ईरान के विदेश मंत्री इस्लामाबाद पहुँचे, लेकिन अमेरिका के साथ बातचीत पर संशय बरकरार
अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा युद्धविराम के बीच बातचीत की कोशिश एक बार फिर तेज हो गई है. बातचीत के लिए अमेरिका के प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ़ और जेरेड कुशनर पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद रवाना होने वाले हैं. दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची एक प्रतिनिधिमंडल के साथ इस्लामाबाद पहुंचे हैं. हालांकि ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अराग़ची के अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से मिलने की उम्मीद नहीं है. ईरानी विदेश मंत्रालय का कहना है कि इस दौरे का मक़सद द्विपक्षीय मामलों पर चर्चा करना है. इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच पहले दौर की बातचीत नाकाम रही थी. अमेरिका की ओर से इस बातचीत का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे थे. पाकिस्तान की मध्यस्थता में 11 और 12 अप्रैल को इस्लामाबाद में पहले दौर की बातचीत हुई थी. लेकिन ये नाकाम रही थी. ईरान और अमेरिका-इसराइल के बीच पांच हफ़्ते तक चली जंग के दौरान दो हफ़्ते का युद्धविराम हुआ था जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बढ़ा दिया था. व्हाइट हाउस के मुताबिक़ ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति के दामाद जेरेड कुश्नर शनिवार की सुबह ईरान के साथ शांति वार्ता के लिए पाकिस्तान जा रहे हैं. व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेट्री केरोलाइन लेविट ने कहा, "ईरान बातचीत करना चाहता है." उन्होंने ये भी कहा कि अगर बातचीत सफल हुई तो अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस जरूरत पड़ने पर बातचीत सफल होने की स्थिति में यात्रा के लिए तैयार हैं. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने कहा कि वह और विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची शनिवार सुबह जल्दी इस्लामाबाद पहुंच गए हैं. अराग़ची "पाकिस्तान के उच्च-स्तरीय अधिकारियों" से मुलाकात करेंगे. उन्होंने यह भी कहा, "ईरान और अमेरिका के बीच किसी बैठक की कोई योजना नहीं है, ईरान अपने विचार पाकिस्तान के माध्यम से पहुंचाएगा." इमेज स्रोत, Alex Wong/Getty Images मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ. इस्माइल बक़ाई के बयान से पहले, अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि ईरान के पास एक "अच्छा समझौता" करने का मौका है. उन्होंने जोर देकर कहा कि "उन्हें बस इतना करना है कि वे परमाणु हथियार छोड़ दें. और वह भी ठोस और प्रामाणिक तरीके से.'' शुक्रवार की प्रेस ब्रीफ़िंग में हेगसेथ ने यह भी चेतावनी दी कि होर्मुज़ स्ट्रेट में अमेरिका की 'नाकाबंदी' "बढ़ती जा रही है और वैश्विक रूप ले रही है" अमेरिका और इज़राइल ने 28 फ़रवरी को ईरान पर हमले शुरू किए थे, जिसके बाद ईरान होर्मुज़ स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर पाबंदियां लगा दीं. होर्मुज़ स्ट्रेट ग्लोबल मार्केट में तेल और एलएनजी सप्लाई का अहम समुद्री रास्ता है. यहां से होकर अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में आने वाले 20 फ़ीसदी तेल और एलएनजी की ढुलाई होती है. दोनों पक्षों की इस कार्रवाई से दुनिया भर में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं. शुक्रवार को पत्रकारों से बात करते हुए केरोलाइन लेविट ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने स्टीव विटकॉफ़ और जेरेड कुश्नर को इस्लामाबाद भेजने का फ़ैसला किया है ताकि वे "ईरान की बात सुन सकें." उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति "हमेशा कूटनीति को मौका देने के लिए तैयार रहते हैं." लेविट ने यह भी कहा कि "पिछले कुछ दिनों में हमने ईरान की ओर से कुछ प्रगति जरूर देखी है." उधर, इस्लामाबाद स्थित ईरानी दूतावास ने कहा कि अब्बास अराग़ची पाकिस्तान के साथ "द्विपक्षीय मुद्दों की समीक्षा" करेंगे और क्षेत्रीय हालात पर चर्चा करेंगे. इस हफ़्ते डोनाल्ड ट्रंप और पीट हेगसेथ ने जोर देकर कहा है कि अमेरिका पर ईरान के साथ युद्ध खत्म करने का कोई दबाव नहीं है. इमेज स्रोत, Ian Forsyth/Getty Images इस बार ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ बातचीत को लेकर स्पष्ट रूप से सतर्क रुख़ अपना रहा है. पिछली बार के विपरीत इस बार उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस को नहीं भेजा जा रहा है, और जैसा कि व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव ने कहा, लक्ष्य केवल "ईरानियों का पक्ष सुनना" है. ट्रंप की ओर से युद्धविराम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ाने के फैसले के बाद यह फ़ैसला किया गया है ताकि ईरान एक 'सर्वसम्मत प्रस्ताव' कर सके. ट्रंप की ओर से युद्धविराम को अनिश्चित काल तक बढ़ाने के बाद होर्मुज़ स्ट्रेट में तनाव और बढ़ गया. दोनों पक्षों ने एक-दूसरे की कार्रवाई को युद्धविराम का उल्लंघन माना. हालांकि, होर्मुज़ स्ट्रेट ही एकमात्र विवाद नहीं है. अमेरिका और ईरान के बीच ईरान की परमाणु क्षमताओं और क्षेत्र में ईरान समर्थक ताक़तों को लेकर अभी भी मतभेद बने हुए हैं. व्हाइट हाउस का कहना है कि अगर कोई प्रगति होती है तो उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस इस्लामाबाद जाने के लिए तैयार रहेंगे. लेकिन फिलहाल इस बात का कोई ब्योरा नहीं है कि ईरान क्या पेशकश कर सकता है. बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित (बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हॉट्सऐप पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)
स्रोत: BBC Hindi