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Explained: भीषण गर्मी में एसी, कूलर और पंखे का सहारा! सरकार के पास कितने दिन का कोयला बाकी, भारत में कैसे पूरी हो रही बिजली की मांग?

✍️ Admin 📅 25 May, 2026 ⏰ 06:54 PM 👁 28 views

देश का एक बड़ा हिस्सा इस वक्त भट्ठी की तरह तप रहा है. पारा 48 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है. करोड़ों लोग गर्मी से राहत पाने के लिए कूलर, पंखे और एसी के सहारे हैं. इस भीषण गर्मी ने देश की बिजली व्यवस्था की कड़ी परीक्षा ले ली है. मई 2026 में लगातार चार दिनों तक बिजली की मांग ने रिकॉर्ड तोड़े और आखिरकार 21 मई को यह 2,70,820 मेगावाट (270.82 गीगावाट) के रिकॉर्डतोड़ लेवल पर जा पहुंची. लेकिन इस रिकॉर्ड मांग के बावजूद, ग्रिड स्थिर बना रहा और देश बड़े पैमाने पर ब्लैकआउट से बचने में कामयाब रहा. आइए जानते हैं कि करीब 145 करोड़ लोगों की बिजली की जरूरत कैसे पूरी हो रही है...

बिजली की मांग ने कैसे-कैसे रिकॉर्ड तोड़े?

इस गर्मी के मौसम ने बिजली की मांग को एक के बाद एक नए रिकॉर्ड बनाते देखा है. यह सिलसिला अप्रैल में ही शुरू हो गया था, जब 25 अप्रैल 2026 को दोपहर 3:38 बजे देश की बिजली की मांग ने 2,56,100 मेगावाट (256.1 गीगावाट) के ऑल टाइम हाई लेवल को छुआ, जिसे कामयाबी से पूरा भी कर लिया गया. इसने मई 2024 में बने 250 गीगावाट के पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया. लेकिन यह तो सिर्फ शुरुआत थी. मई के तीसरे हफ्ते में मांग ने और तेजी पकड़ी और लगातार चार दिनों तक नए रिकॉर्ड बनते चले गए:

18 मई: 260.45 गीगावाट
19 मई: 263 गीगावाट
20 मई: 265.44 गीगावाट
21 मई: 270.82 गीगावाट (दोपहर 3:45 बजे)
यह आंकड़ा अप्रैल 2026 में दर्ज 256 गीगावाट के पिछले ऑल टाइम हाई लेवल को भी पार कर गया. इस उछाल के पीछे मुख्य वजह देश के कई हिस्सों में लगातार पड़ रही भीषण गर्मी है, जिसके कारण एयर कंडीशनर, कूलर और पंखों का इस्तेमाल जबरदस्त रूप से बढ़ गया है। अकेले दिल्ली में ही 21 मई को दोपहर 3:31 बजे बिजली की मांग 8,231 मेगावाट तक पहुंच गई, जो मई महीने के अपने ऑल टाइम हाई रिकॉर्ड 8,302 मेगावाट के बेहद करीब था.

रिकॉर्ड मांग को पूरा करने का 'थ्री-प्रॉन्ग्ड' मंत्र

इस ऐतिहासिक चुनौती से निपटने के लिए सरकार ने एक रणनीति अपनाई. इस रणनीति के तीन बड़े स्तंभ रहे:

1. थर्मल पावर: रीढ़ की हड्डी

देश की बिजली आपूर्ति में कोयला आधारित थर्मल पावर ने हमेशा की तरह सबसे अहम भूमिका निभाई. कहीं कोई कमी न रहे, इसलिए सरकार ने सभी थर्मल पावर प्लांट्स को पूरी गर्मी के मौसम में बिना किसी रखरखाव बंदी (मेंटेनेंस शटडाउन) के पूरी क्षमता से चलाने का सख्त निर्देश दिया. नतीजतन, 21 मई को सबसे ज्यादा मांग के समय, थर्मल पावर ने कुल बिजली उत्पादन का लगभग 62.8% हिस्सा अकेले पूरा किया. 18 मई को भी यह आंकड़ा 61.5% था. कुल मिलाकर, सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, थर्मल प्लांट्स लगातार 60% से ज्यादा मांग को पूरा कर रहे हैं.

2. रिन्यूएबल एनर्जी: दिन के समय की ढाल

थर्मल पावर के अलावा, रिन्यूएबल एनर्जी सोर्स, खासकर सोलर एनर्जी ने दिन के समय ग्रिड पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में अहम भूमिका निभाई. 21 मई को हाई डिमांड के दौरान, कुल उत्पादन में सौर ऊर्जा का योगदान 22% रहा. 19 मई को दोपहर 3:40 बजे जब मांग 260.45 गीगावाट के पार थी, अकेले सौर ऊर्जा से 57 गीगावाट का उत्पादन हो रहा था. सरकार ने यह भी तय किया कि दिन के समय जलविद्युत उत्पादन को संरक्षित किया जाए, ताकि शाम को जब सौर उत्पादन गिरता है, तब इसका इस्तेमाल किया जा सके.

3. सटीक ग्रिड मैनेजमेंट: रीयल-टाइम तालमेल

बिजली की आपूर्ति और मांग के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और राज्य लोड डिस्पैच सेंटरों (NLDC, RLDCs, SLDCs) और बिजली उत्पादन स्टेशनों के बीच 'रीयल-टाइम' समन्वय किया गया. इसके अलावा, एडवांस्ड रिसोर्स प्लानिंग और बेहतर शेड्यूलिंग ने बिजली आपूर्ति में कोई कमी नहीं होने दी.

ईंधन की चिंता और सरकार का आश्वासन

इस रिकॉर्ड मांग के बीच ईंधन आपूर्ति को लेकर चिंताएं भी सामने आई हैं. 3 मई को जारी रिपोर्ट में सरकार ने माना था कि थर्मल प्लांट्स में कोयले का मोजूदा भंडार 19 दिनों की जरूरत के बराबर है, जो सामान्य 30 दिनों के मानक से कम है. अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के कारण गैस की आपूर्ति को लेकर भी चिंताएं बनी हुई हैं. हालांकि, सरकार ने ताजा बयान में कहा है कि उसके पास 400 साल का कोयला मौजूद है.

इन चिंताओं के बीच केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने जनता को भरोसा दिलाया है कि हालात कंट्रोल में है. एक सोशल मीडिया पोस्ट में मंत्रालय ने कहा कि मांग में वृद्धि को सफलतापूर्वक प्रबंधित किया गया है. एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने साफ कहा है कि कोयले की कोई कमी नहीं है और थर्मल पावर प्लांटों के पास करीब 5.37 करोड़ टन का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है.

सरकार के सामने चुनौतियां और आगे की राह क्या?

सब कुछ ठीक-ठाक चलने के बावजूद, कुछ चुनौतियां सामने आई हैं. ओडिशा और कुछ अन्य राज्यों में NTPC के दो थर्मल प्लांटों में कोयले की कमी की खबरें आई हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर बिजली संकट की आशंका पैदा हो गई है. एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि वित्त वर्ष 2026 में भारत ने अपने 12.86 गीगावाट के टारगेट के मुकाबले सिर्फ 9.47 गीगावाट थर्मल पावर क्षमता ही जोड़ी, जो भविष्य के लिए परेशानी का सबब है.

चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं. ऊर्जा मंत्रालय ने संसदीय समिति को बताया है कि आने वाले दिनों में मांग और बढ़ने की उम्मीद है. अनुमान है कि जून में यह 271 गीगावाट और जुलाई में 283 गीगावाट तक पहुंच सकती हैय़

आम जनता से क्या अपील?

बढ़ती मांग और सीमित संसाधनों के बीच, सरकार ने नागरिकों से बिजली का 'सही और समझदारी' से इस्तेमाल करने की अपील की है, खासकर दोपहर 2 से 4 बजे के पीक आवर्स के दौरान. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने भी अगले 6-7 दिनों तक उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत में लू के गंभीर प्रकोप की चेतावनी जारी की है.

कुल मिलाकर, यह गर्मी देश की बिजली व्यवस्था के लिए एक अग्निपरीक्षा है. थर्मल पावर, सौर ऊर्जा और बेहतर ग्रिड मैनेजमेंट के तालमेल ने अब तक हालात को कंट्रोल में रखा है. लेकिन जैसे-जैसे पारा और चढ़ेगा, इस जंग को जीतने के लिए प्रशासनिक चुस्ती और जनता की समझदारी दोनों की परीक्षा होगी.

स्रोत: ABP Hindi

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