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कर्नाटक हिजाब विवाद: कांग्रेस ने स्कूलों में धार्मिक प्रतीकों का किया बचाव, बोली- भगवा शॉल कोई धार्मिक प्रथा नहीं

✍️ Admin 📅 15 May, 2026 ⏰ 03:57 PM 👁 32 views

कर्नाटक में हिजाब विवाद एक बार फिर राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है. मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के उस बयान के बाद सियासी माहौल गरमा गया, जिसमें उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों में पगड़ी, कड़ा, तिलक, भस्म, कलावा और हेडस्कार्फ जैसे धार्मिक प्रतीकों को पहनने के अधिकार का समर्थन किया लेकिन भगवा शॉल को इससे अलग बताया.

कर्नाटक सरकार का पक्ष स्पष्ट करते हुए राज्य सरकार के मंत्री प्रियंक खरगे ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने किसी भी ड्रेस कोड को खत्म नहीं किया है. उन्होंने कहा कि सरकार केवल संविधान द्वारा दिए गए धार्मिक अधिकारों को समान जगह देने की बात कर रही है.

प्रियंक खरगे ने कहा, 'हमने ड्रेस कोड वापस नहीं लिया. हमने सिर्फ इतना कहा है कि संविधान जिन धार्मिक प्रथाओं की अनुमति देता है, उन्हें समाज में समान स्थान मिलना चाहिए. चाहे वह पगड़ी हो, कड़ा, तिलक, भस्म, कलावा, या हेडस्कार्फ, इसमें भ्रम की कोई बात नहीं है.'

उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर पार्टी को इस पर आपत्ति है तो वह अदालत जा सकती है. भगवा शॉल और हिजाब के मुद्दे को अलग बताते हुए प्रियंक खरगे ने कहा, 'भगवा शॉल कोई धार्मिक प्रथा नहीं है. भाजपा को युवाओं की शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए. कांग्रेस और कर्नाटक सरकार बच्चों का भविष्य शिक्षा के जरिए बनाना चाहती है. अगर बीजेपी बच्चों को गौ-रक्षक और धर्म-रक्षक बनाना चाहती है, तो वह अपने बच्चों के साथ ऐसा करे.'

स्रोत: ABP Hindi

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