इमेज स्रोत, Karim JAAFAR / AFP via Getty Images ईरान फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप से बाहर हो गया है. राजनीतिक तनाव से घिरे इस टूर्नामेंट में ईरान की टीम कड़े अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच खेल रही थी और ग्रुप स्टेज से आगे बढ़ने से मामूली अंतर से चूक गई. ईरान बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण तरीक़े से अंतिम 32 में पहुँचने से सिर्फ़ एक स्थान पीछे रह गया. ग्रुप जी में ईरान तीन अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा. उसे बेल्जियम, न्यूज़ीलैंड और मिस्र के ख़िलाफ़ ड्रॉ से तीन अंक मिले. एक समय ऐसा लग रहा था कि टाईब्रेकर के आधार पर ईरान अगले दौर में पहुंच जाएगा, जब शनिवार रात अल्जीरिया ने स्टॉपेज टाइम में शानदार गोल कर ऑस्ट्रिया के ख़िलाफ़ 3-2 की बढ़त बना ली. लेकिन मैच के आख़िरी क्षणों में ऑस्ट्रिया ने बराबरी का गोल कर दिया. इस ड्रॉ ने ईरान के बाहर होने पर मुहर लगा दी. मैदान के अंदर और बाहर दोनों जगह उथल-पुथल से भरे इस वर्ल्ड कप में यह ईरान के लिए एक और मुश्किल पल था. ईरानी टीम ऐसे समय खेल रही थी, जब अमेरिका से उस समझौते को लेकर बातचीत चल रही है, जिसका मक़सद इस साल शुरू हुए युद्ध को स्थायी रूप से ख़त्म करना था. शनिवार को तनाव और बढ़ गया जब ईरान ने बहरीन को निशाना बनाकर ड्रोन हमला किया. बहरीन में अमेरिकी नौसेना का पांचवां बेड़ा तैनात है. इसे रात भर अमेरिकी हवाई हमलों के जवाब के रूप में देखा जा रहा है. कुछ घंटों बाद अमेरिका ने कहा कि उसने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हमला किया, क्योंकि उसके अनुसार, ईरान ने होर्मुज़ स्ट्रेट के पास एक जहाज़ को निशाना बनाया था. इमेज स्रोत, Sebastian Frej/Getty Images वो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख़बरें जो दिनभर सुर्खियां बनीं. वर्ल्ड कप के दौरान ईरान के कोच अमीर ग़ालेनोई और खिलाड़ियों ने कई मुश्किलों की शिकायत की, जिनमें यात्रा प्रतिबंध, सहयोगी स्टाफ़ के लिए वीज़ा रिजेक्शन और मैचों के तुरंत बाद अमेरिका से जल्दी निकलने की बाध्यता शामिल थी. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ही सभी प्रतिबंधों की जानकारी दे दी गई थी. ईरान के कप्तान मेहदी तारेमी ने 2026 फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप में अपनी टीम के साथ हुए व्यवहार को "अनुचित" बताते हुए कड़ी आलोचना की और इसे "सबसे ख़राब वर्ल्ड कप" क़रार दिया. तारेमी ने कहा, "यहां हर समस्या का समाधान किया जाना चाहिए था, लेकिन दुर्भाग्य से शुरुआत से ही वे समस्याओं का समाधान नहीं कर सके." उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के कई सहयोगी स्टाफ़ को अमेरिकी वीजा नहीं दिया गया, जबकि दूसरी टीमों को पूरी लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराई गई. तारेमी ने टीम की यात्रा व्यवस्था की भी आलोचना की. उन्होंने कहा कि सिएटल और तिजुआना के बीच लगातार यात्रा ने खिलाड़ियों को "रिकवरी का समय ही नहीं दिया." उन्होंने ज़ोर देकर कहा, "यह बिल्कुल भी निष्पक्ष नहीं है." न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि राजनीतिक लड़ाई तो खिलाड़ियों और स्टाफ़ के लिए बोझ थी ही. लेकिन असली दिक़्क़तें तो युद्ध की वजह से लगी पाबंदियों से आईं. टीम को टूर्नामेंट से पहले प्रैक्टिस मैच के लिए कोई दूसरी टीम नहीं मिली. अमेरिकी वीज़ा के लिए महीनों इंतज़ार करना पड़ा और जब वीज़ा मिले भी तो दर्जन भर लोग रिजेक्ट कर दिए गए. अमेरिका और इसराइल ने 28 फ़रवरी को ईरान पर हमला करके युद्ध की शुरुआत की थी. इसके जवाब में ईरान ने अरब के देशों पर हमला किया था और होर्मुज़ पर अपना नियंत्रण मज़बूत करने की कोशिश की. मार्च में ईरान ने अपने ग्रुप चरण के मैच मेक्सिको में कराने की मांग की थी, क्योंकि उसके साथ ईरान के राजनयिक संबंध हैं. टीम का बेस कैंप एरिज़ोना के टक्सन से बदलकर तिजुआना करने का अनुरोध टीम के पहुंचने से दो हफ़्ते पहले स्वीकार कर लिया गया था. शनिवार रात बाहर होने के बाद ईरानी टीम ने एक बयान जारी कर मेक्सिको के प्रति आभार व्यक्त किया. बयान में कहा गया, "तिजुआना छोड़ना हम सभी के लिए बेहद कठिन है." इमेज स्रोत, Harry How/Getty Images दरअसल, पहले मैच के दौरान कई सौ ईरानी-अमेरिकियों ने स्टेडियम के बाहर प्रदर्शन किया. उन्होंने तेहरान में बदलाव की मांग की थी. हज़ारों अन्य लोग स्टेडियम के भीतर मैच देखने पहुंचे और मैच से पहले राष्ट्रगान के दौरान तालियों और हूटिंग दोनों की आवाज़ें सुनाई दीं. पहले दो मैचों के लिए, जो लॉस एंजिलिस के पास खेले गए, टीम को मैच से एक दिन पहले तक यात्रा की अनुमति नहीं थी और हर मैच के तुरंत बाद मेक्सिको लौटना पड़ता था. बाद में अमेरिका ने कुछ प्रतिबंधों में ढील दी, जिससे टीम को मिस्र के ख़िलाफ़ शुक्रवार के मैच से दो दिन पहले सिएटल जाने की अनुमति मिली. अगर ईरान अगले दौर में पहुंचता, तो उसका अगला मैच ब्रिटिश कोलंबिया के वैंकूवर में होता. मिस्र के ख़िलाफ़ ड्रॉ के बाद, जिसने ईरान की उम्मीदों को अंतिम क्षण तक ज़िंदा रखा, अमीर ग़ालेनोई ने कहा, "हमारे साथ बहुत, बहुत बुरा व्यवहार किया गया." उन्होंने कहा, "मुझे उम्मीद है कि दुनिया इन मुद्दों से अवगत होगी." ग़ालेनोई ने कहा, "इन युवा ईरानी खिलाड़ियों ने जो किया है, उसे इतिहास में दर्ज किया जाना चाहिए." उन्होंने कहा, "क्यों? क्योंकि मेज़बान ने हमारे साथ सबसे ख़राब संभव व्यवहार किया." ईरान के कोच ने दावा किया कि टूर्नामेंट में उनके किसी भी साथी कोच ने उनके सवालों का जवाब नहीं दिया. ईरान के कोच ने कहा, "हम कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, खासकर मैदान के बाहर." उन्होंने कहा, "मैंने बाक़ी 47 कोचों से एक सवाल पूछा, लेकिन किसी ने भी मुझे जवाब नहीं दिया." जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें अन्य देशों का समर्थन महसूस हुआ, तो ग़ालेनोई ने कहा, "नहीं, मैंने ऐसा कुछ नहीं देखा." उन्होंने कहा, "मुझे किसी से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली. लेकिन ऐसा लगता है कि बेल्जियम के सम्मानित कोच रूडी गार्सिया ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि हम यहां फुटबॉल के लिए हैं, राजनीति के लिए नहीं." ग़ालेनोई ने कहा, "हमारी शिकायत राजनीति को लेकर नहीं है. हमारी शिकायत इस बात को लेकर है कि विश्व कप आयोजकों ने हमारे साथ कैसा व्यवहार किया." उन्होंने कहा, "मुझे दूसरे कोचों से कुछ नहीं सुनने को मिला. वे अपनी टीमों में व्यस्त होंगे और हमें कोई समर्थन नहीं मिला. अगर मैं उनकी जगह होता, तो मैं ज़रूर प्रतिक्रिया देता." ग़ालेनोई ने यह भी बताया कि शुक्रवार को फ़ीफ़ा ने उनसे संपर्क किया था और पूछा था कि अगर उसी दिन शाम को अमेरिका के लिए उड़ान की व्यवस्था हो जाए तो क्या टीम तैयार होगी. लेकिन बाद में यह योजना पूरी नहीं हो सकी. उन्होंने कहा, "फीफा ने मुझे फोन किया और पूछा, 'अगर हम शाम 6 बजे की फ्लाइट की व्यवस्था करें तो क्या आप तैयार हैं?' मैंने इसका स्वागत किया, लेकिन फिर हम इंतजार करते रहे." उन्होंने कहा, "हम शाम सात बजे तक इंतजार करते रहे, लेकिन कुछ नहीं हुआ. फिर हमें कहा गया, 'ठीक है, माफ कीजिए, हम यह नहीं कर सके.'" बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित. 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स्रोत: BBC Hindi