पाकिस्तान और अफ़ग़ान तालिबान के बीच शुक्रवार को भी संघर्ष जारी रहा. इस हमले को लेकर दोनों पक्ष अपने-अपने दावे कर रहे हैं और इसके रुकने के संकेत नहीं मिल रहे हैं. पाकिस्तान के ख़ैबर पख़्तूनख़्वा प्रांत में पुलिस का कहना है कि शुक्रवार रात को "आतंकवादियों ने पेशावर समेत प्रांत भर के विभिन्न पुलिस स्टेशनों और चौकियों पर हमला किया, जिसमें एक हेड कांस्टेबल और एक नागरिक घायल" हो गए. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है, "अमेरिका पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच चल रहे संघर्ष में हस्तक्षेप कर सकता है, लेकिन पाकिस्तान के साथ मेरी अच्छी दोस्ती है." ट्रंप ने व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए यह बयान दिया. बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें एक पत्रकार ने ट्रंप से पूछा, "पाकिस्तान ने अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ युद्ध शुरू कर दिया है. क्या उन्होंने आपसे हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है?" इस पर ट्रंप की प्रतिक्रिया यह थी कि वह लड़ाई में हस्तक्षेप कर सकते हैं. हालांकि, उन्होंने कहा, "आपको यह पता होना चाहिए कि पाकिस्तान के साथ मेरी अच्छी दोस्ती है. उनके प्रधानमंत्री महान हैं, उनके पास एक महान सेनापति है, उनके पास एक महान नेता है." "ये दो ऐसे व्यक्ति हैं जिनका मैं वास्तव में बहुत सम्मान करता हूं." उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अच्छा काम कर रहा है. वहीं अमेरिकी विदेश विभाग में राजनीतिक मामलों की अंडर सेक्रेटरी एलिसन हूकर का कहना है कि "अमेरिका तालिबान हमलों के ख़िलाफ़ आत्मरक्षा करने के पाकिस्तान के अधिकार का समर्थन करता है." उन्होंने कहा, "हम स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं और तालिबान हमलों के ख़िलाफ़ आत्मरक्षा करने के पाकिस्तान के अधिकार का समर्थन करते हैं." मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ. पाकिस्तान के ख़ैबर पख़्तूनख्वा प्रांत में पुलिस का कहना है कि शुक्रवार रात को "आतंकवादियों ने पेशावर समेत प्रांत भर के विभिन्न पुलिस स्टेशनों और चौकियों पर हमला किया, जिसमें एक हेड कांस्टेबल और एक नागरिक घायल हो गए." एक बयान में, पुलिस प्रवक्ता ने कहा कि शुक्रवार और शनिवार की दरमियानी रात को, "पेशावर के बदबेर इलाक़े में एक पुलिस स्टेशन पर हथगोला फेंका गया, जिसमें स्टेशन पर तैनात हेड कांस्टेबल घायल हो गए. इसी बीच, मतनी पुलिस स्टेशन की सीमा के भीतर हथगोले के हमले में एक नागरिक घायल हो गया." उनके मुताबिक़, "आतंकवादियों ने ख़ैबर और मतनी के विभिन्न क्षेत्रों में पुलिस प्रतिष्ठानों पर ग्रेनेड और छोटे हथियारों से हमला किया. वहीं, आतंकवादियों ने बन्नू के मंदान पुलिस स्टेशन की सीमा में स्थित पीपी कंगार पुल पर विभिन्न दिशाओं से स्नाइपर राइफ़लों का इस्तेमाल करते हुए हमला किया." इसमें आगे कहा गया है कि डोमेल पुलिस स्टेशन की काशू पुल चौकी पर भी हमला किया गया, जहां पुलिस ने 'जवाबी कार्रवाई' की और गोलीबारी '15 मिनट तक जारी रही.' पुलिस का कहना है कि "ख़ैबर ज़िले के बारा इलाक़े में स्थित तकिया पुलिस चौकी पर अज्ञात बदमाशों ने हथगोला फेंका, जिससे कोई हताहत नहीं हुआ." ख़ैबर पख़्तूनख़्वा पुलिस का कहना है कि इन सभी हमलों को नाकाम कर दिया गया है और "आतंकवादियों के ख़िलाफ़ जवाबी कार्रवाई की गई है." ख़ैबर पख़्तूनख़्वा के इंस्पेक्टर जनरल ज़ुल्फिकार हमीद ने कहा, "ये बदमाश सिर्फ झाड़ियों के पीछे से हमला करना जानते हैं और इनमें आगे आकर लड़ने का साहस नहीं है. पुलिस की ओर से सख़्त कार्रवाई होते ही ये कायरों की तरह मैदान छोड़कर भाग जाते हैं." अफ़गान तालिबान सरकार के एक अधिकारी का कहना है कि शुक्रवार रात को पाकिस्तान पर हमले फिर से शुरू हो गए हैं. दक्षिण-पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की 203वीं मंसूरी कमान के प्रवक्ता अब्दुल हक़ फ़िदा ने बीबीसी को बताया कि "रमज़ान की छुट्टी के बाद खोस्त और टैंक में अभियान फिर से शुरू हो गए हैं और लड़ाई जारी है." पाकिस्तानी अधिकारियों ने अभी तक इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है. तालिबान सरकार ने सीमा पार पाकिस्तानी चौकियों पर हमलों में 55 पाकिस्तानी सैनिकों की मौत का दावा किया था. बीबीसी संवाददाता अज़ीज़ुल्लाह ख़ान के मुताबिक़, शुक्रवार रात तोरखम सीमा पर भारी गोलीबारी की खबरें थीं. एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि अफ़ग़ान तालिबान ने तोरखम निर्यात टर्मिनल समेत कई स्थानों को मोर्टार के गोलों से निशाना बनाया. इस बीच पाकिस्तान ने अफ़ग़ानिस्तान में '29 स्थानों' पर हवाई हमले करने का दावा किया है. पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तारड़ ने दावा किया है कि 'इस अभियान के दौरान अब तक अफ़ग़ान तालिबान की 89 चौकियों को नष्ट कर दिया गया है, 18 चौकियों पर क़ब्ज़ा कर लिया गया है और 135 टैंक और सशस्त्र वाहनों को नष्ट कर दिया गया है.' पाकिस्तानी सूचना मंत्री का दावा है कि हमलों में अफ़गान तालिबान के 297 लोग मारे गए हैं और 450 घायल हुए हैं. हालाँकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी है. पाकिस्तान में प्रतिबंधित चरमपंथी समूह टीटीपी, जमात-उल-अहरार और इत्तेहाद-उल-मुजाहिदीन ने पाकिस्तान में हमले तेज़ करने की धमकी दी है. इन चरमपंथी समूहों से जुड़े संदेश सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे हैं, जिनमें वे पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच चल रही झड़पों का ज़िक्र करते हुए अपने लड़ाकों को पाकिस्तान में हमले तेज़ करने का निर्देश दे रहे हैं. अपने बयानों में इन समूहों ने अफ़ग़ानिस्तान के प्रति सहानुभूति भी व्यक्त की है. पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान ने अभी तक इन बयानों पर कोई टिप्पणी नहीं की है. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ के प्रवक्ता मुशर्रफ़ ज़ैदी का कहना है कि पाकिस्तान को अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ युद्ध घोषित करने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन सीमा पार अभियान तब तक जारी रहेंगे जब तक "अफ़गान तालिबान और आतंकवादी समूहों के बीच संबंध समाप्त नहीं हो जाता." अल जज़ीरा के साथ एक इंटरव्यू के दौरान, प्रधानमंत्री के प्रवक्ता से पूछा गया कि क्या पाकिस्तान ने अफ़ग़ानिस्तान पर युद्ध की घोषणा कर दी है? इससे पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ़ ने अफ़ग़ानिस्तान को "खुले युद्ध" की धमकी दी थी. इस संबंध में मुशर्रफ ज़ैदी ने कहा, "हमें युद्ध की घोषणा करने की ज़रूरत नहीं है. यह युद्ध नहीं है. युद्ध दो देशों के बीच होता है." जब मुशर्रफ ज़ैदी से पूछा गया कि पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच विश्वास कैसे बहाल किया जाएगा, तो उन्होंने कहा, "हम विश्वास नहीं बनाएंगे, बल्कि अपनी ज़मीन और लोगों की रक्षा के लिए आग की दीवार खड़ी करेंगे." उन्होंने कहा कि अफ़ग़ान तालिबान और भारत को विश्वास बहाल करने की ज़रूरत है. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के प्रवक्ता ने कहा कि तालिबान को दोहा समझौते की शर्तों का पालन करना होगा, जिसमें यह शर्त है कि उसके क्षेत्र का इस्तेमाल किसी भी देश के ख़िलाफ़ चरमपंथियों द्वारा नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि जब तक ऐसा नहीं होता है, तब तक पाकिस्तान की कार्रवाई जारी रहेगी. बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
स्रोत: BBC Hindi