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Death

LoC के पास बसे गांव केरन में सरकारी अधिकारी का निधन, अंतिम संस्कार के लिए सीमा पार से भी जुटे परिवार के लोग

✍️ Admin 📅 27 April, 2026 ⏰ 11:26 PM 👁 33 views

साल 1947 के बंटवारे के बाद दुनिया के नक्शे पर भारत और पाकिस्तान दो अलग देशों के रूप में तो नजर बनाए, लेकिन राजनीति ने सीमा रेखाओं और कश्मीर घाटी में नियंत्रण रेखा (LoC) के दोनों ओर परिवारों के बंटवारे की एक मानवीय समस्या खड़ी कर दी. इस मानवीय बंटवारे का एक उदाहरण उत्तरी कश्मीर में नियंत्रण रेखा (LoC) के पास बसे एक दूरदराज के गांव केरन में सामने आया, जहां एक सेवारत सरकारी अधिकारी का अंतिम संस्कार दशकों पुराने उस बंटवारे की एक मार्मिक याद बन गई, जिसे मौत भी नहीं मिटा सकी.

दुख और जुदाई के इस माहौल में, केरन (भारत) और नीलम (POK) दोनों इलाकों के लोग किशनगंगा नदी के किनारे बसे एक दूरदराज के गांव में इकट्ठा हुए, ताकि उस व्यक्ति की अंतिम प्रार्थना में शामिल हो सकें, जिसका परिवार इसी नदी के कारण दो हिस्सों में बंट गया था.

गांदरबल जिले में नायब तहसीलदार के पद पर तैनात था मृतक

जम्मू-कश्मीर के गांदरबल जिले में नायब तहसीलदार के पद पर तैनात राजा लियाकत अली खान का शनिवार (23 अप्रैल, 2026) को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. वे पिछले कई दिनों से शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में अपना इलाज करवा रहे थे. उनकी मौत से उनके पैतृक गांव में शोक की लहर दौड़ गई, लेकिन इसके बाद जो हुआ उसने एक और भी गहरी त्रासदी को उजागर कर दिया.

जैसे ही अंतिम यात्रा किशनगंगा नदी के किनारे-किनारे गांव से होकर गुजरी, खान के रिश्तेदार LoC के दूसरी तरफ असहाय खड़े रहे. वे भारी सुरक्षा वाली नियंत्रण रेखा (LoC) के कारण उनसे अलग हो गए थे. वहीं, LoC के दूसरी तरफ 'नीलम' के नाम से जानी जाने वाली यह नदी न सिर्फ एक भौगोलिक सीमा थी, बल्कि यह एक गहरी भावनात्मक खाई का भी प्रतीक थी.

स्रोत: ABP Hindi

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