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Death

ओमान तट पर अमेरिका ने भारतीय चालक दल वाले दो जहाज़ों पर हमला क्यों किया?

✍️ Admin 📅 11 June, 2026 ⏰ 07:56 AM 👁 47 views

ओमान के तट के पास बुधवार को अमेरिकी नेवी ने तेल टैंकर सेटेबेलो पर हमला किया, जिसमें दो भारतीय नाविकों की मौत हो गई. एक अन्य को अब भी लापता बताया जा रहा है. फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया के महासचिव मनोज यादव के अनुसार, "मृतकों की पहचान डेक कैडेट आदित्य शर्मा और इंजन फिटर शिवानंद चौरसिया के रूप में हुई है." चीफ़ इंजीनियर पटनाला सुरेश अभी लापता हैं. इससे पहले भारत सरकार ने तीनों को लापता बताया था. भारत के विदेश मंत्रालय ने इस हमले की निंदा की है लेकिन अपने बयान में अमेरिका का नाम तक नहीं लिया. हालांकि सोमवार को पलाऊ के झंडे वाले तेल टैंकर एमटी मैरीवेक्स पर अमेरिकी हमले के उलट भारत ने बुधवार को हुए हमले की खुलकर निंदा की. भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर कज़ाखस्तान की यात्रा पर थे, इसलिए अमेरिकी दूतावास के कार्यवाहक प्रमुख को तलब किया गया. मैरीवेक्स पर मौजूद 24 भारतीय नाविकों को भी ओमान की सेना ने सुरक्षित बचा लिया था. अमेरिका इस जहाज़ पर पहले ही प्रतिबंध लगा चुका था. सेटेबेलो जहाज़ पर मौजूद 21 भारतीय नाविकों को बचा लिया गया है. यह जहाज़ अमेरिकी सेना की ओर से दागे गए 'प्रिसिजन म्यूनिशन्स' की चपेट में आया था. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया कि पलाऊ के झंडे वाले तेल टैंकर सेटेबेलो ने ईरान से तेल ले जाते हुए जारी नाकाबंदी का उल्लंघन किया था. वो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख़बरें जो दिनभर सुर्खियां बनीं. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक्स पर जारी बयान में कहा, "अमेरिकी बलों की ओर से बार-बार चेतावनी देने के बावजूद जहाज़ के चालक दल ने नज़रअंदाज़ किया. इसके बाद एक अमेरिकी विमान ने जहाज़ के इंजन को निशाना बनाते हुए सटीक हथियारों से हमला किया." अमेरिकी सेना ने इस कार्रवाई का एक वीडियो भी जारी किया है. इस घटना ने एक बार फिर खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष और समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, ख़ासकर तब जब इस हमले में भारतीय नाविकों की जान गई है. तेल टैंकर सेटेबेलो पर हुए हमले के बाद भारत ने अमेरिका के साथ कड़ा विरोध दर्ज कराया है. भारत सरकार ने नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास के उप प्रमुख जेसन मीक्स को तलब किया और इस घटना पर विरोध जताया. यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब केवल दो दिन पहले ही ओमान के तट के पास अमेरिकी बलों ने एक अन्य तेल टैंकर मैरीवेक्स को निशाना बनाया था. इसमें से 24 भारतीय नाविकों को सुरक्षित निकाला गया था. भारतीय विदेश मंत्रालय ने बुधवार की घटना की निंदा करते हुए कहा, "ओमान स्थित भारतीय दूतावास स्थिति पर लगातार नज़र रखे हुए है. खोज और बचाव अभियान के लिए ओमानी अधिकारियों के साथ सक्रिय तालमेल कर रहा है." समुद्री ख़ुफ़िया वेबसाइट लॉयड्स लिस्ट के अनुसार, सेटेबेलो उन कई जहाज़ों में शामिल था जो हाल के दिनों में ओमान के दुक़्म बंदरगाह के पास रुके हुए थे और कथित तौर पर अमेरिकी नौसेना की निगरानी में थे. इससे पहले यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस ने एक अलर्ट जारी कर बताया था कि ओमान के सोहर से लगभग 20 समुद्री मील उत्तर-पूर्व में एक टैंकर के इंजन रूम में आग लग गई है और स्थानीय अधिकारी चालक दल को निकालने में सहायता कर रहे हैं. अलर्ट के अनुसार, जहाज़ पर एक व्यक्ति की मौत हुई थी और दो अन्य लापता बताए गए थे. भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि क्षेत्र में कारोबारी जहाज़ों पर लगातार हो रहे हमले गहरी चिंता के विषय हैं. भारत ने ज़ोर देकर कहा कि क्षेत्र में कारोबारी जहाज़ों और सिविल इन्फ़्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाना बंद होना चाहिए. अंतरराष्ट्रीय क़ानून के अनुरूप समुद्री मार्गों पर स्वतंत्र और निर्बाध आवाजाही जल्द से जल्द बहाल की जानी चाहिए. जहाज़ों की निगरानी करने वाली वेबसाइटों के अनुसार, सेटेबेलो पहले भी चीन जा चुका था. उसने मार्च और अप्रैल में दो बार चीन की यात्रा की थी. अप्रैल के अंत से मई की शुरुआत तक उसने लियानयुंगांग बंदरगाह पर माल उतारा था और 12 मई को सिंगापुर से रवाना हुआ था. 13 अप्रैल से अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू की थी, जब तेहरान ने होर्मुज़ स्ट्रेट से जहाज़ों की आवाजाही पर प्रतिबंध और नियंत्रण कड़ा कर दिया था. इस घटना ने खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव, समुद्री व्यापार की सुरक्षा और विदेशी संघर्षों में फंसे भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं. इस बीच ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं. अमेरिका ने ईरान पर फिर से हमला शुरू कर दिया है. ट्रंप ने आरोप लगाया है कि ईरान शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने में 'बहुत ज़्यादा समय' ले रहा है और 'अमेरिका को मूर्ख बना रहा है.' यह युद्ध 28 फ़रवरी को शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर सैन्य हमले किए थे. इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत हो गई थी. इसके जवाब में ईरान ने इसराइल और अमेरिका के सहयोगी खाड़ी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू किए. जल्द ही यह संघर्ष तेज़ी से पूरे क्षेत्र में फैल गया और मार्च में लेबनान भी इसकी चपेट में आ गया. अप्रैल में अमेरिका और ईरान युद्धविराम पर सहमत हुए थे, जिसे शुरुआती तौर पर दो सप्ताह के लिए लागू किया गया था. हालांकि, लगातार आरोप-प्रत्यारोप, नए हमलों और बढ़ते अविश्वास ने इस युद्धविराम को बेहद नाज़ुक बना दिया है, जिससे क्षेत्र में फिर से बड़े सैन्य टकराव की आशंका बनी हुई है. बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित. (बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हॉट्सऐप पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

स्रोत: BBC Hindi

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