इमेज स्रोत, ALAIN JOCARD/AFP via Getty Images भारत की स्टार शूटर मनु भाकर ने एशियन गेम्स 2026 में महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा के फ़ाइनल में जगह बना ली है. क्वालिफ़िकेशन राउंड में मनु ने 579 अंकों के साथ तीसरा स्थान हासिल किया. वहीं, इसी स्पर्धा के टीम इवेंट में भारतीय टीम मामूली अंतर से मेडल जीतने से चूक गई. टीम इवेंट में मनु भाकर के अलावा ईशा सिंह और सुरुचि इंदर सिंह ने भारत का प्रतिनिधित्व किया. क्वालिफ़िकेशन राउंड में मनु के अलावा कोई अन्य भारतीय निशानेबाज़ टॉप-8 में जगह नहीं बना सकी. ईशा सिंह 572 अंकों के साथ 15वें स्थान पर रहीं, जबकि सुरुचि इंदर सिंह ने 568 अंक हासिल कर 26वां स्थान प्राप्त किया. मनु के फ़ाइनल में पहुंचने के साथ अब भारत की नज़र 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में उनके पदक पर होगी. इमेज स्रोत, Kabir Jhangiani/NurPhoto via Getty Images विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि पाकिस्तान को सीमा पार 'आतंकवाद के ख़िलाफ़' विश्वसनीय कार्रवाई करनी होगी, तभी दुनिया को उसके बयानों पर भरोसा होगा. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को वीकली प्रेस ब्रीफ़िंग के दौरान यह टिप्पणी की. दरअसल, उनसे पाकिस्तान के आर्मी चीफ़ आसिम मुनीर के उस बयान पर प्रतिक्रिया मांगी थी, जिसमें उन्होंने देश में बढ़ते उग्रवाद के ख़तरे के बीच 'आतंकवाद को हराने' के लिए सशस्त्र बलों के मजबूत संकल्प की बात कही थी. इस पर जायसवाल ने कहा, “पाकिस्तान को कार्रवाई करने और मज़बूत प्रतिबद्धता दिखाने की ज़रूरत है. उसे सीमा पार आतंकवाद के ख़िलाफ़ विश्वसनीय कार्रवाई करनी होगी, तभी दुनिया को भरोसा होगा कि वह वही करेगा, जो वह कहता है.” वहीं, हाल ही में पाकिस्तान ने परमानेंट कोर्ट ऑफ़ आर्बिट्रेशन के फ़ैसलों को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष को पत्र भेजा था. इस पर भारत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. यह सिंधु जल संधि से जुड़ा फ़ैसला था. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान पर तथ्यों को ग़लत तरीक़े से पेश करने और झूठे दावे फैलाने का आरोप लगाया. रणधीर जायसवाल ने कहा कि जिसे पाकिस्तान पपरमानेंट कोर्ट ऑफ़ आर्बिट्रेशन का फ़ैसला बताया जा रहा है, वह वास्तव में उस कोर्ट का फ़ैसला नहीं है. यह एक अवैध रूप से गठित अदालत का फ़ैसला है. संबंधित स्टोरी: सिंधु जल संधि पर परमानेंट कोर्ट ऑफ़ आर्बिट्रेशन का पाकिस्तान के पक्ष में फ़ैसला, भारत पर क्या असर? इमेज स्रोत, ANGELA WEISS / AFP via Getty Images तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने न्यूयॉर्क में आयोजित संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए 'कश्मीर' का ज़िक्र किया. वर्ल्ड लीडर्स के सामने अपने संबोधन में उन्होंने दक्षिण एशिया में शांति के लिए कश्मीर विवाद को बातचीत के ज़रिए सुलझाने की वकालत की. अर्दोआन ने कहा, "दक्षिण एशिया में स्थिरता के लिए यह आवश्यक है कि कश्मीर मुद्दे सहित सभी विवादों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और उससे जुड़े प्रासंगिक प्रस्तावों के दायरे में संवाद (डायलॉग) के माध्यम से हल किया जाए." इस पर अभी तक भारत की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. हालांकि, भारतीय विदेश मंत्रालय इससे पहले तुर्की के ऐसे बयानों को पूरी तरह ख़ारिज कर चुका है. गौरतलब है कि तुर्की पहले भी 'कश्मीर' मुद्दे को वैश्विक मंचों पर उठाता रहा है और पाकिस्तान की सराहना करता रहा है. संबंधित कहानी: तुर्की कश्मीर पर पाकिस्तान के साथ क्यों है? इमेज स्रोत, Toby Melville - WPA Pool/Getty Images अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि मंगलवार को अमेरिका और ईरान के नेताओं के बीच करीब तीन घंटे तक बैठक हुई. बैठक में अमेरिका की ओर से विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ और जेरेड कुशनर भी शामिल हुए. ट्रंप ने बैठक को लेकर कहा, “यह बहुत अच्छी और उपयोगी बैठक थी. अब देखते हैं कि आगे क्या होता है.” हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि बैठक में ईरान की ओर से कौन-कौन से नेता शामिल हुए थे. बैठक में शामिल रहे स्टीव विटकॉफ़ ने भी कहा कि वह “फ़िलहाल बहुत अच्छा महसूस कर रहे हैं.” लेकिन उन्होंने बैठक को लेकर कोई जानकारी साझा नहीं की. इससे पहले ट्रंप ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान के साथ मुलाक़ात की संभावना को लेकर कहा था कि वह शायद ऐसा कर सकते हैं. हालांकि, दोनों पक्षों की ओर से ऐसी किसी मुलाक़ात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. इसी इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 'तबाह' करने की धमकी भी दी थी. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की महासभा में कहा अमेरिका के पास दो रास्ते हैं- ईरान के साथ समझौता करना या उसे खत्म कर देना. इधर, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठकों में हिस्सा लेने के लिए तेहरान से न्यूयॉर्क रवाना हो गए हैं. रवाना होने से पहले पत्रकारों से बातचीत में पेज़ेशकियान ने कहा, "संयुक्त राष्ट्र की बैठक उन्हें ईरान के रुख़ का मजबूती से बचाव करने का अवसर देगी." इमेज स्रोत, Mehmet Eser/Anadolu via Getty Images फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ग़ज़ा पट्टी में शांति कायम होने से जुड़े अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे पर सवाल उठाए हैं. संयुक्त राष्ट्र महासभा के वार्षिक सत्र में मैक्रों ने कहा कि शांति की घोषणा के बावजूद ग़ज़ा में अभी तक कोई मानवीय गलियारा (ह्यूमैनिटेरियन कॉरिडोर) दोबारा नहीं खोला गया है. मैक्रों ने ग़ज़ा की स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा, "दुनिया के सामने ऐसा दृश्य है, जिस पर सभी को शर्म आनी चाहिए." मैक्रों ने ट्रंप के ग़ज़ा शांति योजना को कूटनीतिक उपलब्धि के तौर पर पेश किए जाने की आलोचना की. मैक्रों ने कहा, "अगर हम ग़ज़ा को लेकर लगातार संतुष्ट बने रहते हैं, तो हमारी विश्वसनीयता क्या रह जाएगी? कुछ लोग कथित शांति का बखान कर रहे हैं. लेकिन इस शांति ने मानवीय उद्देश्यों के लिए एक सेकंड के लिए भी पहुँच सुनिश्चित नहीं की है. क्या हम चुपचाप खड़े रहकर ऐसे दृश्य को देखते रहेंगे, जिस पर हम सभी को शर्म आनी चाहिए?" गौरतलब है कि इमैनुएल मैक्रों ने यह भी कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच जल्द से जल्द सार्थक बातचीत शुरू कराने के लिए फ्रांस हर संभव प्रयास करेगा. बीबीसी हिन्दी के लाइव पेज पर आपका स्वागत है. मैं बीबीसी संवाददाता रौनक भैड़ा अब से दोपहर दो बजे तक आप तक अहम ख़बरें पहुंचाऊंगा. कल के लाइव पेज की ख़बरें पढ़ने के लिए आप यहां क्लिक करें. 'लतीफ़ को मत भूलना': क्या बीजेपी ने सालों तक गुजरात में एक गैंगस्टर का सियासी फ़ायदा उठाया? 'ग्लास स्किन' क्या हक़ीक़त है? त्वचा के लिए पांच ज़रूरी सुझाव जमुई यौन हिंसा जैसा वीडियो अगर सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं तो हो जाएं सावधान डूसू चुनाव में एनएसयूआई की हार पर कन्हैया कुमार बनाम राष्ट्रीय अध्यक्ष की चर्चा क्यों?
स्रोत: BBC Hindi