इमेज स्रोत, Morteza Nikoubazl/NurPhoto via Getty Images ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा ख़ामेनेई की ओर से एक और लिखित बयान जारी हुआ है. इसमें उन्होंने ईरान आवाम से 'आर्थिक मुक़ाबला' करने की अपील की है. बयान में मोजतबा ख़ामेनेई ने कहा, "ईरान ने सैन्य टकराव में दुनिया को अपनी ख़ास ताक़त दिखाई, अब उसे आर्थिक और सांस्कृतिक मोर्चे पर भी दुश्मनों को हराना होगा." उन्होंने कहा, "कामगारों का समर्थन करना चाहिए और स्थानीय उत्पादों के इस्तेमाल को प्राथमिकता देनी चाहिए." ख़ामेनेई ने कारोबारियों से अपील की, "कारोबार करने वाले लोग, ख़ासकर जो मुश्किल में हैं, कोशिश करें कि अपने कर्मचारियों को नौकरी से न निकालें." सुप्रीम लीडर बनने के बाद मोज़तबा ख़ामेनेई कभी कैमरे के सामने नहीं आए हैं और न ही उन्होंने ईरान को संबोधित किया है. हालांकि, कई मौक़ों पर उनके लिखित बयान ज़रूर जारी होते हैं, जो ईरानी सरकारी मीडिया पर चलाए जाते हैं. संबंधित कहानी: ईरान के सुप्रीम लीडर का नज़र न आना और मज़बूत होती आईआरजीसी का क्या है मतलब अमेरिकी रक्षा विभाग ने जर्मनी से 5,000 सैनिकों को हटाने का फ़ैसला किया है. यह निर्णय ऐसे समय में हुआ है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और जर्मन चांसलर फ़्रिड्रिख़ मर्त्ज़ के बीच ईरान युद्ध को लेकर विवाद सामने आया. दरअसल, जर्मन चांसलर फ़्रिड्रिख़ मर्त्ज़ ने कहा था कि ईरानी वार्ताकारों ने अमेरिका की "बेइज़्ज़ती" की है. इसके बाद गुरुवार को सोशल मीडिया पर ट्रंप ने लिखा, "मर्त्ज़ बहुत ख़राब काम कर रहे हैं और उनके पास हर तरह की समस्याएं हैं, जिनमें इमिग्रेशन और ऊर्जा भी शामिल हैं." ट्रंप ने इटली और स्पेन से भी अमरीकी सैनिकों को हटाने का सुझाव दिया है. जर्मनी में अमेरिकी सेना की बड़ी मौजूदगी है. पिछले दिसंबर तक वहां 36,000 से ज़्यादा सक्रिय सैनिक तैनात थे. इमेज स्रोत, Alex Kraus/Bloomberg via Getty Images पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने बताया कि सेना हटाने का आदेश रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की ओर से आया है. उन्होंने कहा, "यह फ़ैसला यूरोप में सेना की स्थिति की पूरी समीक्षा के बाद लिया गया है और यह वहां की ज़रूरतों और हालात को देखते हुए किया गया है. सैनिकों की अमेरिका वापसी अगले 6 से 12 महीनों में पूरी हो जाएगी." ग़ौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यूरोप के कई देशों से नाराज़ हैं. ट्रंप ने इनसे होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोलने के अभियान में मदद मांगी थी, लेकिन इस अभियान के लिए उन्हें समर्थन नहीं मिला. पश्चिम बंगाल में 15 मतदान केंद्रों पर आज यानी 2 मई को फिर से मतदान हो रहा है. इन पर बूथों 29 अप्रैल को विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में वोटिंग हुई थी. लेकिन चुनाव आयोग ने इन बूथों पर ईवीएम से छेड़छाड़ और झड़प की शिकायत के बाद फिर से वोटिंग कराने का फ़ैसला लिया था. मतदान सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक होगा. इनमें से 11 मतदान केंद्र मगराहाट पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में हैं, जबकि 4 डायमंड हार्बर में हैं. डायमंड हार्बर के हरिदेवपुर प्राइमरी स्कूल के बूथ नंबर 194 पर सुबह 7 बजे से पहले ही वोटर्स कतार में नज़र आ रहे थे. पीटीआई के मुताबिक़, चुनाव आयोग ने बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी को लिखे पत्र में कहा था कि राज्य की चुनाव व्यवस्था से मिली जानकारी के आधार पर फिर से मतदान कराने का फ़ैसला लिया गया है. बाकी राज्यों के साथ-साथ पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजे भी 4 मई को आएंगे. संबंधित कहानी: बंगाल में सियासी टकराव तेज़, टीएमसी का चुनाव आयोग पर 'एकतरफ़ा फ़ैसले' का आरोप, बीजेपी ने कहा 'ड्रामेबाज़ी' इमेज स्रोत, Jim WATSON / AFP via Getty Images अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर कहा है कि ईरान को परमाणु हथियार की इजाज़त नहीं दी जा सकती. ट्रंप ने शुक्रवार को कहा, 'सनकी लोगों' को परमाणु हथियार रखने की इजाज़त नहीं दी जा सकती. दरअसल, अमेरिका के 1973 के वॉर पावर्स एक्ट के अनुसार, राष्ट्रपति बिना कांग्रेस की अनुमति के सिर्फ़ 60 दिन तक सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं. इसके बाद उन्हें या तो कार्रवाई रोकनी होती है या कांग्रेस से अनुमति लेनी होती है. अगर सैनिकों की सुरक्षा से जुड़ी ज़रूरी स्थिति हो तो फिर 30 दिन का अतिरिक्त समय मांगना होता है. लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि इस जंग को जारी रखने के लिए उन्हें अमेरिकी सांसदों की अनुमति की ज़रूरत नहीं है. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, "28 फ़रवरी, 2026 को शुरू हुई लड़ाई अब ख़त्म हो गई है. लेकिन अमेरिका ईरान के साथ टकराव जल्दी ख़त्म नहीं करेगा, क्योंकि ऐसा करने पर कुछ सालों बाद हमें फिर वही समस्या झेलनी पड़ सकती है." ट्रंप ने कहा कि अमेरिका दुनिया के लिए ख़तरा पैदा करने वाले हर हथियार को ख़त्म करने की कोशिश करेगा, सबसे पहले परमाणु हथियारों को. उन्होंने आगे कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को निशाना बनाना 'ज़रूरी क़दम' था. उनका तर्क था कि अगर ऐसा न किया जाता तो 'ईरान इसराइल और बाक़ी मध्य पूर्व के देशों को तबाह कर सकता था.' गौरतलब है कि फ़िलहाल अमेरिका-इसराइल और ईरान के बीच युद्धविराम का दौर चल रहा है, लेकिन बातचीत में कोई ख़ास प्रगति अभी तक सामने नहीं आई है. बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के लाइव पेज पर आपका स्वागत है. मैं बीबीसी संवाददाता रौनक भैड़ा अब से दोपहर दो बजे तक आप तक अहम ख़बरें पहुंचाऊंगा. कल के लाइव पेज की ख़बरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. हमारे पेज पर मौजूद कुछ अहम ख़बरों को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें. - बंगाल में सियासी टकराव तेज़, टीएमसी का चुनाव आयोग पर 'एकतरफ़ा फ़ैसले' का आरोप, बीजेपी ने कहा 'ड्रामेबाज़ी' - पश्चिम बंगाल: वोटों की गिनती से पहले टीएमसी और बीजेपी के खेमे में क्या है हलचल? - जलवायु परिवर्तन के असर से घटेगी इंसानों की हाइट? - स्ट्रॉन्ग रूम क्या होते हैं, जिनके कारण पश्चिम बंगाल में छिड़ी है सियासी जंग
स्रोत: BBC Hindi