10 साल की जेल, 10 करोड़ रुपये का जुर्माना: पेपर लीक रोकने वाले नए प्रस्तावित क़ानून में क्या है ख़ास?
इमेज स्रोत, Punit PARANJPE / AFP via Getty Images केंद्र सरकार ने पब्लिक एग्ज़ामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ़ अनफ़ेयर मीन्स) एक्ट, 2024 में संशोधन के लिए पब्लिक एग्ज़ामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ़ अनफ़ेयर मीन्स) अमेंडमेंट एक्ट, 2026 संसद में पेश किया है. इसका उद्देश्य पेपर लीक, संगठित नकल माफिया और परीक्षा कराने वाली एजेंसियों की जवाबदेही तय करने के लिए कानून को और सख़्त बनाना है. हालांकि संसद के दोनों सदनों में हंगामे के बीच अब तक इस पर चर्चा शुरू नहीं हो पाई है. 2026 के संशोधन बिल में मुख्य बदलाव ये हैं: इमेज स्रोत, Arvind Yadav/Hindustan Times via Getty Images 2024 के कानून में परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों के लिए भी ज़िम्मेदारी तय की गई थी, लेकिन 2026 बिल में इसे और सख़्त किया गया है. दोषी पाए जाने पर परीक्षा सेवा प्रदाता (जैसे परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी) पर 5 करोड़ रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. एजेंसी के जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई का प्रावधान है. देश - दुनिया की बड़ी ख़बरें जिन्होंने बटोरी सुर्खियां. 2026 बिल में संगठित तरीके से पेपर लीक कराने वाले गिरोहों के लिए सज़ा और जुर्माना बढ़ाने का प्रस्ताव है. 2026 संशोधन बिल में पेपर लीक और परीक्षा से जुड़े अपराधों की जांच के लिए स्पेशल टास्क फ़ोर्स (एसटीएफ़) बनाने का प्रावधान जोड़ा गया है, ताकि ऐसे मामलों की जांच तेज़ी से हो सके. इसके अलावा, जांच समय पर पूरी हो सके, इसके लिए विधेयक में जांच पूरी करने की दो महीने की समय-सीमा तय की गई है. बिल में परीक्षा से जुड़े मामलों के जल्दी निपटारे के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों का प्रावधान किया गया है. सरकार को ऐसे मामलों की पैरवी के लिए स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त करने का अधिकार देने का प्रस्ताव है. तेज़ और प्रभावी अभियोजन सुनिश्चित करने के लिए, विधेयक में राज्य सरकारों और केंद्र सरकार से एक या अधिक स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर की नियुक्ति का प्रावधान किया गया है. मज़बूत अपीलीय व्यवस्था की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए, विधेयक में प्रस्ताव है कि फास्ट ट्रैक कोर्ट के फ़ैसलों के ख़िलाफ़ दायर अपीलों की सुनवाई हाई कोर्ट के दो न्यायाधीशों की पीठ करेगी. साथ ही, यह भी कहा गया है कि अपील स्वीकार होने की तारीख़ से तीन महीने के भीतर उसका निपटारा किया जाना चाहिए. इस संदर्भ में, फ़ैसले के 30 दिनों के भीतर अपील दायर करनी होगी. दस्तावेज़ में कहा गया है, "यदि हाई कोर्ट देरी के लिए दिए गए कारणों से संतुष्ट हो, तो 90 दिनों से अधिक की देरी नहीं होनी चाहिए." इमेज स्रोत, Anshuman Poyrekar/Hindustan Times via Getty Images इमेज स्रोत, Prakash Singh/Bloomberg via Getty Images 26 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एग्ज़ाम सुधारों को लेकर टेक्नोलॉजी क्षेत्र की मशहूर शख्सियत नंदन नीलेकणी के नेतृत्व में एक हाई पावर्ड टास्क फ़ोर्स बनाने की घोषणा की है. उन्होंने सोशल मीडिया पर बताया है कि उनकी रिपोर्ट के आधार पर ही परीक्षाओं की विश्वसनीयता को सुनिश्चित करने के लिए जल्द से जल्द कदम उठाए जाएंगे. पीएम मोदी ने कहा है, "जिन लोगों ने विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है वे जेलों में सड़ रहे हैं. हम फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट बना चुके हैं. हम कल भी पार्लियामेंट में कठोर कानूनी प्रावधानों के साथ नया क़ानून बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं." "लेकिन हमें भविष्य के लिए सोचना है. हमारी परीक्षा पद्धति भरोसेमंद हो, पारदर्शी हो, हमारी परीक्षा पद्धति में सबसे ज़्यादा तकनीक का इस्तेमाल हो, इन सारी बातों को ध्यान में रखते हुए विश्व प्रसिद्ध टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट नंदन नीलेकणी जी के नेतृत्व में एक हाई पावर्ड टास्क फ़ोर्स बनाने का फ़ैसला किया गया है." समाचार एजेंसी एएनआई और आईएएनएस के मुताबिक़, "हाई पावर्ड टास्क फोर्स तकनीकी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणी, इसरो के पूर्व अध्यक्ष एस. सोमनाथ, आईबी के पूर्व निदेशक तपन डेका, आईआईटी चेन्नई के निदेशक वी. कामकोटी, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल और लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा शामिल हैं." बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित. BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.
स्रोत: BBC Hindi