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भगवंत मान का कथित वीडियो मामला: फ़र्ज़ी फॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार करने के आरोप में दो लोग हिरासत में, जानें पूरा मामला

✍️ Admin 📅 24 June, 2026 ⏰ 01:52 PM 👁 36 views

गुरुग्राम पुलिस ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के कथित विवादित वीडियो की फ़र्ज़ी फॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार करने और डिजिटल सबूतों से छेड़छाड़ करने के आरोप में दो लोगों को हिरासत में लिया है. इस मामले में गुरुग्राम के सेक्टर 29 स्थित डीएलएफ़ पुलिस स्टेशन में एफ़आईआर दर्ज की गई है. यह एफ़आईआर जसप्रीत उर्फ जस्सी नाम के एक व्यक्ति की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है. उनका आरोप है कि उन पर विवादित वीडियो की फ़र्जी फॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार करने का दबाव बनाया गया था. पुलिस ने अरुण महेंद्रू और अंकित नाम के दो लोगों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की है. दोनों को पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है. एफ़आईआर भारतीय न्याय संहिता की धारा 111 (2) (ए), 318 (2), 319, 336 (2), 336 (3) और 340 के तहत दर्ज की गई है. इसके अलावा आईटी एक्ट 2000 की धारा 65 और 66 (डी) भी लगाई गई हैं. दरअसल, 15 जून को अकाल तख्त साहिब में हुई बैठक के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने 'गुरु दोखी' और 'पंथ विरोधी' कहा था. यह फ़ैसला मुख्यमंत्री मान के कथित विवादित वीडियो से जुड़े केस में लिया गया था. इसके बाद आम आदमी पार्टी और खुद भगवंत मान ने इस वीडियो को ग़लत बताया था और इसमें मान के होने से इनकार किया था. इसके बाद 18 जून को पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने दो अलग-अलग फॉरेंसिक रिपोर्टों का हवाला देते हुए वायरल वीडियो पर सफ़ाई दी थी. मंत्री ने दावा किया था कि लैब में तकनीकी जांच की गई थी. इसके बाद यह साफ़ हो गया था कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति मुख्यमंत्री भगवंत मान नहीं हैं. शिकायतकर्ता जसप्रीत उर्फ जस्सी का आरोप है कि उन पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से जुड़े कथित वीडियो की फ़र्जी फॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार करने का दबाव बनाया गया था. शिकायतकर्ता के मुताबिक, "इसके लिए उन्हें 10 लाख रुपये की रिश्वत भी दी गई थी और जब उन्होंने आपत्ति जताई तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई." जसप्रीत ने गुरुग्राम पुलिस को दी अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि ख़ुद को पंजाब सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी बताने वाले व्यक्ति ने उनसे संपर्क किया था. उसने उन्हें गुरुग्राम के एक होटल में मिलने के लिए बुलाया था. उसने उनसे मुख्यमंत्री से जुड़े वीडियो पर रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा था. जसप्रीत के मुताबिक़ , दो लैब की रिपोर्ट दबाव में तैयार की गई थीं. उन्हें इन रिपोर्टों की सच्चाई की कोई जानकारी नहीं थी. जसप्रीत का आरोप है कि रिपोर्ट तैयार होने के दौरान भी संबंधित अधिकारी लगातार उनके संपर्क में थे. वे लगातार अपनी इच्छा के मुताबिक़ रिपोर्ट तैयार कराने का दबाव बना रहे थे. गुरुग्राम पुलिस ने अब तक इस मामले में दो अभियुक्तों को हिरासत में लिया है. उनकी पहचान अरुण महेंद्रू और अंकित के रूप में हुई है. पुलिस के मुताबिक़, मामले में दूसरे लोगों की भूमिका की जांच भी की जा रही है. गुरुग्राम के एसीपी क्राइम नवीन शर्मा ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, "एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें उन्होंने कुछ फ़र्ज़ी तैयार किया था. उनके पास सरकार से मान्यता प्राप्त कोई लैब नहीं थी. वे डिजिटल विशेषज्ञ हैं." उन्होंने आगे कहा, "हमारे पड़ोसी राज्य के मुख्यमंत्री के वीडियो में उन्होंने कुछ फ़र्ज़ी तैयार किया है. इस मामले में अंकित और अरुण नाम के लोगों को हिरासत में लिया गया है और उनसे पूछताछ की जा रही है." उन्होंने कहा, "यह बात सामने आई है कि पड़ोसी राज्य के कुछ अधिकारियों ने 10 लाख रुपये दिए थे, हालांकि यह अभी जांच का विषय है." उन्होंने कहा, "जांच जारी है. अगर कोई और भी शामिल पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी." वो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख़बरें जो दिनभर सुर्खियां बनीं. गुरुग्राम पुलिस की कार्रवाई के बाद विपक्षी दल आक्रामक हो गए हैं. शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "फ़र्ज़ी लैब रिपोर्टों के पीछे की सच्चाई इन वीडियो के जरिए सामने आ गई है." उन्होंने अभियुक्तों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. उन्होंने मुख्यमंत्री मान के इस्तीफ़े और संबंधित अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त करने की भी मांग की है. 23 जून की शाम को अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मामले में सवाल उठाए थे. उन्होंने कहा था, "फॉरेंसिक सीएफएसएल लैब चंडीगढ़ और दिल्ली में भी हैं. जांच वहीं से कराई जानी चाहिए थी, लेकिन वहां वीडियो नहीं भेजा गया." पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने भी प्रतिक्रिया दी है और मुख्यमंत्री के तत्काल इस्तीफे की मांग की है. उन्होंने एक्स पर लिखा, "हरियाणा पुलिस की एफ़आईआर ने आम आदमी पार्टी के उस कथित प्रयास का खुलासा कर दिया है, जिसमें अकाल तख्त को बदनाम करने और मुख्यमंत्री को बचाने के लिए पक्षपातपूर्ण फॉरेंसिक रिपोर्ट हासिल करने की कोशिश की गई थी." उन्होंने लिखा कि यह सिर्फ एक वीडियो का मामला नहीं है. यह पंजाब की सबसे बड़ी धार्मिक संस्था को कमजोर करने और राजनीतिक अस्तित्व बचाने के लिए सिख भावनाओं को आहत करने का मामला है. भगवंत मान मुख्यमंत्री बने रहने का नैतिक अधिकार खो चुके हैं. पंजाब बीजेपी अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने भी गुरुग्राम में एफ़आईआर दर्ज होने के बाद अपनी प्रतिक्रिया दी और भगवंत मान के इस्तीफे की मांग की. उन्होंने एक्स पर लिखा, "श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा 'गुरु दोखी' और 'पंथ विरोधी' घोषित किए जाने के बाद भी भगवंत मान कुर्सी से चिपके हुए हैं. गुरुग्राम में एफआईआर दर्ज हुई है. सरकारी अधिकारियों ने फर्जी फॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार कराने के लिए 10 लाख रुपये दिए. श्री अकाल तख्त साहिब को गुमराह करने की कोशिश की गई." उन्होंने आगे लिखा कि भगवंत मान को बचाने के लिए आगे आने वाले अरविंद केजरीवाल आज चुप हैं. उन्होंने सवाल किया, "हर मंत्री, हर विधायक और हर अधिकारी को फैसला करना चाहिए कि वह पंथ की इज्जत के साथ है या 'गुरु दोखी' की कुर्सी के साथ." इस बीच, इस घटना के बाद पंजाब जनसंपर्क विभाग की ओर से एक प्रेस नोट जारी किया गया. इसमें मुख्यमंत्री ने कहा, "मैंने श्री अकाल तख्त साहिब के सामने माथा टेका क्योंकि वह हर पंजाबी और हर सिख के लिए सर्वोच्च है, लेकिन कुछ लोग अपने निजी हितों के लिए इसका गलत इस्तेमाल कर रहे हैं." बीबीसी पंजाबी ने इस मामले में आम आदमी पार्टी से उसका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है. जवाब मिलने पर उसे खबर में शामिल किया जाएगा. गुरुग्राम पुलिस की कार्रवाई पर श्री अकाल तख्त साहिब की भी प्रतिक्रिया आई है. श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से जारी बयान में कहा गया, "पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार ने श्री अकाल तख्त साहिब और सिख समुदाय के साथ धोखा करने की कोशिश की है. यह बहुत निम्न स्तर की राजनीति है, जिससे हर सिख, गुरु नानक नाम लेने वाला और हर पंजाबी को सतर्क रहना चाहिए." बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

स्रोत: BBC Hindi

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