इमेज स्रोत, John Phillips - ECB/ECB via Getty Images पाकिस्तानी स्पिनर अबरार अहमद को पुरुषों के 'द हंड्रेड' टूर्नामेंट के ऑक्शन में सनराइज़र्स लीड्स ने ख़रीदा है लेकिन उसके बाद से सोशल मीडिया पर भारतीय क्रिकेट फ़ैंस की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आ रही है. फ़ैंस टीम की ऑनर काव्या मारन को ट्रोल कर रहे हैं. ये टूर्नामेंट इंग्लैंड में आयोजित किया जाता है और इसमें भारतीय स्वामित्व वाली चार टीमें भी शामिल हैं. दरअसल फ़रवरी में ऐसी ख़बरें आ रही थीं कि 'द हंड्रेड' लीग की नीलामी में भारतीय स्वामित्व वाली ये चार टीमें पाकिस्तान के क्रिकेटरों को ख़रीदने पर विचार ही नहीं कर रही हैं. ऐसा मौजूदा भारत-पाकिस्तान तनाव के कारण हुआ. जिसके बाद इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड ने सभी आठों टीमों से अपील की थी कि वो खिलाड़ियों को ख़रीदते वक़्त किसी किस्म का भेदभाव ना बरतें. अबरार अहमद को सनराइज़र्स लीड्स के ख़रीदने के पीछे ईसीबी की इसी अपील को मुख्य वजह माना जा रहा है. सनराइजर्स ग्रुप के पास आईपीएल टीम सनराइजर्स हैदराबाद का मालिकाना हक है. इसके साथ ही 'द हंड्रेड' लीग में सनराइजर्स लीड्स टीम का स्वामित्व भी इसी ग्रुप के पास है. इमेज स्रोत, ADEL SENNA/AFP via Getty Images गुरुवार, 12 मार्च को हुई 'द हंड्रेड' की नीलामी में सनराइज़र्स लीड्स की मालकिन काव्या मारन और कोच डैनियल विटोरी ने अबरार अहमद के लिए बोली लगाई. सनराइज़र्स लीड्स ने अबरार अहमद को 190,000 पाउंड (लगभग 2.30 करोड़ रुपये) में खरीदा. इसके बाद भारतीय सोशल मीडिया पर काव्या मारन को काफ़ी ट्रोल किया जा रहा है. विवाद बढ़ने के बाद सनराइज़र्स लीड्स के एक्स हैंडल को भी सस्पेंड कर दिया गया है. अबरार के अलावा पाकिस्तानी तेज़ गेंदबाज़ हारिस राउफ ने भी 'द हंड्रेड' की नीलामी के लिए अपना नाम दिया था, लेकिन उन्हें किसी भी टीम ने नहीं खरीदा. दोनों देशों के बीच तनाव के कारण 2009 से पाकिस्तान के खिलाड़ी इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में नहीं खेले हैं. 'द स्किन डॉक्टर' नाम के एक एक्स यूज़र ने लिखा है कि भारतीय मालिकाना हक वाली फ़्रैंचाइज़ी ने अपनी विदेशी क्रिकेट लीग के लिए पाकिस्तानी खिलाड़ी अबरार अहमद को साइन किया है, जिसने खुले तौर पर भारत का मज़ाक उड़ाया है. वे भारत में पाकिस्तानियों को सिर्फ इसलिए नहीं लेते क्योंकि इसकी अनुमति नहीं है, जिस पल यह पाबंदी हटेगी, वे बिना एक पल गंवाए उन्हें ले लेंगे. कई यूज़र्स कह रहे हैं कि अबरार ने भारतीय सेना का अपमान किया था इन सब बातों के बावजूद काव्या मारन और सनराइजर्स ने उन्हें 'द हंड्रेड लीग' में खरीदा. फ़ैज़ फ़ज़ल नाम के एक यूज़र ने लिखा है कि सनराइज़र्स को शर्म आनी चाहिए कि उन्होंने एक पाकिस्तानी खिलाड़ी को खरीदा जो भारत को नीचा दिखाने के लिए अपने सोशल मीडिया पर युद्ध और चाय वाले इशारे करते हैं. आनंद कृष्णा नाम के एक यूज़र ने लिखा है कि काव्या मारन की ओर से अबरार अहमद को खरीदे जाने से ज़्यादा शर्मनाक कुछ और नहीं हो सकता. इमेज स्रोत, John Phillips - ECB/ECB via Getty Images सनराइज़र्स लीड्स के मुख्य कोच डेनियल वेट्टोरी ने बीबीसी स्पोर्ट से कहा, "अबरार की बॉलिंग में बहुत वेराइटी है और बहुत से घरेलू खिलाड़ियों ने उन्हें पहले नहीं देखा होगा." वेट्टोरी ने कहा कि पाकिस्तान खिलाड़ियों को लेकर चल रही अटकलों की उन्हें जानकारी थी, लेकिन उन्हें किसी भी खिलाड़ी को नीलामी में नज़रअंदाज़ करने का कोई निर्देश नहीं मिला था. उन्होंने कहा, "हम ऑक्शन में हर उपलब्ध खिलाड़ी को ध्यान में रखकर आए थे. अंतरराष्ट्रीय टीमों के कई अच्छे स्पिनर विकल्प थे, लेकिन अबरार हमारी प्राथमिकता थे." मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ. 21 फ़रवरी को ऐसी ख़बरें सामने आई थी कि 'द हंड्रेड' लीग की नीलामी में भारतीय स्वामित्व वाली टीमें पाकिस्तान के क्रिकेटरों को नहीं ख़रीदने पर विचार कर रही हैं. इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड के मुख्य कार्यकारी रिचर्ड गूल्ड ने पिछले साल कहा था कि वह 'द हंड्रेड' में "सभी देशों के खिलाड़ियों के चयन" की अपेक्षा करते हैं और उन्होंने "भेदभाव-विरोधी नीतियों" के लागू होने की बात कही थी. ईसीबी के प्रवक्ता ने कहा था, "द हंड्रेड दुनिया भर के पुरुष और महिला खिलाड़ियों का स्वागत करता है और हम अपेक्षा करते हैं कि आठों टीमें इसका ख़्याल करें.'' नीलामी में भारतीय स्वामित्व वाली टीमों के पाकिस्तान के क्रिकेटरों को नहीं खरीदने से जुड़ी रिपोर्ट्स पर पूर्व क्रिकेटर माइकल वॉन ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड से इस मामले पर एक्शन लेने की अपील की थी. उन्होंने कहा कि ऐसा कुछ भी होने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए. माइकल वॉन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "एक ऐसा खेल जो देश के सभी लोगों को एकजुट करता है, उसमें इस तरह की चीजों की अनुमति नहीं दी जा सकती." बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
स्रोत: BBC Hindi