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Death

यूएई को ईरान युद्ध की सबसे बड़ी क़ीमत क्यों चुकानी पड़ रही है?

✍️ Admin 📅 26 March, 2026 ⏰ 12:06 PM 👁 51 views

इमेज स्रोत, Christopher Pike/Getty Images अमेरिका-इसराइल और ईरान का युद्ध चौथे सप्ताह में प्रवेश कर रहा है और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) तेज़ी से ईरान के निशाने के रूप में उभर रहा है. ईरान की शुरुआती रणनीति केवल इसराइल का सामना करने पर फ़ोकस थी. उसने अब इस रणनीति से अलग खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के सदस्य देशों पर हज़ारों ड्रोन और मिसाइलें दागी हैं. ईरान ने लड़ाई की शुरुआत में ही कह दिया था कि वो इस क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाएगा. ईरान ने ख़ासतौर पर अपने हमले यूएई पर फ़ोकस करके अमेरिका और इसराइल को स्पष्ट संदेश दिया है, क्योंकि दोनों ही देशों के यूएई से अच्छे संबंध हैं. जब अमेरिका और इसराइल ने 28 फ़रवरी को ईरान के ख़िलाफ़ संयुक्त सैन्य अभियान शुरू किया, तो ईरान ने बिना देरी के सिर्फ़ इसराइल पर ही नहीं बल्कि अमेरिका के सहयोगी खाड़ी देशों पर भी हमले किए. बहरीन, कुवैत, सऊदी अरब, क़तर, ओमान और ख़ासकर यूएई को निशाना बनाया गया. खाड़ी अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमलों के साथ-साथ, ईरान ने नागरिक ठिकानों पर भी हमले किए, जिनमें हवाई अड्डे, होटल, रिहायशी इलाक़े और ख़ास तौर पर ऊर्जा ठिकाने शामिल हैं. संघर्ष को फैलाकर ईरान सभी पक्षों के लिए युद्ध की लागत बढ़ाना चाहता है और खाड़ी देशों पर दबाव डालना चाहता है कि वे अपने सहयोगी अमेरिका को युद्धविराम स्वीकार करने के लिए मजबूर करें. इसके जवाब में, यूएई ने ईरान के प्रति असामान्य रूप से कड़ा रुख़ अपनाया है और होर्मुज़ स्ट्रेट की सुरक्षा के लिए अमेरिकी नेतृत्व वाले प्रयासों में शामिल होने की धमकी दी है-जो उसके पारंपरिक संवाद और अच्छे पड़ोसी संबंधों वाली नीति से अलग है. क्षेत्रीय मीडिया के अनुसार, युद्ध के शुरुआती दो हफ़्तों में ईरान को इसराइल के बजाय खाड़ी देशों को निशाना बनाते हुए देखा गया. अल जज़ीरा ने बताया कि पहले 11 दिनों के आँकड़ों के अनुसार "इसराइल ईरान का पहला लक्ष्य नहीं है"-जहाँ इसराइल पर 433 हमले हुए, वहीं अरब देशों पर 3,100 हमले किए गए. पहले तीन सप्ताह के आँकड़े दिखाते हैं कि यूएई सबसे ज़्यादा निशाने पर रहा है. दुबई पब्लिक पॉलिसी रिसर्च सेंटर के प्रमुख मोहम्मद बहारून ने स्काई न्यूज़ अरबिया से कहा कि ईरान यूएई को 'सबसे आसान शिकार' और 'डोमिनो इफ़ेक्ट की पहली कड़ी' मानता है. डोमिनो इफ़ेक्ट का मतलब चेन रिएक्शन होता है, जहाँ कोई शुरुआती घटना दूसरी ऐसी कई घटनाओं को ट्रिगर करती है जिसकी वजह से कुल मिलाकर बड़ा नुक़सान होता है. मोहम्मद बहारून के मुताबिक, ईरानी नेतृत्व का मानना है कि अगर इस कड़ी का एक पत्थर भी हिला दिया जाए तो बाक़ी के पत्थर ख़ुद-ब-ख़ुद गिरने लगेंगे. इमेज स्रोत, AFP via Getty Images युद्ध की शुरुआत से अब तक ईरान ने यूएई के कई अहम ठिकानों पर हमला किया है, जिनमें हबशन गैस फ़ैसिलिटी, बाब ऑयल फ़ील्ड, अल-धफ़रा एयर बेस, फुजैरा पोर्ट, तेल भंडारण केंद्र और दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट शामिल हैं. इराक़ के कुर्दिस्तान क्षेत्र के शहर इरबिल में स्थित यूएई के वाणिज्य दूतावास पर भी ड्रोन हमले हुए. ईरान के ख़ातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता कर्नल इब्राहिम ज़ोलफ़कारी ने यूएई के नागरिकों से 'बंदरगाहों, डॉक और अमेरिकी ठिकानों से दूर रहने' की अपील की. ईरान का कहना है कि उसे यूएई में मौजूद अमेरिकी मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाकर आत्मरक्षा का 'वैध अधिकार' है. वहीं यूएई इन आरोपों से इनकार करता है कि उसकी ज़मीन का इस्तेमाल ईरान पर हमलों के लिए किया गया. यूएई, जो क्षेत्र का आर्थिक, डिजिटल और मीडिया हब रहा है, इस युद्ध से बुरी तरह प्रभावित हुआ है. मुख्य शेयर सूचकांक एडीएक्स जनरल में पिछले महीने में 11.42% की गिरावट आई. हवाई क्षेत्र बंद होने और उड़ानों के रद्द होने से पर्यटन और एविएशन सेक्टर को भारी नुक़सान हुआ पहले हफ़्ते में ही छह खाड़ी हवाई अड्डों को क़रीब 40 करोड़ डॉलर का नुक़सान हुआ, जिसमें यूएई का हिस्सा लगभग साढ़े नौ करोड़ डॉलर था. ऊर्जा क्षेत्र पर भी बड़ा असर पड़ा है. रॉयटर्स के अनुसार, होर्मुज़ स्ट्रेट के बंद होने से यूएई का रोज़ाना तेल उत्पादन आधे से भी कम हो गया है. यूएई सरकार और मीडिया ने देश की 'सुरक्षित जगह' वाली छवि बनाए रखने की कोशिश की. राष्ट्रपति मोहम्मद बिन ज़ायेद ने लोगों को भरोसा दिलाया कि 'सब कुछ नियंत्रण में है' और देश हर ख़तरे से निपटने के लिए तैयार है. साथ ही अटॉर्नी जनरल हमद सैफ़ अल-शम्सी ने हमलों की तस्वीरें और वीडियो साझा करने पर सख़्त चेतावनी दी. इस आदेश के तहत कई विदेशी नागरिकों को गिरफ़्तार किया गया, जिन पर कम से कम एक साल की सज़ा और भारी जुर्माने का प्रावधान है. यूएई और ईरान के बीच 2021 से रिश्तों में सुधार के संकेत दिख रहे थे, जिसे 2023 में चीन की मध्यस्थता से ईरान और सऊदी अरब के बीच हुए समझौते ने और मज़बूत किया. लेकिन मौजूदा युद्ध ने इन संबंधों को गंभीर नुक़सान पहुँचाया है और दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप बढ़ गए हैं. इस महीने की शुरुआत में यूएई ने ईरान में अपना दूतावास बंद कर दिया और अपने राजदूत और कर्मचारियों को वापस बुला लिया. रिपोर्ट्स यह भी संकेत देते हैं कि सऊदी अरब और यूएई धीरे-धीरे ईरान के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई में शामिल होने की ओर बढ़ रहे हैं. अगर ऐसा होता है तो यूएई और ईरान के बीच रिश्तों के सामान्य होने की बची-खुची संभावनाएँ भी ख़त्म हो जाएँगी. बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

स्रोत: BBC Hindi

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