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Death

अभिषेक शर्मा ने ब्रॉडकास्टर से की ये गुज़ारिश, 'अगली बार से मैं चाहता हूँ...'

✍️ Admin 📅 22 April, 2026 ⏰ 08:56 AM 👁 120 views

अभिषेक शर्मा ने मंगलवार को इंडियन प्रीमियर लीग में ऐसा कुछ किया जो उन्होंने पहले कभी नहीं किया था. सनराइजर्स हैदराबाद का यह धाकड़ बल्लेबाज़ आईपीएल मु़क़ाबले में पारी की शुरुआत में उतरा और अंत तक डटा रहा. अभिषेक ने पूरे 20 ओवर बल्लेबाज़ी और नाबाद पैवेलियन लौटे. अभिषेक (135 रन नाबाद), हेनरी क्लासेन (37 नाबाद) और ट्रेविस हेड (37) की पारियों की बदौलत हैदराबाद ने 20 ओवरों में 2 विकेट पर 242 रन का बड़ा स्कोर खड़ा किया, जवाब में दिल्ली कैपिटल्स की टीम 9 विकेट पर 195 रन ही बना सकी. इस तरह हैदराबाद ने दिल्ली कैपिटल्स पर 47 रन की जीत दर्ज कर ली. अभिषेक शर्मा की पारी में 10 छ्क्के शामिल थे. यह अभिषेक का नौवां टी-20 शतक था और इसके साथ ही उन्होंने सबसे अधिक शतक टी-20 शतक बनाने वाले भारतीय बल्लेबाज़ों में विराट कोहली की बराबरी कर ली. ट्रेविस हेड और अभिषेक की सलामी जोड़ी के लिए ये लगातार दूसरा मैच था, जब उन्होंने अपनी छवि के मुताबिक बहुत आक्रामक शुरुआत नहीं की. चेन्नई सुपर किंग्स के ख़िलाफ़ उन्होंने तीन ओवरों में 23 रन जोड़े थे तो दिल्ली कैपिटल्स के ख़िलाफ इस जोड़ी ने तीन ओवरों में 26 रन बनाए. चौथे ओवर की शुरुआत में अभिषेक 7 गेंदों पर 12 रन बनाकर खेल रहे थे. इसके बाद अभिषेक ने ऐसा गियर बदला कि दिल्ली कैपिटल्स के किसी भी गेंदबाज़ के लिए उन्हें रोकना नामुमकिन सा हो गया. अभिषेक ने 68 गेंदों पर 10 चौकों और 10 छ्क्कों की मदद से 135 रन की पारी खेली. यानी उनका स्ट्राइक रेट तकरीबन 200 का रहा. प्लेयर ऑफ़ द मैच चुने गए अभिषेक ने मैच के बाद जो कहा, उसकी सोशल मीडिया पर खूब चर्चा रही. मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ. अभिषेक ने मैच के दौरान अपने पिता की लगातार मौजूदगी के बारे में खुलकर बात की और बताया कि इसका उनके खेल पर क्या असर पड़ता है. एक मज़ेदार और भावुक टिप्पणी में उन्होंने कहा कि उनके पिता हमेशा उन्हें ध्यान से देखते रहते हैं और स्टैंड्स से भी उन्हें गाइड करने की कोशिश करते हैं. मैच के बाद अभिषेक ने कहा, "ईमानदारी से कहूँ तो मुझे नहीं पता कैसे, लेकिन अंडर-12 के ज़माने से ही मेरे पिता हमेशा स्क्रीन के बगल में बैठते हैं. यहाँ हैदराबाद में भी, वह हमेशा वहीं बैठे रहते हैं. जब भी मैं नॉन स्ट्राइकर एंड पर होता हूँ, वो मुझे बताते (इशारों में) बताते हैं कि कैसे खेलना है." इसके साथ ही अभिषेक ने आईपीएल ब्रॉडकास्टर से मज़ाक में एक गुज़ारिश भी कर डाली और कहा कि मैच के दौरान वो उनके पिता को कैमरे पर दिखाएं. अभिषेक ने कहा, "मैं चाहता हूं अगली बार कैमरा उनकी तरफ़ जाए और उनके रिएक्शन दिखाता रहे. ये वाक़ई में बहुत मज़ेदार होगा. " अभिषेक के इस कमेंट पर दर्शक दीर्घा में मौजूद उनके पिता मुस्कुराते हुए दिखे. अभिषेक ने ये भी बताया कि 47 गेंदों पर शतक पूरा करने के बाद उनका 'एल' शेप बनाकर जश्न मनाने का क्या मतलब था. अभिषेक ने कहा, "मैं काफी वक़्त से 'एल' बनाकर जश्न मनाता हूँ. यह प्रशंसकों और स्टेडियम के लिए मेरा प्यार है. वे पूरे टूर्नामेंट के दौरान हमारा सपोर्ट करते हैं. मैं उन्हें अपनी तरफ से प्यार दर्शाने की कोशिश करता हूँ." आईपीएल के मुक़ाबलों में आमतौर पर टीमों की रणनीति पावरप्ले का अधिकतम फ़ायदा उठाने की रही है, लेकिन एसआरएच की ट्रेविस हेड और अभिषेक की सलामी जोड़ी ने पिछले दो मुक़ाबलों में पावरप्ले में ख़ास हड़बड़ी नहीं दिखाई है, क्या यह रणनीति में बदलाव है. अभिषेक ने कहा, "मैंने कोच फ्रेंकी (जेम्स फ्रेंकलिन) से इस पर बात की थी, वह बस इतना चाहते थे कि मैं पूरे 20 ओवर डटा रहूँ. यहाँ तक कि मुरलीधरन ने भी ठीक ऐसा ही कहा. शायद ये पहली बार है कि मैंने पूरे 20 ओवर खेले." अभिषेक ने ये लम्हा अपने परिवारवालों के लिए भी समर्पित किया, ख़ासकर अपनी बहन के लिए जो बीमार होने के कारण मैच देखने नहीं आ पाई थी. अभिषेक ने कहा, "अपने माता-पिता और दोस्तों के सामने खेलना हमेशा स्पेशल होता है. मेरी बहन स्टेडियम में मौजूद नहीं थी, क्योंकि उन्हें इन्फेक्शन था. इसलिए ये तुम्हारे (बहन) लिए है." राज कुमार शर्मा, अभिषेक शर्मा के पिता तो हैं ही, उनके कोच भी हैं, संघर्ष के साथी रहे हैं और अब अपने बेटे की कामयाबी के गवाह बन रहे हैं. कामयाबी की इस कहानी की शुरुआत कई साल पहले पंजाब के अमृतसर में हुई थी, जब तीन-चार साल की उम्र में अभिषेक ने अपने पिता का भारी बल्ला उठाने की कोशिश की. राज कुमार शर्मा ने बीबीसी हिन्दी से कहा था, ''मैं खुद क्रिकेट खेला करता था, तो घर पर मेरा सामान, क्रिकेट किट इधर-उधर पड़ी रहती थी. अभिषेक की उम्र क़रीब तीन-चार साल रही होगी, जब वो मेरा सामान, बैट उठाने की कोशिश करता था. भारी होने की वजह से उससे बल्ला उठता नहीं था. फिर मैंने उसे प्लास्टिक का बैट लाकर दिया.'' उन्होंने कहा था, ''उस बैट के साथ वो ख़ूब शॉट मारा करता था. उसकी आवाज़ भी ठीक से नहीं निकलती थी, लेकिन बोलता था कि पापा, बॉल फेंको. अपनी बहनों से बोलता था कि बॉल फेंको, रात में मेरी वाइफ़ को बोलता था कि बॉलिंग कराओ. ऐसे ही बल्लेबाज़ी करते-करते उसका जुनून यहां तक पहुंच गया.'' अभिषेक शर्मा के पिता बैंक में नौकरी किया करते थे, और क्रिकेट भी खेला करते थे. उनके परिवार में मां के अलावा, दो बड़ी बहनें हैं. एक बहन टीचर हैं, दूसरी डॉक्टर. अभिषेक के पिता ने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया था, ''मैं जब ग्राउंड पर जाता था, तो वो मेरे साथ ही जाता था. मैं बड़े बच्चों को ट्रेनिंग देता था, कोचिंग देता था. बड़े बच्चे अभिषेक को देखते थे, तो बोलते थे कि आपके बेटे में बहुत टैलेंट है." बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

स्रोत: BBC Hindi

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