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राजस्थान: सीजेपी की मांग के बाद चर्चा में आए इस स्कूल का हाल अब कैसा है?

✍️ Admin 📅 02 September, 2026 ⏰ 07:18 AM 👁 60 views

21 अगस्त को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की एक टीम राजस्थान के बगरू विधानसभा क्षेत्र के एक स्कूल में गई थी. सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका का कहना था कि स्कूल की जर्जर इमारत का मुद्दा उठा रही टीम पर गांव में हमला हुआ. इस घटना के बाद ये स्कूल सुर्खियों में आया. जयपुर से क़रीब 20 किलोमीटर की दूरी पर रामपुरा-कंवरपुरा गांव में ये प्राथमिक विद्यालय है. इस विवाद के बाद 22 अगस्त की रात क़रीब 11 बजे मुख्यमंत्री की ओर से जारी प्रेस नोट में कहा गया कि 1 सितंबर से स्कूल के भवन का निर्माण शुरू हो जाएगा, लेकिन तय समय यानी मंगलवार को भी इस स्कूल की इमारत का निर्माण शुरू नहीं हुआ हो पाया. दरअसल इसके पीछे की वजह है टेंडर में एक पेंच. इसके बारे में नाम नहीं छापने की शर्त पर एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा कि जब ख़ुद मुख्यमंत्री के कहने के बाद राजधानी में अगर काम नहीं शुरू हो सका है तो सैकड़ों किलोमीटर दूर सीमावर्ती जिल़ों में क्या होता होगा. हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि वो जल्द से जल्द काम शुरू कराने का विकल्प तलाश रहे हैं. कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रवक्ता आशुतोष रांका अपने कार्यकर्ताओं के साथ 21 अगस्त की सुबह रामपुरा कंवरपुरा गांव में मौजूद इस स्कूल का निरीक्षण करने पहुंचे थे. इस दौरान कई लोगों ने उनका विरोध करते हुए मारपीट की थी. वहां पथराव की घटना भी हुई. इस घटना के बाद से ही यह स्कूल चर्चा में रहा. यहां की इमारत बिल्कुल जर्जर है और बच्चे इसके बदले जिस जगह पढ़ाई कर रहे थे, वो गंदगी से भरी थी. इसके बाद सीजेपी ने राज्य सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए बड़े आंदोलन शुरू करने और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के इस्तीफ़े तक ले जाने की चेतावनी दी थी. इसके बाद सोशल मीडिया और अन्य समाचार माध्यमों पर भी राज्य सरकार की शिक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे. इन सवालों और नेशनल मीडिया की ख़बरों के बीच मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से 22 अगस्त की देर रात क़रीब 11 बजे एक प्रेस नोट जारी किया गया. इस प्रेस नोट को सीजेपी ने अपनी बड़ी जीत बताया था. मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी प्रेस नोट के मुताबिक, जयपुर ज़िले के सांगानेर ब्लॉक स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय रामपुरा (कंवरपुरा) के जर्जर भवन के स्थान पर नए भवन का निर्माण 1 सितंबर, 2026 से शुरू होना था. इस तरह से नई इमारत के लिए कुल 18 लाख रुपये की राशि स्वीकृत हुई. सरकार ने स्वीकार किया कि एक साल से स्कूल जर्जर स्थिति में था. इसलिए बच्चों की पढ़ाई के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई थी. देश - दुनिया की बड़ी ख़बरें जिन्होंने बटोरी सुर्खियां. इस वैकल्पिक व्यवस्था को 21 अगस्त को हुए विवाद के दौरान मीडिया ने 'तबेले में चल रहा स्कूल' बताया था. विवाद होने पर तुरंत नज़दीक ही एक ग्रामीण के घर में स्कूल को शिफ़्ट किया गया. प्रेस नोट के मुताबिक इस स्कूल की स्थापना वर्ष 1985 में प्राथमिक विद्यालय के रूप में हुई थी. विद्यालय भवन में दो क्लासरूम, बरामदा और शौचालय की सुविधा उपलब्ध थी. समय के साथ भवन पुराना और कमजोर हो गया. समग्र शिक्षा में अतिरिक्त ज़िला परियोजना समन्वयक (एडीपीसी) के तत्कालीन सहायक अभियंता ने 13 सितंबर 2025 को पत्र संख्या 1168 के ज़रिए जयपुर ज़िले के 37 स्कूलों को भवन 'असुरक्षित' प्रमाण पत्र दिया था. इसमें 34वें नंबर पर रामपुरा का सरकारी प्राथमिक स्कूल भी शामिल था. उन्होंने इस प्रमाण पत्र में स्पष्ट लिखा था कि इन स्कूलों की इमारत की मरम्मत नहीं की जा सकती है. जनहानि को देखते हुए उपरोक्त संरचना तकनीकी रूप से असुरक्षित है. इस स्कूल में 18 स्टूडेंट्स का नामांकन है, 21 अगस्त को हुए विवाद के दौरान एक ग्रामीण व्यक्ति ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा था कि यह सभी बच्चे बेहद सामान्य परिवारों से हैं. इसलिए यह स्कूल ग्रामीणों और प्रशासन की प्राथमिकता में नहीं हैं. स्कूल में दो महिला शिक्षक कार्यरत हैं. स्कूल की जर्जर इमारत की जगह नए निर्माण कार्य की जिम्मेदारी स्थानीय पंचायत समिति सांगानेर को सौंपी गई है. पंचायत समिति कार्यालय में विकास अधिकारी ज्योति प्रजापति बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहती हैं, "हमने 24 अगस्त को स्कूल बिल्डिंग निर्माण के लिए टेंडर मंगाए और 31 अगस्त को संबंधित फर्म को स्कूल निर्माण के लिए वर्क ऑर्डर भी जारी कर दिया था. स्कूल की जर्जर इमारत को तोड़ा नहीं गया था, जिसके कारण एक सितंबर को संबंधित फर्म निर्माण कार्य शुरू नहीं कर सकी है. जर्जर इमारत को जमींदोज़ (पूरी तरह ढहाने) करने का काम शिक्षा विभाग को करना था." विकास अधिकारी कहती हैं, "इस संबंध में हमने पत्र लिख कर शिक्षा विभाग के मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (सीबीईओ) समग्र शिक्षा अभियान ,सांगानेर को सूचित किया था." विकास अधिकारी ने शिक्षा विभाग के सीबीईओ को पत्र में लिखा कि निर्माण स्थल पर पूर्व निर्मित जर्जर भवन को जमींदोज़ करने की प्रक्रिया बताई जाए, ताकि भवन बनाने का काम शुरू हो सके. सीबीईओ सीताराम गुप्ता बीबीसी से कहते हैं, "हमें पत्र मिला है. हमारे समग्र शिक्षा में निर्माण का टेंडर लेने वाली फर्म ही पहले से बनी इमारत को तोड़ कर नए निर्माण कार्य को शुरू कर देती है. लेकिन, अब पंचायत समिति और शिक्षा विभाग अलग हो गए हैं, इसलिए जर्जर इमारत को तोड़ने का काम हम कराएंगे." वह कहते हैं, "स्कूल की प्रधानाचार्य से बात हो गई है और उन्होंने जेसीबी वालों से बात कर ली है. 2 सितंबर को जर्जर इमारत को जमींदोज़ कर दिया जाएगा. पंचायत समिति चाहे तो कल से ही निर्माण कार्य को शुरू करवा सकती है." सीबीईओ सीताराम गुप्ता कहते हैं, "इसको जमींदोज़ करने के लिए हमें कोई अलग से बजट नहीं मिलता है. जमींदोज करने में जो भी ख़र्च आएगा वह स्थानीय स्कूल के शिक्षकों के व्यक्तिगत खर्चे पर ही होगा." शिक्षा संकुल में शिक्षा विभाग के ही एक अधिकारी नाम नहीं छापने की शर्त पर बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहते हैं कि जर्जर इमारत के कमरों में स्कूल का बहुत सा सामान रखा हुआ है. ज़मींदोज की कार्रवाई से पहले उस सामान को कहां शिफ्ट करेंगे, यह भी सवाल है. रामपुरा कंवरपुरा गांव, बगरू विधानसभा क्षेत्र में आता है. यहां से सत्ताधारी दल बीजेपी के विधायक कैलाश वर्मा हैं. हमने उनसे फ़ोन पर इस बारे में बात की. वो स्कूल निर्माण में आ रही इस परेशानी के सवाल पर कहते हैं कि अगर डॉक्यूमेंट्स में परेशानी की वजह से स्कूल निर्माण में विलंब हो रहा है तो वो उसे दूर करेंगे. मुख्यमंत्री के कहने के बावजूद समय पर स्कूल निर्माण कार्य शुरू नहीं होने पर बगरू से कांग्रेस की पूर्व विधायक गंगा देवी बीबीसी से बातचीत में कहती हैं कि प्रधानमंत्री भी सिर्फ़ घोषणाएं करते हैं और भजनलाल भी घोषणाएं ही करते हैं. बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित. 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स्रोत: BBC Hindi

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