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सीबीएसई की कॉपी रीचेकिंग को लेकर विवाद क्या है और स्टूडेंट क्यों उठा रहे हैं सवाल?

✍️ Admin 📅 28 May, 2026 ⏰ 05:43 PM 👁 58 views

इमेज स्रोत, Chinmaya Sharma/Hindustan Times via Getty Image सीबीएसई 12वीं बोर्ड का रिजल्ट आने के बाद कॉपी जांचने की नई प्रक्रिया ऑनस्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) पर सवाल उठ रहे हैं. विपक्ष ने इस व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है. इसी बीच, 2 जून को एक संसदीय स्थायी समिति ने सीबीएसई को नई मूल्यांकन प्रणाली पर जवाब देने के लिए बुलाया है. वहीं, 4 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स ने अपनी कॉपी दोबारा जांचने के लिए आवेदन किया है. सीबीएसई के अनुसार, इस साल 12वीं की परीक्षा में 17 लाख 68 हजार 962 स्टूडेंट्स शामिल हुए थे. इनमें से 4 लाख 4 हजार 319 स्टूडेंट्स ने री-इवेल्यूशन के लिए आवेदन किया है. यानी करीब 22.85 फीसदी स्टूडेंट्स ने पुनर्मूल्यांकन की मांग की है. बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें सीबीएसई ने इस साल के पुनर्मूल्यांकन के लिए आसंर शीट रिक्वेस्ट करने से जुड़ी फीस को 700 से घटाकर सौ रुपये कर दिया था. आसंर शीट के वेरिफ़िकेशन की फ़ीस को 500 से घटाकर 100 रुपये कर दिया है. इसी तरह, हर सवाल को चेक कराने की फ़ीस को 100 से घटाकर 25 रुपये कर दिया गया है. गौरतलब है कि 13 मई को सीबीएसई ने 12वीं परीक्षा के लिए रिजल्ट जारी किये थे. जिसमें 85.20% स्टूडेंट पास हुए थे, जो पिछले साल की तुलना में 3.19 फ़ीसदी कम पासिंग परसेंटेज है. इमेज स्रोत, Mayank Makhija/NurPhoto via Getty Images रिज़ल्ट जारी होते के बाद ऑनस्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) को लेकर आरोप लगने शुरू हो गए थे. इसके बाद 17 मई को सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक संयम भरद्वाज ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा था, "सीबीएसई एक ऐसा संस्थान है जो स्टूडेंट के हित में काम करता है और हम पूरी पारदर्शिता के साथ काम करते हैं." "हम लगभग 1.25 करोड़ उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन करते हैं. ऐसे में कहीं न कहीं कोई ग़लती होने की संभावना हो सकती है." 23 मई को सीबीएसई बोर्ड ने एक्स पर एक वीडियो बयान जारी करके स्टूडेंट व अभिभावकों को धैर्य बरतने की अपील की. बयान में कहा गया, "सीबीएसई निष्पक्ष और पारदर्शी मूल्यांकन प्रक्रिया के प्रति प्रतिबद्ध है. स्कैन की गई आंसर बुक से जुड़ी सभी उचित चिंताओं की समीक्षा हम निर्धारित प्रक्रिया के तहत विषय विशेषज्ञों से करवाएंगे." नई मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर सीबीएसई ने पहले बताया था कि यह प्रक्रिया अपनाने से परीक्षा कॉपियों को जांचने में कम समय लगा है और अन्य शिक्षा बोर्डों के मुक़ाबले कम समय में नतीजे घोषित कर दिए गए हैं. सीबीएसई ने यह भी बताया था कि कॉपी जांचने वाले इवेल्यूटर्स को नई मूल्यांकन प्रक्रिया समझने में मदद करने के लिए मॉक इवेलुएशन करने का मौक़ा दिया गया था. सीबीएसई ने फ़रवरी में बड़े पैमाने पर मॉक इवेलुएशन भी करवाया था. ओएसएम यानी ऑनस्क्रीन मार्किंग को सीबीएसई बोर्ड ने 2014 में पहली बार आंसर बुक के मूल्यांकन के लिए सीमित स्तर पर (पायलट) इस्तेमाल किया था. लेकिन बोर्ड ने इसके पूर्ण इस्तेमाल को तब रोक दिया था. सीबीएसई के मुताबिक़, तब ऐसी तकनीक की कमी थी जो कॉपी की कटिंग किए बिना उसकी स्कैनिंग कर पाए. ऐसे में तब आशंका थी कि स्कैनिंग के दौरान आंसर बुक के पेज इधर-उधर न हो जाएं. इस सिस्टम को सीबीएसई ने 2025 में दोबारा देशव्यापी स्तर पर बेहतर तकनीक के साथ लागू किया. दरअसल यह एक डिज़िटल मूल्यांकन प्रणाली है, जिसे सीबीएसई ने उत्तर पुस्तिकाओं की जांच को अधिक तेज़, सटीक और पारदर्शी बनाने के लिए शुरू किया है. सीबीएसई का मानना है कि इससे ग़लत जोड़ की त्रुटि ख़त्म होती है, डेटा एंट्री की ग़लतियाँ कम होती हैं. कॉपियों के खोने या गड़बड़ी का जोखिम घटता है. मूल्यांकन प्रक्रिया तेज़ और व्यवस्थित होती है. वो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख़बरें जो दिनभर सुर्खियां बनीं. सीबीएसई ने इस साल 12वीं की 98 लाख 66 हज़ार 622 आंसर बुक को ऑनस्क्रीन मार्किंग सिस्टम (ओएसएम) के जरिए जांचा था. रिजल्ट आने के बाद 19 मई को सीबीएसई ने एक रिक्वेस्ट विंडो खोली जिसमें 22 मई तक 12वीं की स्कैन की हुईं आंसर शीट हासिल की जा सकती थी. पर मीडिया में स्टूडेंट के हवाले से रिपोर्ट हुआ है कि कई मौकों पर सीबीएसई की साइट ही नहीं खुल रही थी, जिसकी एक वजह अतिरिक्त ट्रैफिक था. आवेदन करते समय बार-बार लॉगिन फ़ेल होने, पेमेंट गेटवे में बाधा और फ़ीस का असामान्य रूप दिखने जैसी समस्याएं सामने आईं. इससे बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स आवेदन करने से छूट गए. तब सीबीएसई ने अंतिम तारीख को तीन बार 22 मई, फिर 23 मई और 24 मई को बढ़ाया. इस तरह 25 मई की रात 12 बजे तक स्टूडेंट्स से आवेदन लिए गए, जिसे 4 लाख से ज़्यादा स्टूडेंट्स ने भरा था. ध्यान रहे कि सीबीएसई की पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में पूरी कॉपी रीचेक नहीं होती. बल्कि बोर्ड उस सवाल को संबंधित विषय विशेषज्ञ से चेक करवाता है, जिसके जवाब की मार्किंग को लेकर मूल्यांकन की अपील की गई है. यह री-इवेल्यूशन प्रक्रिया भी नई मूल्यांकन प्रणाली ओएसएम के जरिए ही की जानी है. इस मामले में आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने 25 मई को एक्स पर वीडियो पोस्ट करके मांग की कि कॉपी री-चेकिंग मैन्युअली हो. साथ ही बोर्ड स्टूडेंट्स के लिए इस प्रक्रिया को मुफ़्त में करे. इमेज स्रोत, Samyukta Lakshmi/Bloomberg via Getty Images 24 मई को अपने आधिकारिक नोटिस में सीबीएसई ने माना कि 21 व 22 मई को उनके पोर्टल पर तकनीकी ख़ामी थी, जिसके चलते कई स्टूडेंट्स के खातों से ज्यादा पेमेंट तो कुछ के खातों से कम पेमेंट कट गया. सीबीएसई ने स्पष्ट किया था कि वे अतिरिक्त पेमेंट को संबंधित स्टूडेंट को लौटाएंगे. जिनके पेमेंट में समस्या आई है, उनको भी स्कैन कॉपी दी जाएगी. जिन स्टूडेंट से कम रुपया कटा है, उन्हें अलग से बैलेंस पेमेंट के लिए जानकारी दी जाने की बात कही गई. इसके साथ ही सीबीएसई ने स्टूडेंट्स को यह भी राहत दी कि स्कैन कॉपी रिसीव होने के दो दिन में वे अगले चरण के लिए अप्लाई कर सकते हैं. अगले चरण में स्टूडेंट्स को उन सवालों के दोबारा मूल्यांकन के लिए अप्लाई करना होगा, जिनके ऊपर हुई मार्किंग से वे संतुष्ट नहीं हैं. यानी समझने की बात यह है कि अभी सीबीएसई के पोर्टल पर स्टूडेंट्स को दोबारा आगे की प्रक्रिया के लिए अप्लाई करना होगा, ऐसे में ज़रूरी है कि इसके तकनीकी मामलों को समय रहते सुलझाया जाए. 24 मई को शिक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक बयान में जानकारी दी कि आईआईटी मद्रास व आईआईटी कानपुर की विशेषज्ञ टीमों को इस पोर्टल की समस्या सुलझाने के लिए लगाया गया है. ये टीमें लॉगिन ऑथेंटिकेशन, यूज़र एक्सेस सिस्टम, पेमेंट गेटवे को ठीक करने में मदद देंगी. इमेज स्रोत, Parveen Negi/The India Today Group via Getty Image सीबीएसई की ओर से दिए गए डेटा के मुताबिक़, 26 मई तक 8 लाख 98 हज़ार 214 आंसर शीट आवेदक विद्यार्थियों को भेजी जा चुकी हैं. सीबीएसई का अनुमान है कि वह यह प्रक्रिया 27 मई तक पूरी कर लेगा लेकिन आगे का स्टेटस फ़िलहाल पता नहीं है. स्कैन की गई जो कॉपियां स्टूडेंट्स को मिली हैं, उनको लेकर 12वीं की परीक्षा देने वाले कई विद्यार्थियों ने सोशल मीडिया पर गड़बड़ियों के दावे किए हैं. इसी से जुड़ा एक मामला छात्र वेदांत श्रीवास्तव का है, उनकी फिजिक्स की आंसर शीट की सीबीएसई की ओर से मिली स्कैन कॉपी को लेकर खूब विवाद हुआ जिसकी चर्चा सोशल मीडिया पर भी हुई. वेदांत ने आरोप लगाया था कि री-इवैल्यूशन प्रोसेस के तहत उन्होंने जो स्कैन कॉपी डाउनलोड की वो उनकी नहीं किसी और की थी. बाद में सीबीएसई ने इस मामले में अपनी ग़लती मानते हुए बताया कि बताया कि वेदांत को उनकी सही आंसर शीट भेज दी गई है. कुछ मामलों में सोशल मीडिया पर स्कैन कॉपी ब्लर दिखने से जुड़े दावे सामने आए. बीबीसी से यूपी के बरेली ज़िले से एक सीबीएसई छात्रा ने संपर्क करके अपनी ब्लर कॉपी साझा की है. छात्रा का कहना है कि पोर्टल में कहीं पर भी इस समस्या की शिकायत सीबीएसई से करने का विकल्प नहीं है. साथ ही, उन्होंने सवाल उठाया है कि जब ब्लर पेज वाली अपनी हैंडराइटिंग वे खुद नहीं पढ़ पा रही हैं, उन पर इवेल्यूटर ने कैसे मार्किंग की होगी? ऐसे मामले में स्टूडेंट प्रश्न के दोबारा मूल्यांकन के लिए क्लेम कैसे डालेगा? जबकि कुछ मामलों में स्टूडेंट्स दावा कर रहे हैं कि एप्लीकेशन जमा होने के दो दिन बाद तक उन्हें स्कैन कॉपी रिसीव नहीं हुई. और कुछ मामलों में दावा है कि पेमेंट जमा होने पर भी पोर्टल में पेमेंट शो नहीं हुआ. सोशल मीडिया पर 19 साल के एक युवक ने दावा किया कि 26 फ़रवरी, 2026 को सीबीएसई का ऑन स्क्रीन मार्किंग पोर्टल हैक कर लिया गया था. केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने 26 मई को एक्स पर बयान के जरिए अपने ओएसएम मूल्यांकन प्रणाली में सुरक्षा उल्लंघन के दावों को ख़ारिज किया था. साथ ही कहा था कि सोशल मीडिया पोस्ट में जिस यूआरएल का जिक्र है, वह केवल नमूना डेटा वाला एक परीक्षण मंच था, न कि वास्तविक मूल्यांकन कार्य के लिए उपयोग किया जाने वाला पोर्टल. इमेज स्रोत, Raj K Raj/Hindustan Times via Getty Image सीबीएसई पोर्टल में पेमेंट गेटवे की समस्या के बीच 26 मई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने चार बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की. समाचार एजेंसी पीटीआई ने आधिकारिक बयान के हवाले से बताया है कि यह बैठक एसबीआई, इंडिया बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, केनरा बैंक के साथ की, जिसमें सीबीएसई के पेमेंट गेटवे की कमियां दूर करने पर विस्तार में चर्चा हुई. दूसरी ओर, पीटीआई से सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट किया है कि शिक्षा मंत्री ने तकनीकी ख़ामियों को लेकर सीबीएसई से एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. उन्होंने पूछा है कि आखिर क्यों री-इवेल्यूशन प्रक्रिया के दौरान अभिभावकों व विद्यार्थियों को तकनीकी ख़ामियों का सामना करना पड़ा. रिक्वेस्ट पोर्टल में समस्या के सामने आने के बाद शिक्षा मंत्री प्रधान ने आईआईटी मद्रास व कानपुर से तुरंत तकनीकी विशेषज्ञों की एक-एक टीम को सीबीएसई की मदद के लिए भेजने का निर्देश दिया था. नीट-यूजी विवाद और सीबीएसई की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को लेकर बढ़ती आलोचना के बीच संसद की एक स्थायी समिति एक अहम बैठक करने जा रही है. 25 मई को राज्यसभा सचिवालय की ओर से जारी किए गए नोटिस के मुताबिक़, एक व दो जून को होने वाली बैठक में शिक्षा मंत्रालय, सीबीएसई, एनटीए और स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों को तलब किया है. यह 31 सदस्यीय संसदीय स्थायी समिति है जिसके अध्यक्ष कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह हैं. इस बैठक में दो जून को ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली की समीक्षा होगी. यहां यह जानने योग्य है कि दिग्विजय सिंह ने अपने फेसबुक पेज़ पर इस प्रणाली से जुड़े कुछ सवाल उठाया है. उन्होंने कहा कि वह संसद की शिक्षा मंत्रालय की पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी में बतौर अध्यक्ष सीबीएसई से जानकारी लेंगे कि "ओएसएम को डिज़ाइन किसने किया है? वेंडर कौन था? उसका क्या अनुभव है?" कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 27 मई को सीबीएसई परीक्षा परिणामों में 'हेर-फे़र' का आरोप लगाते हुए केंद्र सरकार और 'कोएम्प्ट एडुटेक' नाम की कंपनी को इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराया है. हालांकि सीबीएसई ने राहुल गांधी के इन आरोपों को ख़ारिज किया है. राहुल गांधी ने दावा किया कि 'कोएम्प्ट एडुटेक' पहले 'ग्लोबारिना' के नाम से तेलंगाना में 2019 में विवादों में रही है. 'कोएम्प्ट एडुटेक' की वेबसाइट के मुताबिक़ ये एक टेक और एग्ज़ाम टेक्नोलॉजी कंपनी है, जो सीबीएसई को परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी डिज़िटल सेवाएं उपलब्ध कराती है. राहुल गांधी ने सवाल किया कि कंपनी को सीबीएसई का ठेका "क्यों और किसके कहने पर" दिया गया और क्या नियमों और प्रक्रिया को दरकिनार किया गया. राहुल गांधी ने मामले में स्वतंत्र न्यायिक जांच और एसआईटी गठन की मांग की. सीबीएसई के एक्स पोस्ट के मुताबिक़, "राहुल गांधी के आरोप ग़लत, भ्रामक और तथ्यों पर आधारित नहीं हैं." बोर्ड ने कहा कि उसने अनुबंध देने की प्रक्रिया में जनरल फ़ाइनेंशियल रूल्स (जीएफ़आर) के प्रावधानों का पालन किया है. सीबीएसई के मुताबिक़, बोर्ड परीक्षा 2026 के लिए उत्तर पुस्तिकाओं के डिज़िटल मूल्यांकन का आरएफ़पी (टेंडर डॉक्यूमेंट) 28 अगस्त 2025 को केंद्रीय सार्वजनिक पोर्टल पर जारी किया गया था. और अनुबंध क्वालीफ़ाइड बिडर (योग्य बोलीदाता) को दिया गया. बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित. 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स्रोत: BBC Hindi

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