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आलू खाने से क्या गैस की समस्या बढ़ती है या खाने का तरीक़ा सुधारने की ज़रूरत

✍️ Admin 📅 09 June, 2026 ⏰ 08:06 AM 👁 46 views

कई लोगों को हम यह कहते हुए सुनते हैं कि आलू खाने से पेट फूलना, बेचैनी या ज़्यादा गैस की समस्या होती है. आलू दुनिया भर में सबसे अधिक खाए जाने वाले खाद्य पदार्थों में से एक है. मैश किए हुए आलू, फ्रेंच फ्राइज़ या चिप्स जैसे प्रोडक्ट ज़्यादा मात्रा में खाने के बाद कुछ लोगों को असामान्य रूप से पेट फूलने की शिकायत होती है. लेकिन सवाल यह है कि क्या वाक़ई ज़्यादा आलू खाने से पेट में गैस बनती है? सीनियर गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट अरुल प्रकाश का कहना है कि इसका कोई निश्चित उत्तर नहीं है, मतलब न हाँ और न ही ना. उन्होंने बताया, "ज़्यादातर लोगों के लिए आलू सबसे अधिक गैस पैदा करने वाले खाद्य पदार्थों में से एक नहीं है. हालांकि, ज़्यादा आलू का सेवन, विशेष रूप से कुछ स्थितियों में, कुछ लोगों में पेट फूलना, भारीपन महसूस होना और आंतों में गैस जैसी असुविधा पैदा कर सकता है." "लेकिन यह ध्यान रखना अहम है कि हर व्यक्ति पर इसका असर अलग-अलग हो सकता है." विशेषज्ञों का कहना है कि आलू ही पेट की ऐसी समस्याओं का एकमात्र कारण नहीं है. इसमें कई कारक भूमिका निभाते हैं, जिनमें उन्हें पकाने का तरीक़ा, मात्रा, व्यक्ति की सेहत और शरीर की कुछ प्रकार के स्टार्च के साथ होने वाली प्रतिक्रियाएं शामिल हैं. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डाइजेस्टिव एंड किडनी डिजीज (एनआईडीडीके) के मुताबिक़, गैस तब बनती है, जब बड़ी आंत में मौजूद बैक्टीरिया उन कार्बोहाइड्रेट्स का फर्मेंटेशन करते हैं, जो छोटी आंत में पूरी तरह से पच नहीं पाते हैं. इसमें कहा गया है, "फर्मेंटेशन की इस प्रक्रिया से स्वाभाविक रूप से हाइड्रोजन, मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड जैसी गैसें बनती हैं. अत्यधिक फर्मेंटेशन से पेट फूलना, बेचैनी और गैस की समस्या हो सकती है." वो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख़बरें जो दिनभर सुर्खियां बनीं. आलू मुख्य रूप से स्टार्च से बना होता है. इस स्टार्च का अधिकांश भाग छोटी आंत में पचकर अवशोषित हो जाता है. हालांकि, इसका कुछ भाग पाचन प्रक्रिया से बचकर बड़ी आंत तक पहुँच जाता है, जहाँ आंतों के जीवाणुओं से इसका फर्मेंटेशन होता है. न्यूट्रिशन एंड गैस्ट्रोएंटरोलॉजी नामक पत्रिका में प्रकाशित एक स्टडी से पता चला है कि प्रतिरोधी स्टार्च एक प्रीबायोटिक के रूप में काम करता है, जो आंत में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीवों को पोषण प्रदान करता है. हालांकि यह आमतौर पर दीर्घकालिक आंत स्वास्थ्य के लिए अच्छा है, लेकिन यह फर्मेंटेशन प्रक्रिया कुछ लोगों में अस्थायी रूप से ज़्यादा गैस बना सकती है. डॉ अरुल प्रकाश यह भी बताते हैं, "कई क्षेत्रों में आलू आहार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसलिए, न केवल आलू, बल्कि बीन्स और मूली जैसी कुछ अन्य सब्ज़ियों जैसे कार्बोहाइड्रेट से भरपूर खाद्य पदार्थ भी पेट फूलने और गैस जैसी असुविधाओं का कारण बन सकते हैं." उन्होंने कहा कि सिर्फ़ इसलिए कि आलू जैसे खाद्य पदार्थ कुछ लोगों के लिए असुविधा पैदा करते हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि वो स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है. बल्कि पाचन क्रिया हर व्यक्ति में अलग-अलग होती है. डॉ अरुल प्रकाश का कहना है कि आलू की बजाय, "मिल्क प्रोडक्ट्स, बीन्स और मूली जैसे खाद्य पदार्थ गैस और पेट फूलने का कारण बनने की अधिक संभावना रखते हैं." उन्होंने बताया, "ये समस्याएं हर व्यक्ति के शरीर और पाचन स्वास्थ्य के आधार पर भी हो सकती हैं. आलू के साथ परोसे जाने वाले खाद्य पदार्थ भी इन लक्षणों को बढ़ा सकते हैं." "इसलिए अगर दाल और आलू युक्त भोजन करने पर ये असुविधाएं होती हैं, तो अगली बार इन्हें अलग-अलग खाएं और अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दें. इससे आपको पता चलेगा कि वास्तव में किस प्रकार का भोजन समस्या पैदा कर रहा है. अगर ऐसी असुविधाएं दो सप्ताह से अधिक समय तक बनी रहती हैं, तो डॉक्टर से परामर्श लेना आवश्यक है." इसके अलावा लैक्टोज से ज़्यादा दिक़्क़त वाले व्यक्ति को डेयरी उत्पादों से युक्त खाद्य पदार्थ खाने पर पेट फूलने और गैस की समस्या हो सकती है. इसी तरह तले हुए आलू में वसा की मात्रा अधिक होने के कारण उन्हें खाने के बाद लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस हो सकता है. इससे कुछ लोगों को खाने के बाद बहुत अधिक पेट भरा हुआ या असहज महसूस हो सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि आलू की तरह ही कई ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जो पेट फूलने और गैस की समस्या पैदा कर सकते हैं. उदाहरण के लिए, सीनियर गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट अरुल प्रकाश "बीन्स, चना, मटर, मसूर" के बारे में बताते हैं. इनमें ऑलिगोसैकेराइड नामक जटिल कार्बोहाइड्रेट होते हैं. चूंकि छोटी आंत में इन कंपाउंड्स को पूरी तरह से पचाने के लिए ज़रूरी एंजाइम नहीं होते हैं, इसलिए ये बड़ी आंत तक पहुँचते हैं और वहाँ बैक्टीरिया से फर्मेंटेशन होता है. इससे गैस बनती है. ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा का कहना है, "फूलगोभी, ब्रोकोली और पत्तागोभी जैसी सब्जियों में रैफिनोज नामक सल्फर युक्त कंपाउंड्स पाया जाता है. पाचन के दौरान ये कंपाउंड्स काफ़ी मात्रा में गैस बनने का कारण बन सकते हैं." अरुल प्रकाश बताते हैं, "हालांकि ये खाद्य पदार्थ ज़्यादा पौष्टिक होते हैं, लेकिन इन्हें अक्सर पेट फूलने के कारणों के रूप में भी बताया जाता है." इसके अलावा दूध, आइसक्रीम, नरम पनीर और दही में लैक्टोज होता है. लैक्टोज से दिक़्क़त वाले लोग उसे ठीक से पचाने के लिए ज़रूरी लैक्टेज एंजाइम का पर्याप्त उत्पादन नहीं कर पाते हैं. अरुल प्रकाश ने बताया कि लैक्टोज बड़ी आंत तक पहुँचता है, जहाँ बैक्टीरिया से इसका फर्मेंटेशन होता है. इससे गैस, पेट फूलना, पेट दर्द और कभी-कभी दस्त जैसी असुविधाएं होती हैं. साइंटिफिक स्टडी के मुताबिक़, साबुत अनाज और फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ पाचन क्रिया को बेहतर बनाते हैं और पेट की पुरानी बीमारियों के ख़तरे को कम करते हैं. हालांकि, विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि फाइबर का सेवन अचानक बढ़ाने से पाचन तंत्र पर बोझ पड़ सकता है और समस्याएं पैदा हो सकती हैं. शुगर-फ्री च्युइंग गम, कैंडी जैसे पदार्थों में अक्सर सॉर्बिटोल, मैनिटोल, जाइलिटोल और माल्टिटोल जैसे शुगर अल्कोहल पाए जाते हैं. अध्ययनों से पता चला है कि ये स्वीटनर छोटी आंत में केवल आंशिक रूप से अवशोषित होते हैं. नहीं पचा हुआ हिस्सा बृहदान्त्र तक पहुँचता है, जहाँ आंतों के जीवाणुओं से इसका फर्मेंटेशन होता है और यह आंतों में पानी खींच सकता है. अध्ययनों से पता चलता है कि इससे पेट फूलना, गैस और दस्त हो सकते हैं. जर्नल 'कट एंड पीडियाट्रिक्स' के एक अध्ययन में पाया गया कि जब शरीर सॉर्बिटोल (एक तरह का मीठा पदार्थ) को ठीक से नहीं पचा पाता, तो पेट से जुड़ी समस्याएँ जैसे गैस, पेट फूलना और दर्द हो सकते हैं. इसी तरह, मेयो क्लिनिक के मुताबिक़, सॉर्बिटोल, मैनिटोल और जाइलिटोल जैसे चीनी के विकल्प अक्सर ज़्यादा आंतों की गैस बनने का कारण बनते हैं, खासकर जब इन्हें ज़्यादा मात्रा में लिया जाए. मेयो क्लिनिक के मुताबिक़, सोडा या दूसरे कार्बोनेटेड (फिज़ वाले) पेय पाचन से जुड़ी समस्याओं को बढ़ा सकते हैं. ये पेट में ज़्यादा गैस बनाते हैं. ये पेय शरीर में कार्बन डाइऑक्साइड गैस छोड़ते हैं, जिससे डकार आना आम हो जाता है. अगर इन्हें ज़्यादा मात्रा में पिया जाए, तो इससे पेट फूलना, पेट भरा‑भरा लगना और बार‑बार डकार आने जैसी दिक्क़तें हो सकती हैं. गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट अरुल प्रकाश के मुताबिक पाचन संबंधी प्रतिक्रियाएं हर व्यक्ति में अलग-अलग होती हैं. उन्होंने बताया, "किसी व्यक्ति को कितनी गैस होती है, इसे कई कारक प्रभावित करते हैं. इनमें उनके आंतों के माइक्रोबायोटा की संरचना, पाचन की गति, खाने की आदतें और खाद्य एलर्जी शामिल हैं." गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट के मुताबिक़, पेट में गैस और सूजन की अधिकांश समस्याओं को साधारण आहार और जीवनशैली में बदलाव करके नियंत्रित किया जा सकता है. विशेष रूप से, "जल्दबाज़ी में खाना पेट फूलने और डकार आने का कारण बन सकते हैं. इसलिए भोजन को अच्छी तरह चबाकर और आराम से खाने से इन लक्षणों को काफ़ी हद तक कम किया जा सकता है." इसी तरह कुछ खाद्य पदार्थ कुछ लोगों के लिए समस्या का कारण बन सकते हैं. डॉ अरुल प्रकाश कहते हैं कि कुछ लोगों को आलू जैसी कंद वाली सब्जियां खाने के बाद ये लक्षण महसूस हो सकते हैं जबकि अन्य लोगों को डेयरी प्रोडक्ट या दालें खाने के बाद ये लक्षण महसूस हो सकते हैं. उनके मुताबिक ऐसा कोई भोजन नहीं है जो सभी को समान रूप से पेट की परेशानी का कारण बनता हो. उन्होंने बताया, "अगर कुछ खाद्य पदार्थों के सेवन के बाद भी ऐसे लक्षण बने रहते हैं, तो आप उनकी मात्रा कम करने या भोजन तैयार करने के तरीक़े में बदलाव करने पर विचार कर सकते हैं. अगर यह समस्या बनी रहती है, तो आपको डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए." डॉक्टर्स के मुताबिक़ पेट में गैस और सूजन आमतौर पर कोई बड़ी समस्या नहीं होती. लेकिन अगर इसके साथ कुछ गंभीर लक्षण दिखें, जैसे बिना वजह वजन कम होना, लगातार पेट दर्द, दस्त, मल (स्टूल) में खून, बहुत ज़्यादा कब्ज या बार‑बार उल्टी, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

स्रोत: BBC Hindi

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