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अमेरिका और ईरान के युद्धविराम पर इसराइल की पहली प्रतिक्रिया आई

✍️ Admin 📅 08 April, 2026 ⏰ 09:02 AM 👁 46 views

इमेज स्रोत, Ronen Zvulun / POOL / AFP via Getty Images इसराइल ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए युद्धविराम के फ़ैसले को मान लिया है. लेकिन उसके बयान में लेबनान का ज़िक्र नहीं है. इसराइल ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, "हम राष्ट्रपति ट्रंप के उस फ़ैसले का समर्थन करते हैं जिसमें ईरान पर हमले दो हफ़्तों के लिए रोकने की बात कही गई है, बशर्ते ईरान तुरंत होर्मुज़ स्ट्रेट खोले और अमेरिका, इसराइल और अन्य देशों पर हमले बंद करे." आगे कहा गया है, "इसराइल अमेरिका की उस कोशिश का समर्थन करता है जिसमें यह सुनिश्चित करना है कि ईरान अब परमाणु हथियार, मिसाइल या आतंक का ख़तरा न बने. न अमेरिका के लिए, न इसराइल के लिए, न ईरान के अरब पड़ोसियों के लिए और न ही दुनिया के लिए." "अमेरिका ने इसराइल को बताया है कि वह इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है. आने वाली बातचीत में इन लक्ष्यों को अमेरिका हमसे और हमारे क्षेत्रीय सहयोगियों से साझा करेगा." गौरतलब है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने एक्स पोस्ट में बताया था कि 'लेबनान में भी युद्धविराम' लागू होगा. हालांकि, इसराइल ने अपने बयान में लेबनान का कोई ज़िक्र नहीं किया. इमेज स्रोत, Ronen Zvulun / POOL / AFP via Getty Images अमेरिका और ईरान ने युद्धविराम का एलान कर दिया है, लेकिन अभी तक इसराइल ने कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है. भले डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम का फ़ैसला ले लिया हो, लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इसमें इसराइल की सहमति है या नहीं. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने एक्स पोस्ट में बताया कि 'लेबनान में भी युद्धविराम' लागू होगा. जबकि यहां पर इसराइल की सेना मौजूद है, जो कहती रही है कि लेबनान से तब तक नहीं हटेंगे जब तक हिज़्बुल्लाह का ख़तरा ख़त्म नहीं हो जाता. इसकी संभावना कम है कि इसराइली पीएम बिन्यामिन नेतन्याहू युद्धविराम को उसी तरह 'जीत' बताएंगे जैसे अमेरिका और ईरान बता रहे हैं. 28 फ़रवरी को युद्ध का एलान करते हुए उन्होंने कहा था, "इस अभियान का लक्ष्य ईरान के आयतुल्लाह शासन के ख़तरे को ख़त्म करना है और यह अभियान तब तक चलेगा जब तक ज़रूरी होगा." हालात अभी ऐसे हैं कि ईरानी सेना अब भी ख़तरा पैदा करने में सक्षम है और शासन पूरी तरह मौजूद है. यरूशलम में अब भी मिसाइल अलर्ट और धमाकों की आवाज़ें सुनाई दी हैं. इसराइल डिफ़ेंस फ़ोर्स ने कहा है कि ईरान से कई मिसाइलें दाग़ी गईं. अगर युद्ध का अंत उस '10-बिंदु प्रस्ताव' पर होता है जिसका ज़िक्र ट्रंप ने किया, तो यह ईरान की रणनीतिक जीत मानी जाएगी. संभव है कि नेतन्याहू की कैबिनेट के चरमपंथी सदस्य किसी भी युद्धविराम या युद्ध के अंत को मानने से इंकार कर दें. ख़ासकर, अगर इसमें लेबनान भी शामिल हो, जिससे चुनावी साल में उनके लिए राजनीतिक चुनौती पैदा हो सकती है. संबंधित कहानी: ट्रंप की डेडलाइन ख़त्म होने से पहले ही अमेरिका और ईरान युद्धविराम पर सहमत, दोनों ने पाकिस्तान को शुक्रिया कहा इमेज स्रोत, Sayed Hassan/Getty Images ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और फ़ील्ड मार्शल को युद्धविराम के प्रयासों के लिए धन्यवाद दिया है. अब्बास अराग़ची ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर बयान जारी किया. उन्होंने कहा, "ईरान की ओर से मैं अपने प्यारे भाइयों पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ और फ़ील्ड मार्शल मुनीर का युद्ध ख़त्म करने के प्रयासों के लिए धन्यवाद अदा करता हूं." "प्रधानमंत्री शरीफ़ ने भाईचारे की अपील की, अमेरिका ने 15 बिंदुओं वाला बातचीत का प्रस्ताव दिया और राष्ट्रपति (डोनाल्ड ट्रंप) ने ईरान के 10 बिंदुओं वाले प्रस्ताव को बातचीत के आधार के रूप में स्वीकार करने की घोषणा की." अब्बास अराग़ची ने एलान करते हुए लिखा, "इन सबको ध्यान में रखते हुए, मैं ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की ओर से यह घोषणा करता हूं कि-अगर ईरान पर हमले रोके जाते हैं, तो हमारी ताक़तवर सेना अपनी रक्षात्मक कार्रवाई बंद कर देगी. दो हफ़्तों की अवधि के लिए होर्मुज़ स्ट्रेट से सुरक्षित आवाजाही ईरानी सेना के साथ तालमेल और तकनीकी सीमाओं को ध्यान में रखते हुए संभव होगी." इससे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने भी युद्धविराम होने पर अमेरिका और ईरान का शुक्रिया अदा किया था. उन्होंने यह भी बताया कि दोनों देशों के प्रतिनिधियों को 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में आमंत्रित किया गया है. इमेज स्रोत, Harun Ozalp/Anadolu via Getty Images अमेरिका और ईरान ने युद्धविराम का एलान कर दिया है. उन्होंने बताया है कि इसके लिए पाकिस्तान की ओर से मध्यस्थता हुई थी. अब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने युद्धविराम होने पर अमेरिका और ईरान का शुक्रिया अदा किया है. शहबाज़ शरीफ़ ने यह भी बताया है कि 10 अप्रैल को ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधि इस्लामाबाद आमंत्रित किए गए हैं, यहां अंतिम समझौते पर बातचीत होगी. डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी थी कि अगर ईरान अमेरिका की शर्तें नहीं मानता है तो उस पर विनाशकारी हमले होंगे और उसे तबाह कर दिया जाएगा. उन्होंने ईरान को वॉशिंगटन के समयानुसार मंगलवार रात 8 बजे (भारतीय समयानुसार बुधवार सुबह 5.30 बजे) तक की डेडलाइन दी थी. इस डेडलाइन के ख़त्म होने से ठीक 10 मिनट पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने एक्स पर लिखा, "मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि ईरान और अमेरिका, अपने सहयोगियों के साथ तुरंत प्रभाव से लेबनान समेत हर जगह युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं." "मैं इस समझदारी भरे कदम का गर्मजोशी से स्वागत करता हूं और दोनों देशों के नेतृत्व को दिल से धन्यवाद देता हूं. साथ ही मैं उनके प्रतिनिधियों को इस्लामाबाद में शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026 को आमंत्रित करता हूं ताकि सभी विवादों को खत्म करने के लिए अंतिम समझौते पर आगे बातचीत हो सके." उन्होंने लिखा, "दोनों पक्षों ने अद्भुत समझदारी और दूरदर्शिता दिखाई है, शांति और स्थिरता को आगे बढ़ाने में सकारात्मक रूप से जुड़े रहे हैं. हम सच्चे दिल से उम्मीद करते हैं कि इस्लामाबाद वार्ता स्थायी शांति हासिल करने में सफल होगी और आने वाले दिनों में और अच्छी खबरें साझा करने की इच्छा रखते हैं." बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के लाइव पेज पर आपका स्वागत है. मैं बीबीसी संवाददाता रौनक भैड़ा अब से दोपहर दो बजे तक आप तक अहम ख़बरें पहुंचाऊंगा. कल के लाइव पेज की ख़बरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. हमारे पेज पर मौजूद कुछ अहम ख़बरों को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें. - ट्रंप की डेडलाइन ख़त्म होने से पहले ही अमेरिका और ईरान युद्धविराम पर हुए सहमत - 'आज एक सभ्यता की मौत होगी… 47 साल पुराने राज का अंत', ट्रंप की ईरान को कड़ी चेतावनी - बांग्लादेश के विदेश मंत्री का भारत दौरा: क्या मोहम्मद यूनुस के दौर में जमी बर्फ़ पिघलेगी?

स्रोत: BBC Hindi

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