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नंदीग्राम उपचुनाव: कांग्रेस उम्मीदवार की गिरफ़्तारी पर क्या बोलीं सायोनी घोष

✍️ Admin 📅 19 September, 2026 ⏰ 09:04 AM 👁 68 views

इमेज स्रोत, Jim WATSON / AFP via Getty Images अमेरिका और डेनमार्क के बीच हुए ग्रीनलैंड की सुरक्षा को लेकर एक अहम समझौता हुआ है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ग्रीनलैंड की सुरक्षा और उसकी दूसरी सभी ज़रूरतों पर हमेशा के लिए अमेरिका का पूरा कंट्रोल होगा. वहीं, डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने समझौते की पुष्टि की. उन्होंने कहा कि अगले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान औपचारिक रूप से इस पर हस्ताक्षर कर दिए जाएंगे. ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, "मुझे यह बताते हुए ख़ुशी हो रही है कि अमेरिका ने डेनमार्क और ग्रीनलैंड के साथ एक समझौता किया है. इस समझौते के तहत ग्रीनलैंड की सुरक्षा और उसकी दूसरी सभी ज़रूरतों पर अमेरिका का हमेशा के लिए पूरा नियंत्रण होगा. इससे अमेरिका की ग्रीनलैंड को लेकर सभी चिंताएं पूरी तरह दूर हो जाएंगी. इसके लिए अमेरिका को कोई ख़र्च नहीं करना होगा." उन्होंने लिखा, "अब से अमेरिका की लिखित मंज़ूरी के बिना उसका कोई भी दुश्मन ग्रीनलैंड में अपना ठिकाना नहीं बना सकेगा, वहां अपनी सेना नहीं रख सकेगा और न ही ग्रीनलैंड में सेंसिटिव इन्वेस्टमेंट कर सकेगा." ट्रंप ने आगे लिखा, "यह एक अनंत समझौता है, यानी इसका कभी अंत नहीं होगा. आज जो कुछ हुआ है, उसे लेकर हम बहुत सम्मानित और गर्व महसूस कर रहे हैं. आज हुए सभी समझौतों को अमेरिकी लोग हमेशा याद रखेंगे." दरअसल, ट्रंप पिछले कई महीनों से ग्रीनलैंड को अमेरिकी नियंत्रण में लेने की बात कहते रहे हैं. उन्होंने इसके पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा, ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति और वहां मौजूद खनिज संसाधनों को प्रमुख कारण बताया था. ट्रंप ने पहले ग्रीनलैंड पर क़ब्ज़े के लिए सैन्य बल के इस्तेमाल की संभावना से भी इनकार नहीं किया था. डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने कहा, "यह समझौता आर्कटिक और उत्तरी अटलांटिक क्षेत्र में अमेरिका और डेनमार्क की साझा सुरक्षा को मज़बूत करता है." हालांकि, उन्होंने समझौते में ट्रंप की ओर से सोशल मीडिया पोस्ट में बताए गए विशेष प्रावधानों पर विस्तार से जानकारी नहीं दी. संबंधित स्टोरी: ग्रीनलैंड पर ट्रंप क्यों चाहते हैं क़ब्ज़ा, अमेरिका के लिए क्यों है अहम पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को शुक्रवार को पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया. इस मामले पर नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ़ इंडिया (एनसीपीआई) की सांसद सायोनी घोष की प्रतिक्रिया आई है. ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) छोड़कर एनसीपीआई में आईं सायोनी घोष ने कहा, "कांग्रेस नेता जो उम्मीदवार बने हैं... जहां तक मुझे कल तक पता था, उनके ख़िलाफ़ कुछ मामले लंबित थे. यह दो पार्टियों के बीच का मामला है, कोई भी चुनाव आयोग या अदालत का रुख कर सकता है. चाहे वह कांग्रेस हो या तृणमूल कांग्रेस हो या बीजेपी... हर किसी को अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने की आज़ादी है." उन्होंने कहा, "मैं उम्मीद करूंगी कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस, टीएमसी के साथ आए. अगर ऐसा होता है, तो एक मज़बूत संदेश देगा कि यह गठबंधन असली है, सिर्फ़ नाम भर का गठबंधन नहीं है." दरअसल, इससे पहले ममता बनर्जी की पार्टी की उम्मीदवार ने अपना नामांकन वापस ले लिया था. फिर ममता बनर्जी ने कांग्रेस को समर्थन देने का एलान किया था. वहीं, राहुल गांधी ने मिलन प्रधान की गिरफ़्तारी पर कहा कि यह 'कोई संयोग नहीं, राजनीतिक प्रतिशोध' है. उन्होंने इसे 'लोकतंत्र की हत्या' बताया. दूसरी ओर पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी का कहना है कि राहुल गांधी को मामले की सही जानकारी नहीं दी गई थी. उन्होंने एक्स पर लिखा, "डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस ने मिलन प्रधान के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराई है, जिनके ख़िलाफ़ हत्या के तीन मामले लंबित हैं. चुनाव के दौरान वारंट पर कार्रवाई करना ज़रूरी है. प्रदेश कांग्रेस के नेतृत्व ने शायद राहुल गांधी को सही जानकारी नहीं दी है." गौरतलब है कि नंदीग्राम सीट मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने खाली की थी, इस पर 6 अक्तूबर को चुनाव होगा, रिज़ल्ट 9 अक्तूबर को आएगा. तमिलनाडु सरकार ने नवजातों के लिए 'थाईमामन थंगा मोथिरा थिट्टम' (मामा की सोने की अंगूठी योजना) शुरू करने की तारीख़ का एलान कर दिया है. मुख्यमंत्री सी जोसेफ़ विजय 28 सितंबर 2026 को इस योजना की शुरुआत करेंगे. योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले बच्चों को एक ग्राम सोने की अंगूठी दी जाएगी. न्यूज़ एजेंसी पीटीआई ने सरकार के हवाले से बताया, योजना के पहले चरण में वितरण के लिए 1.28 लाख सोने की अंगूठियां ख़रीदी गई हैं. प्रत्येक अंगूठी पर सीरियल नंबर होगा. योजना का लाभ लेने के लिए नवजात की मां का तमिलनाडु की स्थायी निवासी होना ज़रूरी है. इसके अलावा, मां का पीआईसीएमई और आरसीएच पहचान पत्र के लिए पंजीकरण होना अनिवार्य है. पंजीकरण के बाद संबंधित पहचान पत्र जारी किया जाता है. सरकार ने बताया कि योजना के तहत 22 जून (मुख्यमंत्री का जन्मदिन) से 28 सितंबर तक सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले बच्चों को भी इसका लाभ दिया जाएगा. इसके लिए राज्यभर में 107 वितरण केंद्र बनाए गए हैं. इन केंद्रों पर हर रोज़ 100 बच्चों को सोने की अंगूठी देने की व्यवस्था की गई है. लाभार्थियों को अस्पताल से छुट्टी मिलने के समय ही सोने की अंगूठी उपलब्ध कराई जाएगी. सरकार के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ाने और सरकारी अस्पतालों में डिलीवरी कराने के लिए प्रोत्साहित करना है. यह योजना सत्तारूढ़ टीवीके के प्रमुख चुनावी वादों में शामिल रहा है. योजना को लागू करने के लिए 23 जून 2026 को सरकारी आदेश जारी किया गया था. योजना की लॉन्चिंग की तारीख को लेकर फ़ैसला मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में सचिवालय में हुई समीक्षा बैठक के बाद लिया गया. सरकार के आंकड़ों के अनुसार, तमिलनाडु में हर साल क़रीब 7.80 लाख बच्चों का जन्म होता है. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 के मुताबिक़, इनमें 99.9 प्रतिशत डिलीवरी अस्पतालों में होती हैं. इनमें क़रीब 4.20 लाख प्रसव सरकारी अस्पतालों में होते हैं, जो कुल डिलीवरी का लगभग 53 प्रतिशत है. इमेज स्रोत, Charles McQuillan/Getty Images अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को सीएनएन, एमएस नाऊ और पॉलिटिको को व्हाइट हाउस से 'बैन' करने का एलान किया है. ट्रंप ने इन मीडिया संस्थानों पर 'मनगढ़ंत ख़बरें' और 'झूठ' लिखने या रिपोर्ट करने का आरोप लगाया. हालांकि, उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में किसी विशेष ख़बर या रिपोर्ट का हवाला नहीं दिया. ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, "मुझे यह एलान करते हुए गर्व हो रहा है कि तुरंत प्रभाव से मैं फ़ेक न्यूज़ सीएनएन, एमएस नाऊ (जिसने हाल ही में दर्शकों की कमी और भरोसे की कमी के कारण अपना नाम एमएसएनबीसी से बदलकर एमएस नाऊ कर लिया है) और पॉलिटिको (जिसे बेईमान जो बाइडन के शासन में अमेरिकी सरकार से सीधे 8 मिलियन डॉलर का ग़लत और हास्यास्पद सब्सक्रिप्शन मिला था. यह अब तक की सबसे बड़ी रक़म है, ताकि उन्हें 'ज़िंदा' रखा जा सके. मुझे यह भ्रष्टाचार जैसा लगता है) को व्हाइट हाउस से प्रतिबंधित कर रहा हूं, क्योंकि वे लगातार 'फ़ेक न्यूज़' प्रकाशित कर रहे हैं!" उन्होंने लिखा, "मीडिया संस्थानों को अमेरिका के राष्ट्रपति, ट्रंप प्रशासन या अमेरिका के बारे में ख़बर देते समय लगातार मनगढ़ंत बातें और झूठ लिखने या बताने की इजाज़त नहीं होनी चाहिए. दूसरे फ़ेक न्यूज़ मीडिया संस्थानों पर भी कार्रवाई होगी." सीएनएन ने ट्रंप के इस क़दम को अमेरिकी प्रेस की स्वतंत्रता पर 'ग़ैरकानूनी हमला' बताया. नेटवर्क ने कहा कि वह व्हाइट हाउस में तैनात अपनी टीम और उसकी 'निष्पक्ष और सटीक रिपोर्टिंग' के साथ पूरी तरह खड़ा है. सीएनएन ने अपने बयान में कहा, "अमेरिकी संविधान के तहत हमें सरकार या राष्ट्रपति के हस्तक्षेप के बग़ैर प्रशासन से जुड़ी ख़बरें कवर करने का यदि ट्रंप का घोषित प्रतिबंध लागू होता है, तो वह इस संवैधानिक अधिकार पर ग़ैरकानूनी हमला होगा." पॉलिटिको ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह व्हाइट हाउस प्रशासन की 'निष्पक्ष रिपोर्टिंग' जारी रखेगा. संस्थान ने कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता को सीमित करने की किसी भी कोशिश का मज़बूती से विरोध करेगा. वहीं, एमएस नाऊ ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. इमेज स्रोत, Jim Lo Scalzo/EPA/Bloomberg via Getty Images अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को रूस पर प्रतिबंधों से जुड़े बिल पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. नए क़ानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से तेल और प्राकृतिक गैस ख़रीदने वाले पांच सबसे बड़े ख़रीदार देशों पर 100% तक टैरिफ़ लगाने का अधिकार मिल गया है. इनमें रूस के प्रमुख ऊर्जा ख़रीदार भारत और चीन भी शामिल हैं. हालांकि, बिल अपने आप भारत या चीन पर 100% टैरिफ़ लागू नहीं करता, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति को ऐसा करने का अधिकार देता है. अमेरिकी संसद (यूएस कांग्रेस) से ये बिल पहले ही पास हो चुका है. बिल का आधिकारिक नाम "लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026" है. यह बिल दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर रखा गया है. ग्राहम की 11 जुलाई 2026 को मृत्यु हो गई थी और वे यूक्रेन के समर्थक और रूस पर कड़े प्रतिबंधों के पक्षधर थे. 48 पन्नों वाले इस बिल में उन देशों के लिए छूट है जो रूस से अपनी ज़रूरत की 15% से कम प्राकृतिक गैस आयात करते हैं और रूस पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए काम कर रहे हैं. इसके अलावा, बिल में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, रूसी सरकार के बड़े अधिकारियों, बैंकों और दूसरी वित्तीय संस्थाओं के ख़िलाफ़ भी प्रतिबंध शामिल हैं. रूस के उन जहाज़ों के बेड़े पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं, जिनका इस्तेमाल पहले से लगे प्रतिबंधों से बचने के लिए किया जाता है. संबंधित स्टोरी: अमेरिका में रूस पर प्रतिबंध लगाने वाला बिल पास, 100% तक टैरिफ़ का प्रावधान, भारत ने दिया ये जवाब बीबीसी हिन्दी के लाइव पेज पर आपका स्वागत है. मैं बीबीसी संवाददाता रौनक भैड़ा अब से दोपहर दो बजे तक आप तक अहम ख़बरें पहुंचाऊंगा. कल के लाइव पेज की ख़बरें पढ़ने के लिए आप यहां क्लिक करें. - बाब अल-मंदेब: हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की इस कमज़ोरी का फ़ायदा उठाया - क्या शॉपिंग की रसीदें फ़र्टिलिटी पर असर डालती हैं? - टाटा का विशाल कारोबार क्या परिवार के हाथ से निकल जाएगा, जानिए क्या है विवाद - निठारी हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट से बरी सुरिंदर कोली हरिद्वार में मृत पाए गए

स्रोत: BBC Hindi

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