इमेज स्रोत, AFP via Getty Images अमेरिकी न्याय विभाग ने भारतीय उद्योगपति गौतम अदानी और उनके भतीजे सागर अदानी के ख़िलाफ़ सभी आपराधिक आरोप वापस ले लिए हैं. इसके साथ ही न्यूयॉर्क में चल रहा हाई-प्रोफ़ाइल सिक्योरिटीज और वायर फ्रॉड मामला पूरी तरह बंद हो गया है. ब्लूमबर्ग के मुताबिक़, वित्त मंत्रालय की ओर से सेटलमेंट की घोषणा के तुरंत बाद न्याय विभाग ने आपराधिक आरोप हटाने की मांग की. पिछले हप़्ते ही ख़बर आई थी कि अमेरिका में चल रहे मुकदमे को निपटाने के लिए गौतम अदानी और सागर अदानी ने संयुक्त रूप से 1.80 करोड़ डॉलर का जुर्माना देने पर सहमति दी थी. 2024 के मुकदमे में सिक्योरिटीज रेगुलेटर (नियामक) ने अदानी परिवार पर निवेशकों को कथित तौर पर गुमराह करने का आरोप लगाया था. रेगुलेटर के आरोपों के मुताबिक़ अदानी परिवार ने इस तरह से अमेरिकी निवेशकों से लगभग 17.5 करोड़ डॉलर समेत 75 करोड़ डॉलर जुटाया था. हालांकि अदानी समूह ने इन आरोपों को 'बेबुनियाद' करार दिया है. अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि उसके ऑफ़िस ऑफ़ फ़ॉरेन एसेट्स कंट्रोल (ओएफ़एसी) ने अदानी एंटरप्राइज़ेज़ लिमिटेड (एईएल) के साथ 27 करोड़ 50 लाख डॉलर के समझौते की घोषणा की है. इस समझौते पर हस्ताक्षर 14 मई 2026 को हुए थे. एईएल ने, ओएफ़एसी के ईरान प्रतिबंधों के 32 संभावित सिविल उल्लंघनों को लेकर अपनी ज़िम्मेदारी के निपटारे पर सहमति जताई. बयान के अनुसार, नवंबर 2023 से जून 2025 के बीच एईएल ने दुबई के एक कारोबारी से एलपीजी की खेप खरीदी, जिसने दावा किया था कि वह ओमान और इराक़ की गैस सप्लाई कर रहा है. हालांकि कई संकेत ऐसे थे जिनसे एईएएल को पता चल जाना चाहिए था कि एलपीजी वास्तव में ईरान से आ रही थी. इस अवधि में एईएल ने अमेरिकी वित्तीय संस्थानों से अमेरिकी डॉलर वाले 32 भुगतान प्रोसेस करवाए, जिनकी कुल रकम लगभग 19 करोड़ 21 लाख 4 हज़ार 44 डॉलर थी. न्याय विभाग ने कहा है कि 'समझौते की राशि ओएफ़सी के इस निष्कर्ष को दिखाती है कि एईएल के संभावित उल्लंघन गंभीर प्रकृति के थे और उनकी जानकारी स्वेच्छा से नहीं दी गई थी.' वो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख़बरें जो दिनभर सुर्खियां बनीं. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, अदालत में दायर दस्तावेज में अमेरिकी न्याय विभाग ने अदानी परिवार पर आरोपपत्र को स्थायी रूप से ख़ारिज़ करने की मांग की है. विभाग ने कहा, "न्याय विभाग ने मामले की समीक्षा की है और अभियोजन के विवेकाधिकार का इस्तेमाल करते हुए इन आपराधिक आरोपों पर आगे संसाधन खर्च नहीं करने का फैसला लिया है." इसके बाद अदालत ने आदेश दिया कि अदानी और अन्य लोगों के ख़िलाफ़ आरोपपत्र को 'विद प्रीज्युडिस' के तहत ख़ारिज़ किया जाए, जिसका मतलब है कि यह मामला दोबारा नहीं खोला जा सकेगा. यह फैसला उस मामले में बड़ा मोड़ माना जा रहा है, जिसने अदानी समूह की वैश्विक विस्तार योजनाओं पर असर डालने की आशंका पैदा कर दी थी. ब्लूमबर्ग के मुताबिक़, अमेरिकी आपराधिक मामलों में 'विद प्रीज्युडिस' के साथ केस ख़ारिज़ होना काफी दुर्लभ माना जाता है. आमतौर पर इसका मतलब होता है कि विस्तृत समीक्षा के बाद अभियोजन एजेंसियों ने माना कि मामला आगे बढ़ाना उचित नहीं है. बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित (बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हॉट्सऐप पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)
स्रोत: BBC Hindi