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बहू को ससुराल में 'एडजस्ट' करने की सलाह देना क्रूरता नहीं, आपसी रंजिश के लिए कानून का दुरुपयोग गलत : सुप्रीम कोर्ट

वैवाहिक विवादों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा है कि अगर पति के रिश्तेदार महिला को शादी में तालमेल बैठाने या मायके लौट जाने के लिए कहते हैं, तो इसे आपराधिक क्रूरता नहीं माना जा सकता. ऐसा व्यवहार नैतिक रूप से गलत हो सकता है, लेकिन इसे आपराधिक कृत्य की श्रेणी में नहीं डाला जा सकता.

क्या है मामला?
​जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने यह फैसला मध्य प्रदेश के एक मामले में दिया है. मामले की शिकायतकर्ता की शादी 2019 में हुई थी. पति से विवाद के बाद उसने पति के अलावा सास, ननद, जेठ और जेठानी पर भी दहेज उत्पीड़न, क्रूरता और घरेलू हिंसा का मामला दर्ज करवाया. ससुराल पक्ष के लोग मध्य प्रदेश हाई कोर्ट गए, लेकिन हाई कोर्ट ने केस रद्द करने से मना कर दिया.

सुप्रीम कोर्ट का आदेश
अब सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद ससुराल पक्ष के खिलाफ चल रहे सभी आपराधिक मामलों को रद्द कर दिया है. कोर्ट ने कहा है कि कई बार वैवाहिक विवाद में रिश्तेदार 'मूकदर्शक' बने रहते हैं या पति का पक्ष लेते हैं, लेकिन यह कोई अपराध नहीं है. परिवार के सदस्यों का शिकायतकर्ता को रिश्ते में एडजस्ट करने की सलाह देना अपने आप में अपराध नहीं है. मुकदमा तभी चलना चाहिए जब किसी अपराध में उनकी सक्रिय भागीदारी का आरोप हो.

स्रोत: ABP Hindi