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Death

महिलाओं से बदसलूकी के आरोप, सादी वर्दी वाले करते लाठीचार्ज: सीजेपी प्रदर्शन में पुलिस कार्रवाई पर उठते सवाल

✍️ Admin 📅 22 July, 2026 ⏰ 03:40 PM 👁 69 views

जगह: जंतर मंतर, जनपथ, कनॉट प्लेस जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही कॉकरोच जनता पार्टी ने 20 जुलाई को संसद तक मार्च का आह्वान किया था. प्रदर्शनकारी नीट-यूजी पेपर लीक और दूसरी अनियमितताओं को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा मांग रहे हैं. इस मार्च से पहले दिल्ली पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के सेक्शन 63 के तहत न्यू दिल्ली डिस्ट्रिक्ट में निषेधात्मक आदेश लागू किया गया था. दिल्ली पुलिस ने ये भी कहा था कि मार्च के लिए ना कोई मंज़ूरी मांगी गई और ना ही दी गई. लेकिन दूसरी तरफ़ 20 जुलाई की सुबह से ही जंतर-मंतर और आसपास के इलाक़ों में भारी संख्या में प्रदर्शनकारी जुटने लगे थे. और देखते ही देखते लोगों का हुजूम नज़र आने लगा. प्रदर्शनकारियों का रास्ता रोकने के लिए बड़े-बड़े बैरिकेड लगाए गए थे. दूसरी तरफ़ विरोध कर रहे नौजवान सैकड़ों की तादाद में थे और आगे बढ़ना चाह रहे थे. ऐसे ही एक वीडियो में नज़र आता है कि कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके एक टैम्पो जैसे किसी वाहन पर बैठे हैं, और पुलिस से बैरिकेड हटाने की मांग कर रहे हैं. इस दौरान पुलिसकर्मी उन्हें नीचे आने के लिए कह रहे हैं, जबकि नीचे खड़ी भीड़ ऐसा करने से मना कर रही है. देश - दुनिया की बड़ी ख़बरें जिन्होंने बटोरी सुर्खियां. विरोध-प्रदर्शन के दौरान वहां इंटरनेट बंद कर दिया गया था. लेकिन जो कुछ इस दिन जंतर-मंतर, जनपथ, कनॉट प्लेस और आसपास के दूसरे इलाकों में हुआ, सोशल मीडिया उन वीडियो और फोटो से पट गया. और इन वीडियो-फोटो में जो कुछ दिख रहा है, उसे लेकर पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए जा रहे हैं. प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए ना सिर्फ़ आंसू गैस के गोले छोड़े गए, बल्कि सुरक्षाकर्मी उन पर लाठियां भांजते दिखे. कई वीडियो में पुलिसकर्मी और रैपिड एक्शन फ़ोर्स की नीली वर्दी पहने सुरक्षाकर्मी लोगों को लाठियों से मारकर भगाते हुए दिख रहे हैं. कई ऐसे वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हैं, जिनमें पुलिस के साथ कुछ लोग सादे कपड़ों में लाठियां चलाते हुए दिख रहे हैं. जब उनसे इस बारे में सवाल किया जाता है तो वो आक्रामक तरीक़े से लोगों को मारते हुए नज़र आते हैं. दिल्ली पुलिस ने इसी दिन एक बयान जारी कर कहा था, "प्रदर्शनकारियों ने नई दिल्ली इलाके में आक्रामक और हिंसक व्यवहार किया. पुलिस की तरफ़ से कई बार चेतावनी देने के बावजूद उन्होंने वहां से हटने से इनकार किया. उन्होंने पुलिसकर्मियों पर पत्थरों और दूसरी चीज़ों से हमला किया, पुलिस बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की, पुलिस और सरकारी वाहनों पर हमला किया, बड़े पैमाने पर हिंसा की." पुलिस ने आगे कहा, "इस घटना में 118 पुलिसकर्मियों को चोटें आईं, जिनमें वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं. इस दौरान हुई झड़पों में क़रीब 60 प्रदर्शनकारियों के भी घायल होने की ख़बर है. क़रीब 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है और समुचित क़ानूनी कार्रवाई शुरू की जा रही है." दूसरी तरफ़ कॉकरोच जनता पार्टी का कहना है कि पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे नौजवानों पर बर्बरता से लाठियां भांजी. अभिजीत दीपके ने कहा कि वो अपने समर्थकों, ख़ास तौर से उन लड़कियों से माफ़ी मांगते हैं, जिन्हें पुरुष पुलिस अधिकारियों ने बर्बरता से पीटा है. कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस कार्रवाई के लिए माफ़ी मांगनी चाहिए. उन्होंने सवाल किया कि प्रधानमंत्री इस कार्रवाई पर चुप क्यों हैं? समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बुधवार को लोकसभा में कहा कि "स्टूडेंट्स के कपड़े फाड़े गए, हाथ तोड़े गए और सिर फोड़े गए." आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को कहा कि "मोदी सरकार ने ये आदेश दिया था कि जिसको मर्ज़ी उठा लो, बच्चों को दहशत पैदा करने के लिए था ताकि डर पैदा किया जाए." बीएनएस हैंडबुक दिल्ली पुलिस एकेडमी के सेक्शन 195 (2) में कहा गया है कि जो कोई भी किसी पब्लिक सर्वेंट पर हमला करता है, या उसके काम में बाधा डालता है, या किसी गैर-कानूनी भीड़ को तितर-बितर करने, दंगा या लड़ाई-झगड़ा रोकने की कोशिश के दौरान अपनी ड्यूटी निभा रहे पब्लिक सर्वेंट पर आपराधिक बल का इस्तेमाल करता है, उसे तीन साल तक की कैद, या कम से कम पच्चीस हज़ार रुपये का जुर्माना, या दोनों सज़ाएं हो सकती हैं. लेकिन सोमवार को दिल्ली के ठीक बीचोंबीच जो हुआ, जिस तरह की कार्रवाई हुई, उसे लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. कुछ तस्वीरें और वीडियो ऐसे भी सामने आए हैं, जिनमें प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों को लगी चोटें देखी जा सकती हैं. संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के पास एक पुलिसकर्मी का वीडियो भी सामने आया, जिनकी आँख में चोट लगी थी. मीडिया के पूछे जाने पर पुलिसकर्मी कहते हैं, "पत्थर लगा है. आँख पर चोट लगी है. हम बैरिकेड पर खड़े थे. सामने से पत्थर लगा है." 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन के बारे में दिल्ली पुलिस ने एक बयान जारी किया था. दिल्ली पुलिस ने कहा था, "आज हुए उग्र प्रदर्शन के दौरान ड्यूटी पर तैनात दिल्ली पुलिस के विशेष आयुक्त, संयुक्त आयुक्त, अतिरिक्त आयुक्त और उपायुक्त रैंक के अधिकारियों सहित दिल्ली पुलिस और केंद्रीय पुलिस बलों के 118 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए." पहला मुद्दा: सादी वर्दी में लाठी भांजते जंतर मंतर से आए कई वीडियो में दिख रहा है कि सिविल ड्रेस में कथित पुलिसकर्मी थे, और उनके हाथों में लाठियां थीं और वो भीड़ को कंट्रोल करने के लिए बल प्रयोग कर रहे थे. ऐसे ही जब कुछ लोगों से सिविल ड्रेस में होने और चेहरा ढंकने से जुड़ा सवाल किया गया तो वो आक्रामक व्यवहार करते नज़र आए. जंतर-मंतर पर हुए पुलिस एक्शन में भारी बलप्रयोग के आरोप भी लग रहे हैं. पुलिसकर्मियों पर आरोप हैं कि उन्होंने ना केवल प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाने के लिए लाठियां चलाईं, बल्कि भागते हुए प्रदर्शनकारियों पर बलप्रयोग भी किया. इसके अलावा कई लोगों को सिर, आंखों और छाती पर चोटें आई हैं, जबकि गाइडलाइंस कहती हैं कि लाठियां चलाते समय कमर से नीचे हमला किया जाता है ताकि नुकसान कम से कम हो. 21 साल की एक लड़की दिल्ली के आरएमएल अस्पताल में भर्ती हैं, जो गंभीर रूप से ज़ख़्मी हैं. कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि लड़की की हालत इतनी गंभीर थी कि उसे वेंटिलेटर पर रखना पड़ा. तीसरा मुद्दा: महिलाओं से बदसलूकी के आरोप कुछ ऐसे वीडियो सामने आए हैं, जिनमें महिलाओं से कथित तौर पर बदसलूकी दिखाई देती है. एक वीडियो में पुलिस के एक अधिकारी एक लड़की को थप्पड़ मारते नज़र आते हैं. एक दूसरे वीडियो में एक इंस्पेक्टर रैंक का पुलिसकर्मी वहां से भागती हुई लड़की को पीछे से डंडा मारते नज़र आते हैं. इसके अलावा दिल्ली पुलिस पर पेलेट गन इस्तेमाल करने के आरोप भी लग रहे हैं. हालांकि दिल्ली पुलिस का कहना है कि ये आरोप निराधार हैं. पुलिस ने इन आरोपों पर कहा, "ये दावे कि दिल्ली पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन का इस्तेमाल किया, ये पूरी तरह ग़लत और भ्रामक हैं. दिल्ली पुलिस के पास ना पेलेट गन हैं और ना इस प्रदर्शन के दौरान इस्तेमाल हुई." बीबीसी ने दिल्ली पुलिस के कई अधिकारियों से इन वायरल वीडियों और पुलिस पर लगते बर्बर कार्रवाई के आरोपों पर बात करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया. उनके जवाब के आते ही रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा. एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर हुए इस 'क्रैकडाउन' की आलोचना करते हुए इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया है. एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के चेयर ऑफ बोर्ड आकार पटेल ने कहा, "जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन से आई तस्वीरों और रिपोर्ट ने दिखाया कि किस तरह एक शांतिपूर्ण विरोध को दबाया जाता है." उन्होंने आगे कहा, "दिल्ली पुलिस की कार्रवाई से गंभीर सवाल उठते हैं कि क्या उनका रवैया अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के तहत क़ानूनी, ज़रूरी और उचित था. हम दिल्ली पुलिस से संयम बरतने और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ ग़ैर-क़ानूनी बल का इस्तेमाल तुरंत बंद करने की अपील करते हैं." "अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ग़ैर-क़ानूनी व्यवहार के सभी आरोपों की तुरंत, स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से जांच हो. इन आरोपों में पुलिसकर्मियों के लाठी, आंसू गैस और पत्थर फेंकने का अत्यधिक इस्तेमाल शामिल है." ऐसे किसी प्रदर्शन के समय मैदान पर मौजूद पुलिसकर्मियों को क्या-क्या करना होता है, कंट्रोल करने के कायदे क्या कहते हैं, कैसे कम से कम बल प्रयोग किया जाना चाहिए, इस बारे में बीबीसी ने उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह से बातचीत की. उन्होंने कहा कि "भारत में लोगों को विरोध-प्रदर्शन करने का अधिकार है, लेकिन भारतीय संविधान ये भी कहता है कि ये विरोध-प्रदर्शन कुछ पाबंदियों के साथ हो, क्योंकि देश की सुरक्षा को भी देखना है. ऐसे में किसी को भी 'एब्सोलूट पावर' नहीं मिली है. प्रोटेस्ट को कैसे रेगुलेट करना है, ये ज़िम्मेदारी शासन के ज़रिए पुलिस की होती है." ओपी सिंह ने कहा, "सबसे पहले विरोध-प्रदर्शन के लिए रूट तय किया जाता है कि कहां से शुरू होकर कहां तक जा सकते हैं और उसके पार जाने की इजाज़त नहीं होती." "हालात बनने पर भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया जाता है. और अगर भीड़ तब भी नज़दीक आती है, तो लाठीचार्ज किया जाता है. लेकिन इससे पहले चेतावनी देनी होती है." ये पूछने पर कि क्या सादी वर्दी में पुलिस को भीड़ को कंट्रोल करने का अधिकार होता है, इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि इंटेलिजेंस विंग के लोग सादी वर्दी में रहते हैं, क्योंकि उनका काम जानकारी जुटाना होता है. क्या पुलिसकर्मी सादी वर्दी में लाठीचार्ज भी कर सकते हैं, इस पर ओपी सिंह ने कहा, "नहीं, ऐसा नहीं है. सादी वर्दी में तैनात लोगों को पुलिसिंग की इजाज़त नहीं होती. वो लाठी नहीं चला सकते, गोली नहीं चला सकते." हालांकि, वो अपवादों का ज़िक्र भी करते हैं. उन्होंने कहा, "कभी-कभी ऐसा हो जाता है कि हालात अचानक बदलने पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सादी वर्दी में पहुंच सकते हैं. उन्हें पहचाना जा सकता है. क्राउड कंट्रोल के लिए पुलिस भी वीडियोग्राफ़ी करती है, ताकि आरोप लगने पर वो काम आ सकें." लाठीचार्ज करने को लेकर पुलिसकर्मियों को क्या निर्देश रहते हैं, इस पर ओपी सिंह ने कहा, "ये नहीं बताया जाता कि लाठी कहां मारनी है, लेकिन जो लीगल टर्म इस्तेमाल होती है, वो है मिनिमम फोर्स का इस्तेमाल करना है. मतलब ये है कि आप शरीर के ऐसे हिस्से पर वार करें कि वो घातक कतई ना हो." बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित. 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स्रोत: BBC Hindi

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