'ग्रोथ मजबूत तो जॉब्स क्यों नहीं बढ़ रही', GDP पर रघुराम राजन ने किए सवाल
भारत के पूर्व आरबीआई गवर्नर रहे, रघुराम राजन ने हालिया जीडीपी आंकड़े पर साफ किया है कि उन्होंने इससे जुड़ा कोई सवाल नहीं उठाया है. न ही इन आंकड़ों का समर्थन किया है. इसके अलावा उन्होंने इस मामले पर और कुछ भी कहने से मना कर दिया है. राजन ने कहा, 'हालिया जीडीपी आंकड़ों पर न तो कोई सवाल उठाया है. न ही उनका समर्थन किया है. इस मामले पर उन्हें और कुछ नहीं कहना है.' इसके अलावा उन्होंने कहा कि इकोनॉमी ग्रोथ की चाल को लेकर हैरान हैं. साथ ही सोचते हैं कि मजबूत जीडीपी ग्रोथ के बावजूद ज्यादा प्राइवेट इन्वेस्टमेंट, FDI और बेहतर नौकरियों में क्यों इजाफा नहीं हुआ है? यह बातें पूर्व आरबीआई गवर्नर ने प्रोफेशनल साइट लिंक्डइन पोस्ट में कही है. इसके अलावा उन्होंने कहा, 'यह हर एक आंकड़े पर सवाल उठाने से अलग हैं. मैं यह उन लोगों पर छोड़ता हूं, जो जीडीपी की गणना में मुझसे ज्यादा माहिर हैं.' GDP को लेकर क्या है पूरा विवाद? दरअसल, जीडीपी के आंकड़ों के विवाद को देखें तो MoSPI (भारत का सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय) की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत की वास्तविक जीडीपी फाइनेंशियल ईयर 2027 के पहले क्वार्टर में साल दर साल 7.8 प्रतिशत की उछाल देखी गई है. ऐसे में बेस ईयर में बदलाव को लेकर चिंताओं के बीच जीडीपी आंकड़ों की जांच पड़ताल हो रही है. इस मामले में वित्त मंत्रालय के पूर्व शीर्ष अधिकारी सुभाष चंद्र गर्ग ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि ग्रोथ के आंकड़े बढ़ा चढ़ा के दिखाए गए, क्योंकि सरकार ने तुलना के आधार पर पिछले साल की अवधि के लिए जीडीपी के अपने माप को कम कर दिया था. इधर, कुछ प्राइवेट इकोनॉमिस्ट ने भी सवाल उठाते हुए कहा हैकि क्या डिफ्लेटर जो ऐसी वैल्यू है, जिसका कैलकुलेशन नॉमिनल जीडीपी से महंगाई को हटाकर वास्तविक ग्रोथ रेट दिखाने के लिए की जाती है, अन्य प्राइज इंडिकेटर की तुलना में महंगाई को कम करके दिखाता है. सरकार ने पूरे विवाद क्या सफाई दी? इधर सरकार की तरफ से कहा गया है कि फरवरी में लागू किया गया नया तरीका विचार विमर्श का नतीजा था. सरकार का कहना है कि इस बदलाव का मकसद आर्थिक स्थितियों को ज्यादा सही ढंग से दिखाना था. इसके तहत नई डेटा सीरीज अपनाई गई. इससे अप्रैल-जून 2025 के लिए जीडीपी की नॉमिनल वैल्यू पुरानी जीडीपी सीरीज के 86.05 ट्रिलियन रुपये से घटकर 80 ट्रिलियन रुपये हो गई. नवंबर 2025 एबीपी न्यूज नेटवर्क में बतौर कंसल्टेंट अपनी भूमिका निभा रहा हूं. मीडिया का अनुभव करीबन साढ़े 8 साल का है. देश के अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दे चुका हूं. पिछले कुछ सालों में बतौर मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर, कंटेंट एडिटर, सब एडिटर और रिजनल टीवी चैनल में प्रोग्राम एग्जीक्यूटिव के तौर पर अपनी सेवाएं दी हैं. लेखन, ग्राफिक्स और वीडियो प्रोडक्शन की बारीक समझ है. नेशनल-इंटरनेशनल डेस्क की भी जिम्मेदारी संभाल चुका हैं. मजा ग्राउंड या एक्सक्लूसिव रिपोर्ट कवर करने में आता है. साल 2016 में माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी भोपाल से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया और पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखा. साहित्य पढ़ना, फिल्में देखना, कहानियां-कविताएं लिखना और घूमना विशेष रुचियों में दर्ज है.
स्रोत: ABP Hindi