से बाहर होने पर अफ़सोस जताया. उन्होंने कहा कि इसे पचा पाना आसान नहीं था. सैफ़ ने शुक्रवार को अपने आधिकारिक फ़ेसबुक अकाउंट पर लिखा, "वर्ल्ड कप नहीं खेल पाने के सदमे से उबरना आसान नहीं था क्योंकि यह मेरा पहला वर्ल्ड कप होता. यह लाइफ़ का सपना था, जिसके लिए बहुत मेहनत की और कुर्बानियां दीं." अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाने के लिए उसके नेताओं पर दबाव बनाने के उद्देश्य से सीमित सैन्य हमले पर विचार कर रहे हैं. राष्ट्रपति ने यह टिप्पणी एक पत्रकार के सवाल के जवाब में की. इससे कुछ घंटे पहले अधिकारियों ने हमले की संभावना का संकेत दिया था. गुरुवार को ट्रंप ने कहा था कि दुनिया को "शायद अगले 10 दिनों में" पता चल जाएगा कि ईरान के साथ समझौता होगा या अमेरिका सैन्य कार्रवाई करेगा. हाल के हफ्तों में अमेरिका ने इस क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाई है. शुक्रवार को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची ने कहा कि ईरान "संभावित समझौते के मसौदे" की तैयारी कर रहा है और इसे आने वाले कुछ दिनों में अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ को सौंपा जाएगा. अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों को शक है कि ईरान परमाणु हथियार के विकास की दिशा में बढ़ रहा है. ईरान ने हमेशा इस आरोप से इनकार किया है. इमेज स्रोत, Chen Mengtong/China News Service/VCG via Getty अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट की ओर से पिछले साल लगाए गए टैरिफ़ रद्द होने के बाद नया 10 फ़ीसदी ग्लोबल टैरिफ़ लागू कर दिया है. ट्रंप ने अदालत के फ़ैसले को "भयानक" बताया और उनकी व्यापार नीति को ख़ारिज करने वाले न्यायाधीशों को "बेवकूफ़" कहा. इससे पहले अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने व्हाइट हाउस की ओर से पिछले साल घोषित किए गए ज़्यादातर ग्लोबल टैरिफ़ को अवैध ठहराया. 6-3 के फ़ैसले में अदालत ने कहा कि राष्ट्रपति ने अपने अधिकारों से आगे बढ़कर फ़ैसला किया. यह फ़ैसला उन कारोबारियों और अमेरिकी राज्यों के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है जिन्होंने इन टैरिफ़ को चुनौती दी थी. इससे संभावित रूप से अरबों डॉलर के टैरिफ़ रिफंड का रास्ता खुल गया है, साथ ही वैश्विक व्यापार परिदृश्य में नई अनिश्चितता भी बढ़ गई है. शुक्रवार को व्हाइट हाउस में बोलते हुए ट्रंप ने संकेत दिया कि रिफंड बिना क़ानूनी लड़ाई के नहीं मिलेंगे. उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यह मामला वर्षों तक अदालत में उलझा रह सकता है. बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के लाइव पेज पर आपका स्वागत है. मैं बीबीसी संवाददाता सुमंत सिंह अब से दोपहर दो बजे तक आप तक अहम ख़बरें पहुंचाऊंगा. कल के लाइव पेज की ख़बरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. हमारे पेज पर मौजूद कुछ अहम ख़बरों को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें. - ट्रंप के ग्लोबल टैरिफ़ रद्द, सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को ट्रंप ने 'शर्मनाक' बताया - 'ऐसे फ़ैसले महिलाओं को तोड़ देते हैं': छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के रेप केस में विवादित फ़ैसले ने छेड़ी बहस - अमेरिका के सामने झुकने के बजाय ईरान उससे लड़ना क्यों चुन सकता है? - दिल्ली एआई सम्मेलन में रोबोट पर विवादः रोबोटिक्स में अमेरिका और चीन के मुक़ाबले कहां खड़ा है भारत? - पश्चिम बंगाल में हुमायूँ कबीर की पहल पर बाबरी मस्जिद का निर्माण शुरू, कैसा है मुर्शिदाबाद में माहौल?

स्रोत: BBC Hindi

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