नेपाल-तिब्बत बाढ़ से भारी तबाही, अब तक क्या-क्या पता है?
नेपाल-तिब्बत सीमा पर बड़े पैमाने पर भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है. सैकड़ों लोग मारे गए हैं या लापता हैं. तलाश और बचाव अभियान जारी है. चीनी सरकारी मीडिया ने कहा है कि बड़ी संख्या में लोग हताहत हुए हैं. वहीं, नेपाली अधिकारियों ने "बड़े पैमाने पर नुक़सान" की आशंका जताई है. मारे गए या लापता लोगों की संख्या अभी साफ़ नहीं है. अंतिम मृतक संख्या इससे काफ़ी ज़्यादा होने की आशंका है. इमेज स्रोत, AFP via Getty Images नेपाल के विदेश मंत्री ने शुरुआत में कहा था कि भूस्खलन से कुछ समय पहले तिब्बत-नेपाल सीमा पर भूकंप की ख़बर मिली थी. इससे संकेत मिला कि भूकंप की वजह से शायद ये आपदा आई. लेकिन अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण (यूएसजीस) के विश्लेषण में कहा गया है कि वहां कोई भूकंप नहीं आया था. इससे सवाल उठ रहे हैं कि भूस्खलन की वजह क्या थी. बड़ी मात्रा में मिट्टी और मलबा उत्तरी नेपाल के कस्बों की ओर बह गया. इनमें पर्वतारोहण के पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के बीच लोकप्रिय इलाक़े भी शामिल हैं. यह सीमा नेपाल की राजधानी काठमांडू से करीब 64 किलोमीटर उत्तर में है. वीडियो में दिख रहा है कि मिट्टी और चट्टानों की एक दीवार इमारतों, सड़कों और गाड़ियों को बहा ले जा रही है. लोग नुवाकोट इलाक़े में तेज़ी से आगे बढ़ रहे मलबे से बचकर भागते दिख रहे हैं. भोते कोशी, त्रिशूली और नारायणी नदियों के किनारे भीषण बाढ़ आई है. इमेज स्रोत, Anadolu via Getty Images सीमा के तिब्बती हिस्से के गांवों में भी मौतों की ख़बर है. नेपाल पर्यटन बोर्ड के मुताबिक़, लापता विदेशी नागरिकों में भारत, ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड्स, अमेरिका, मलेशिया, ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका के नागरिक शामिल हैं. बीबीसी ने नेपाल के नुवाकोट ज़िले में बचे लोगों से बात की है. यह इलाक़ा बाढ़ से सबसे ज़्यादा प्रभावित इलाक़ों में से एक है. नुवाकोट की कल्पना मल्ला कहती हैं, "मेरे परिवार के लोग मेरी आंखों के सामने बाढ़ में बह गए." वह कहती हैं कि उनके पिता, मां, बहन और उनकी बहन के बच्चे, सभी बाढ़ के पानी में बह गए. वह कहती हैं, "वे बाढ़ से बच नहीं सके. कोई मौक़ा ही नहीं था. इस बाढ़ ने सब कुछ छीन लिया. लेकिन मैं और मेरा बेटा एक घर की छत पर चढ़ गए और बच गए. हमें ख़ुद समझ नहीं आया कि हम कैसे बच गए." उनके बेटे सुगम मल्ला कहते हैं कि उन्होंने अपनी मां का हाथ खींचकर उन्हें बचाया. वह कहते हैं, "इससे पहले, मैंने अपना फ़ोन अपनी बहन को दे दिया था, ताकि वह सुरक्षित रहे और मदद के लिए संपर्क कर सके. लेकिन अब उससे संपर्क नहीं हो पा रहा है. मोबाइल बंद है. मुझे डर है कि वह भी बाढ़ में बह गई होगी." एक अन्य महिला, गोमा पंडित कहती हैं कि उनकी भैंसें और बाकी सभी मवेशी बह गए हैं. "मेरी खेती की ज़मीन भी बह गई. सरसों के बीजों की 10 बोरियां, कई टन मक्का और धान, सब चला गया. कुछ भी नहीं बचा." नेपाल के रसुवा ज़िले के रसुवा स्याफ्रु बेसी गांव में रहने वाले सोनम दोरजी विदेशी पर्यटकों के लिए ट्रेकिंग गाइड हैं. उन्होंने बीबीसी को बताया कि स्थानीय समय के मुताबिक़ सुबह 9 बजे उनके गांव में बाढ़ आई. सोनम इससे एक घंटे पहले ही एक तय यात्रा के लिए काठमांडू जाने के लिए निकले थे. लेकिन उनकी बहन डेचन तामांग लापता हैं. उनके पति और परिवार के कई अन्य सदस्य भी लापता हैं. सोनम कहते हैं कि गांव से निकलते समय उन्हें बाढ़ की आवाज़ें सुनाई दी थीं. वह कहते हैं, "ऐसा लग रहा था जैसे भूकंप आया हो. मेरा घर ढह गया है... मैंने उसकी एक तस्वीर देखी है." वह बाढ़ को "अचानक आई और तबाही मचाने वाली" बताते हैं. "अब कई लोग ऐसे हैं, जिनके पास रहने के लिए घर नहीं है. उन्हें तुरंत बचाने और सुरक्षित जगह पहुंचाने की ज़रूरत है. उन्हें खाना, अस्थायी ठिकाना और मेडिकल मदद भी चाहिए." वह प्रार्थना कर रहे हैं कि उनकी बहन ज़िंदा मिल जाए. वह कहते हैं, "10 फ़ीसदी उम्मीद है. हम उम्मीद कर रहे हैं." इमेज स्रोत, AFP via Getty Images नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने कहा कि "पूरा देश स्तब्ध और बेहद परेशान है". उन्होंने कहा कि अधिकारी राहत और बचाव अभियान में चीन के साथ तालमेल करेंगे. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने "पूरी ताक़त" से तलाश अभियान चलाने की अपील की. उन्होंने आगे ऐसी घटनाओं के असर को रोकने के लिए निगरानी और पहले से चेतावनी देने वाली व्यवस्थाओं को मज़बूत करने का वादा किया. पड़ोसी देश भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उनकी सरकार "नेपाल को हर तरह की मानवीय मदद देने के लिए तैयार है". ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने कहा कि ब्रिटिश सरकार नेपाल में मौजूद ब्रिटिश नागरिकों की मदद के लिए "हर संभव कोशिश" करेगी.
स्रोत: BBC Hindi