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अमेरिका ने ईरान पर फिर किए हमले, डोनाल्ड ट्रंप ने दी ये चेतावनी

अमेरिका ने बुधवार शाम ईरान पर नए हमले किए और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को चेतावनी दी कि वह "बेहतर व्यवहार करे." अमेरिकी सेंटकॉम ने बताया कि उसने ईरान में अपने नए हमलों के दौरान सैन्य कमांड सेंटर, हवाई सुरक्षा ठिकानों, मिसाइल और ड्रोन से जुड़े ठिकानों और तटीय निगरानी केंद्रों को निशाना बनाया. सेना का कहना है कि ये हमले अब खत्म हो चुके हैं. अमेरिका के मुताबिक़, इन हमलों का उद्देश्य ईरान की उस क्षमता को खत्म करना है, जिससे वह होर्मुज़ स्ट्रेट से गुजरने वाले व्यापारिक जहाज़ों और उनके चालक दल को ख़तरा पहुंचा सकता है. यह तब हुआ जब ईरान ने दावा किया कि उसने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया है, जिनमें बहरीन और कुवैत भी शामिल हैं. ईरान के मुख्य वार्ताकार और संसद के स्पीकर मोहम्मद बग़र ग़ालिबाफ़ ने सरकारी मीडिया से कहा, "अगर समझौते से कोई फ़ायदा नहीं है तो ईरान के पास उसे मानने का कोई कारण नहीं है." ट्रंप ने मंगलवार देर रात धमकी दी थी कि अगर ईरान अगले हफ्ते वार्ता में वापस नहीं आता तो पुलों और बिजलीघरों पर हमला किया जाएगा. बुधवार देर रात जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या वह इसके लिए कोई समयसीमा देंगे, तो उन्होंने कहा, "मुझे समयसीमा देना पसंद नहीं है, लेकिन उन्हें पता है... उन्हें बेहतर व्यवहार करना चाहिए." ट्रंप ने कहा, "वे (ईरान) समझौता करना चाहते हैं. उन्हें हमारा तरीका पसंद नहीं है. अब हम तय करेंगे कि उनके साथ समझौता करना है या नहीं." इमेज स्रोत, MB Media/Getty Images फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप-2026 के सेमीफ़ाइनल में इंग्लैंड को हराने के बाद अर्जेंटीना की टीम विवादों में घिर गई है. मैच के बाद अर्जेंटीना के खिलाड़ियों ने मैदान पर एक ऐसा बैनर प्रदर्शित किया, जिसे फ़ीफ़ा के नियमों का उल्लंघन बताया जा रहा है. मैच के बाद खिलाड़ियों ने जो बैनर दिखाया, उस पर लिखा था, "माल्विनास, जिसे फ़ॉकलैंड द्वीप कहा जाता है, वह अर्जेंटीना का है." इस संदेश को राजनीतिक बयान के तौर पर देखा जा रहा है. दक्षिण अटलांटिक महासागर में स्थित फ़ॉकलैंड द्वीप समूह पर ब्रिटेन का नियंत्रण है, जबकि अर्जेंटीना इन द्वीपों पर अपना दावा जताता रहा है और उन्हें 'माल्विनास' के नाम से संबोधित करता है. इसी विवाद को लेकर वर्ष 1982 में दोनों देशों के बीच युद्ध भी हुआ था. अंतरराष्ट्रीय फ़ुटबॉल संस्था फ़ीफ़ा और इंटरनेशनल फ़ुटबॉल एसोसिएशन बोर्ड (आईएफएबी) के नियमों के अनुसार, मैदान पर किसी भी तरह के राजनीतिक नारे, बयान या प्रतीकों का प्रदर्शन प्रतिबंधित है. ऐसे में इस विवादित बैनर के प्रदर्शन को लेकर अर्जेंटीना फ़ुटबॉल टीम पर फ़ीफ़ा की ओर से अनुशासनात्मक कार्रवाई या जुर्माना लगाए जाने की संभावना जताई जा रही है. सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 28 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल (अनशन) पर बैठे हैं. आज उनके अनशन का 19वां दिन है. इस बीच बुधवार देर रात को उन्होंने एक संदेश जारी किया है. सोनम वांगचुक ने कहा है कि अब अनशन को खत्म करने पर सरकार में जवाबदेही तय नहीं होगी. उन्होंने कहा कि उनकी हालत ऐसी भी नहीं है कि दो-चार दिन में उनकी मौत हो जाए. वांगचुक ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश में कहा, "आप लोगों के हज़ारों संदेश आए कि मैं अनशन तोड़ दूं. बड़े-बुज़ुर्ग और कई नेताओं ने मुझसे अनशन समाप्त करने के लिए कहा. कुछ ने तो अदालत से अपील की है कि सरकार मुझे ज़बरदस्ती खाना खिलाए." उन्होंने कहा, "दो बातें हैं, पहला तो अगर मैं खा भी लूं, तो उससे क्या बदलेगा और क्या संदेश जाएगा. सरकार को तो यही संदेश जाएगा कि जवाबदेही की ज़रूरत नहीं है, वो बैठ जाते हैं, वो चले जाते हैं." "दूसरी बात, मेरी हालत कुछ ऐसी भी नहीं है कि मैं दो चार दिन में मर जाऊं. बहुत सारे मेडिकल टेस्ट होते रहे हैं, 18 दिन के अनशन के हिसाब से रिज़ल्ट्स काफ़ी नॉर्मल हैं." सोनम वांगचुक ने कहा, "मैं अभी कई दिन चल सकता हूं. कमज़ोरी है, मेरे मसल्स ख़त्म हो रहे हैं, मगर मेरा दिल अभी भी ठीक चल रहा है. इसलिए सिर्फ अनशन तोड़ने को कहने के बजाय मैं आप लोगों से विनती करूंगा कि आप भी एक छोटा कदम उठाएं, 20 जुलाई को इतनी बड़ी संख्या में आएं कि एक संदेश सरकार को जाए." उन्होंने जनता से अपील करते हुए कहा, "20 जुलाई को बहुत से सांसदों के साथ आप सब आइए. हज़ारों की संख्या में हम सब मिलकर इस मुद्दे को संसद के हवाले करेंगे, तो मुझे भी भरोसा होगा कि अब ये सही हाथों में गया है." गौरतलब है कि 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन 'चलो संसद' अभियान के तहत संसद भवन तक शांतिपूर्ण मार्च निकालने का आह्वान किया है. यह पार्टी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग को लेकर और परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों के विरोध में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही है. इमेज स्रोत, Michael Steele/Getty Images फुटबॉल वर्ल्ड कप-2026 के दूसरे सेमीफ़ाइनल में अर्जेंटीना ने रोमांचक मुक़ाबले में इंग्लैंड को 2-1 से हराकर लगातार दूसरी बार वर्ल्ड कप के फ़ाइनल में जगह बना ली. अब अर्जेंटीना का सामना 19 जुलाई को न्यू ज़र्सी में स्पेन से होगा. अटलांटा में खेले गए मुक़ाबले में इंग्लैंड ने एंथनी गॉर्डन के गोल की बदौलत 85वें मिनट तक 1-0 की बढ़त बनाए रखी. लेकिन, मैच के अंतिम क्षणों में अर्जेंटीना ने शानदार वापसी करते हुए बाज़ी पलट दी. 85वें मिनट के बाद लियोनेल मेसी के शॉर्ट कॉर्नर पर एंजो फ़र्नांदेज़ ने गोल कर स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया. इसके बाद इंजरी टाइम के दूसरे मिनट में मेसी के सटीक क्रॉस पर लॉटारो मार्टिनेज़ ने शानदार हेडर के ज़रिए विजयी गोल दाग दिया और अर्जेंटीना को 2-1 से जीत दिलाकर फ़ाइनल का टिकट पक्का कर दिया. 19 जुलाई को टीम का सातवां वर्ल्ड कप फ़ाइनल होगा. अर्जेंटीना इससे पहले 1978, 1986 और 2022 में वर्ल्ड कप का ख़िताब अपने नाम कर चुका है. बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के लाइव पेज पर आपका स्वागत है. मैं बीबीसी संवाददाता रौनक भैड़ा अब से दोपहर दो बजे तक आप तक अहम ख़बरें पहुंचाऊंगा. कल के लाइव पेज की ख़बरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. बीबीसी न्यूज़ हिन्दी पर मौजूद कुछ अहम ख़बरों को उनके साथ दिए गए लिंक पर क्लिक कर विस्तार से पढ़ सकते हैं. - जयपुर के एक चर्चित स्कूल में स्टूडेंट की मौत के आठ महीने बाद उठ रहे हैं कई सवाल - मुज़फ़्फ़राबाद की ओर लॉन्ग मार्च के एलान के बाद रावलाकोट को सील किया गया - 'हैंड ऑफ़ गॉड', कान खिंचाई और फ़ॉकलैंड की जंग: अर्जेंटीना बनाम इंग्लैंड क्या फ़ुटबॉल की 'सबसे बड़ी लड़ाई' है - छत्तीसगढ़: मालिक का दावा- ई20 पेट्रोल से ख़राब हुई कार, उपभोक्ता आयोग का नई गाड़ी देने का आदेश

स्रोत: BBC Hindi