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Meta-LinkedIn Layoffs: AI की आंधी में नौकरियां साफ! Meta-LinkedIn की छंटनी से भारतीयों पर पड़ेगा सीधा असर?

✍️ Admin 📅 20 May, 2026 ⏰ 11:46 AM 👁 36 views

अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियों में एक बार फिर छंटनी का दौर तेज हो गया है. Meta और LinkedIn ने हजारों कर्मचारियों की कटौती और बड़े स्तर पर रीस्ट्रचरिंग की घोषणा की है. वजह है—आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर बढ़ता दांव. Meta जहां अपने करीब 10 प्रतिशत कर्मचारियों को हटाकर AI-केंद्रित टीमों में निवेश बढ़ा रही है, वहीं LinkedIn ने भी 600 से ज्यादा नौकरियां खत्म करने का फैसला किया है. यह सिर्फ अमेरिका की कहानी नहीं है. इसका असर भारत के लाखों आईटी प्रोफेशनल्स, इंजीनियरों, आउटसोर्सिंग कंपनियों और स्टार्टअप इकोसिस्टम पर भी पड़ सकता है. भारतीयों पर कैसे पड़ेगा असर?भारत दुनिया का सबसे बड़ा आईटी टैलेंट हब माना जाता है. बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और गुरुग्राम जैसे शहरों में हजारों इंजीनियर अमेरिकी टेक कंपनियों के लिए काम करते हैं. Meta, Microsoft और LinkedIn जैसी कंपनियों के भारत में बड़े ऑपरेशन और डेवलपमेंट सेंटर मौजूद हैं. ऐसे में अमेरिका में होने वाली छंटनी का पहला असर भारतीय कर्मचारियों की भर्ती पर दिख सकता है. कंपनियां नई हायरिंग धीमी कर सकती हैं, कॉन्ट्रैक्ट रोल्स कम कर सकती हैं और आउटसोर्सिंग प्रोजेक्ट्स पर खर्च घटा सकती हैं. ये भी पढें- स्टारबक्स में छंटनी, वाइस प्रेसिडेंट से लेकर मैनेजर तक की गई नौकरी, सैकड़ों कर्मचारियों की छुट्टी AI स्किल नहीं तो नौकरी खतरे में?यह बदलाव सिर्फ छंटनी तक सीमित नहीं है. टेक इंडस्ट्री अब तेजी से पारंपरिक कोडिंग और सपोर्ट रोल्स से हटकर AI-आधारित नौकरियों की ओर बढ़ रही है. Meta करीब 7,000 कर्मचारियों को AI-केंद्रित भूमिकाओं में शिफ्ट कर रही है. इसका मतलब साफ है—अब कंपनियां ऐसे इंजीनियर चाहती हैं जिन्हें मशीन लर्निंग, जनरेटिव AI, डेटा मॉडलिंग और ऑटोमेशन की समझ हो. भारतीय आईटी सेक्टर में बड़ी संख्या में कर्मचारी अभी भी पारंपरिक सॉफ्टवेयर सपोर्ट, टेस्टिंग और बैकएंड ऑपरेशंस में काम करते हैं. AI ऑटोमेशन बढ़ने के साथ ये भूमिकाएं सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकती हैं. भारतीय स्टार्टअप्स के लिए भी चेतावनी अमेरिकी टेक कंपनियों की रणनीति का असर भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम पर भी दिख सकता है. पिछले दो वर्षों में भारत के कई स्टार्टअप्स ने Meta और Microsoft जैसे दिग्गजों से निवेश, विज्ञापन और टेक्नोलॉजी सपोर्ट हासिल किया है. अगर बड़ी कंपनियां खर्च घटाती हैं और फोकस AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर शिफ्ट करती हैं, तो डिजिटल विज्ञापन, मार्केटिंग और क्लाउड सर्विसेज महंगी हो सकती हैं. इससे छोटे भारतीय स्टार्टअप्स की लागत बढ़ेगी. H-1B वीजा और भारतीय पेशेवरों की चिंता अमेरिका में काम कर रहे हजारों भारतीय पेशेवर H-1B वीजा पर निर्भर हैं. छंटनी की स्थिति में उनके सामने सबसे बड़ा संकट वीजा स्टेटस बचाने का होता है. नौकरी जाने के बाद सीमित समय में नई नौकरी न मिलने पर उन्हें अमेरिका छोड़ना पड़ सकता है. विशेषज्ञ मानते हैं कि AI आधारित पुनर्गठन के कारण आने वाले वर्षों में विदेशी कर्मचारियों के लिए प्रतिस्पर्धा और कठिन हो सकती है. दिलचस्प बात यह है कि ये छंटनियां उस समय हो रही हैं जब कंपनियों की कमाई पूरी तरह कमजोर नहीं है. LinkedIn ने हाल ही में 12 प्रतिशत सालाना रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की थी. इसके बावजूद कंपनी नौकरियां घटा रही है. इससे साफ संकेत मिलता है कि टेक इंडस्ट्री अब “ग्रोथ एट ऑल कॉस्ट” मॉडल से हटकर “AI-ड्रिवन एफिशिएंसी” मॉडल की ओर बढ़ रही है. यानी कम लोग, ज्यादा ऑटोमेशन और अधिक AI. भारत दुनिया का बैकऑफिस रहा है, लेकिन AI के दौर में सवाल यह है कि क्या भारतीय वर्कफोर्स खुद को उतनी तेजी से अपस्किल कर पाएगी जितनी तेजी से टेक कंपनियां बदल रही हैं? अगर भारतीय इंजीनियर और आईटी संस्थान समय रहते AI स्किल्स, रिसर्च और डीप टेक पर फोकस नहीं बढ़ाते, तो आने वाले वर्षों में वैश्विक टेक इंडस्ट्री में भारत की बढ़त को चुनौती मिल सकती है. मयंक प्रताप सिंह एक वरिष्ठ पत्रकार और डिजिटल न्यूज़ प्रोफेशनल हैं, जिनके पास इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में 18 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उन्होंने देश के प्रमुख मीडिया संगठनों के साथ काम करते हुए ब्रेकिंग न्यूज़, पॉलिटिकल कवरेज, ग्राउंड रिपोर्टिंग और डिजिटल कंटेंट स्ट्रेटेजी के क्षेत्र में मजबूत पहचान बनाई है. अपने करियर की शुरुआत से ही मयंक ने न्यूज़रूम की बदलती जरूरतों के अनुरूप टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म दोनों पर कंटेंट डेवलपमेंट और न्यूज़ मैनेजमेंट में विशेषज्ञता हासिल की. उन्होंने इंडिया टुडे ग्रुप में लंबे समय तक कार्य करते हुए राष्ट्रीय स्तर की प्रमुख खबरों, विशेष श्रृंखलाओं और डिजिटल न्यूज़ पैकेजिंग पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इसके बाद उन्होंने GNT (Good News Today) में इनपुट लीड के रूप में कार्य करते हुए न्यूज़रूम ऑपरेशन, स्टोरी प्लानिंग, रिपोर्टर कोऑर्डिनेशन और कंटेंट क्वालिटी कंट्रोल की जिम्मेदारियाँ संभालीं. ज़ी न्यूज़ में रहते हुए उन्होंने मल्टी-प्लेटफॉर्म न्यूज़ प्रोडक्शन, डिजिटल एंगल स्टोरीज़ और स्पेशल प्रोजेक्ट्स पर काम किया. IBN7 (वर्तमान News18 India) में इनपुट टीम का हिस्सा रहते हुए मयंक ने पॉलिटिकल, सोशल और नेशनल इश्यूज़ पर कई महत्वपूर्ण कवरेज को लीड किया. वर्तमान में मयंक सिंह ABP News में न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं, जहाँ वे डिजिटल न्यूज़ वेबसाइट के लिए कंटेंट स्ट्रेटेजी, ब्रेकिंग न्यूज़ मैनेजमेंट, एक्सप्लेनेर और इन-डेप्थ वेब कॉपीज़ पर विशेष ध्यान देते हैं. वे SEO-फ्रेंडली न्यूज़ लेखन, डेटा-ड्रिवन स्टोरीज़, ग्राउंड-आधारित रिपोर्टिंग और रियल-टाइम डिजिटल पब्लिशिंग में दक्ष हैं. मयंक की पत्रकारिता का फोकस राजनीति, चुनाव, सामाजिक मुद्दे, पब्लिक पॉलिसी और ग्राउंड रियलिटी आधारित रिपोर्टिंग रहा है. वे न्यूज़रूम में स्पीड, एक्युरेसी और एनालिटिकल अप्रोच के लिए जाने जाते हैं. उनका उद्देश्य डिजिटल युग में पाठकों को विश्वसनीय, तथ्यपरक और प्रभावशाली पत्रकारिता उपलब्ध कराना है.

स्रोत: ABP Hindi

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