जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों को लेकर सोमवार को विधानसभा मार्च और घेराव का आह्वान किया है. छात्र नेता रविंद्र पासवान ने कहा कि पुलिस प्रशासन जहां भी उन्हें रोकेगा, वे वहीं बैठकर प्रदर्शन करेंगे. उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, "हमारा आंदोलन सांकेतिक है और पूरे झारखंड के लोगों को आज के विधानसभा मार्च और घेराव की जानकारी है." रविंद्र पासवान ने कहा कि प्रदर्शन के ज़रिए सरकार को यह संदेश देना है कि अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर एकजुट और दृढ़ हैं. उन्होंने चेतावनी दी, "अगर सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आने वाले समय में इससे भी बड़ा आंदोलन हो सकता है." पासवान ने आरोप लगाया कि जिन परीक्षाओं को लेकर छात्रों ने सवाल उठाए हैं, उनमें अनियमितताएं सामने आई हैं. उन्होंने विशेष रूप से सीजीएल परीक्षा का ज़िक्र करते हुए इसमें बड़ी गड़बड़ी का आरोप लगाया. इससे पहले एडीजी (मुख्यालय) मनोज कौशिक ने अभ्यर्थियों से शांतिपूर्वक मार्च निकालने की अपील की थी. साथ ही उन्होंने कहा, "छात्रों के प्रस्तावित विधानसभा मार्च के दौरान अशांति की आशंका को देखते हुए पुलिस प्रशासन को अलर्ट पर रखा गया है." संबंधित स्टोरी: झारखंड: सरकार के साथ इन मांगों पर बनी सहमति लेकिन स्टूडेंट आंदोलन रहेगा जारी श्रीलंका के ख़िलाफ़ होने वाली दो मैचों की टेस्ट सिरीज़ से साई सुदर्शन बाहर हो गए हैं. उनकी जगह सरफ़राज़ ख़ान को भारतीय टीम में शामिल किया गया है. टीम में शामिल किए जाने के बाद सरफ़राज़ ख़ान ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर की. पोस्ट में उन्होंने दो तस्वीरें साझा की हैं, जिनमें वह टीम इंडिया की ट्रैवलिंग जर्सी में नज़र आ रहे हैं. एक तस्वीर में सरफ़राज़ अपने पिता के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं. सरफ़राज़ ने इस पोस्ट के साथ कोई कैप्शन नहीं लिखा. उन्होंने सिर्फ़ इमोजी का इस्तेमाल किया, जिसमें भारतीय झंडे की इमोजी भी शामिल है. इससे पहले, जब उन्हें टीम में जगह नहीं मिली थी, तब सरफ़राज़ ने इंस्टाग्राम स्टोरी के ज़रिए अपना दुख ज़ाहिर किया था. उन्होंने लिखा था, “शायद मैं फिट नहीं बैठता, लेकिन मैं अपनी पूरी ताकत से लड़ूंगा.” गौरतलब है कि भारत और श्रीलंका के बीच दो मैचों की टेस्ट सीरीज़ 15 अगस्त से 27 अगस्त 2026 तक श्रीलंका में खेली जाएगी. इमेज स्रोत, Hector RETAMAL / AFP via Getty Images चीन के पूर्वी हिस्से में तूफ़ान डॉल्फ़िन के दस्तक देने के बाद 10 लाख से ज़्यादा लोगों को उनके घरों से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है. तूफ़ान के चलते राजधानी शंघाई समेत कई इलाक़ों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है. मौसम विभाग के मुताबिक़, डॉल्फ़िन तूफ़ान ने रविवार शाम क़रीब 5:30 बजे झेजियांग प्रांत के युहुआन में पहली बार दस्तक दी. इस दौरान तूफ़ान की अधिकतम रफ़्तार 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई. इसके क़रीब एक घंटे बाद तूफ़ान ने वेंझोउ शहर में दूसरी बार लैंडफ़ॉल किया. तूफ़ान के कारण अकेले शंघाई में क़रीब 1,400 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं. इससे बड़ी संख्या में यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा. चीनी अधिकारियों ने तूफ़ान डॉल्फ़िन को लेकर पहले सबसे उच्च स्तर की रेड अलर्ट चेतावनी जारी की थी. हालांकि, सोमवार सुबह इसकी तीव्रता कम होने के बाद अलर्ट को घटा दिया गया. मौसम विभाग के अनुसार, तूफ़ान अब चीन के अंदरूनी इलाक़ों की ओर बढ़ रहा है. अधिकारियों ने बुधवार तक मूसलाधार बारिश, बाढ़ और भूस्खलन की आशंका को लेकर चेतावनी जारी की है. शानडोंग, हेनान, हुबेई, अनहुई, जिआंगसू और झेजियांग प्रांतों के साथ शंघाई में सोमवार को भी भारी बारिश का अनुमान जताया गया है. स्थानीय प्रशासन ने लोगों से ग़ैर-ज़रूरी कामों के लिए बाहर न जाने की अपील की है. इमेज स्रोत, Yousuf Sarfaraz/SOPA Images/LightRocket via Getty Images झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के ख़िलाफ़ स्टूडेंट आंदोलन 17वें दिन में प्रवेश कर गया. आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों ने सोमवार को विधानसभा मार्च का आह्वान किया है. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, मार्च को देखते हुए रांची में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. झारखंड पुलिस ने शहर के प्रमुख इलाकों में पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात किया है. एडीजी (मुख्यालय) मनोज कौशिक ने कहा, "छात्रों के प्रस्तावित विधानसभा मार्च के दौरान अशांति की आशंका को देखते हुए पुलिस प्रशासन को अलर्ट पर रखा गया है." उन्होंने मार्च में शामिल होने वाले छात्रों से शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से प्रदर्शन करने की अपील की. रांची के एसएसपी राकेश रंजन ने कहा, "मार्च के दौरान क़ानून-व्यवस्था बनाए रखना सभी की ज़िम्मेदारी है. पुलिस किसी भी छात्र के करियर पर क़ानून-व्यवस्था बिगड़ने के कारण दाग़ नहीं लगने देना चाहती. शहर के प्रमुख स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई है और पर्याप्त संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है." विधानसभा के 750 मीटर के दायरे में निषेधाज्ञा एसएसपी के मुताबिक़, विधानसभा भवन के 750 मीटर के दायरे में छह अगस्त से 12 अगस्त तक निषेधाज्ञा लागू है. इन दिनों सुबह छह बजे से रात 10 बजे तक यह आदेश प्रभावी रहेगा. रांची में प्रस्तावित छात्र मार्च को देखते हुए जमशेदपुर में भी रविवार आधी रात से निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है. ज़िला प्रशासन की ओर से जारी बयान में इसकी जानकारी दी गई. रांची ज़िला प्रशासन ने आंदोलन कर रहे छात्रों से किसी भी तरह के आक्रामक प्रदर्शन में शामिल नहीं होने की अपील की है. प्रशासन ने मार्च के दौरान हिंसा और किसी भी तरह की अवैध गतिविधि से दूर रहने की चेतावनी भी दी है. वहीं, प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने आरोप लगाया है कि झारखंड के अलग-अलग हिस्सों से रांची पहुंच रहे सैकड़ों छात्रों को पुलिस बलपूर्वक रोक रही है. इमेज स्रोत, Alex Wong/Getty Images हमास के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमेरिका से इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू पर दबाव डालने की अपील की है, ताकि ग़ज़ा पीस प्लान के अगले चरण को लागू किया जा सके. हमास के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य बासेम नईम ने एएफ़पी से बातचीत में कहा कि अमेरिका इस समझौते का गारंटर है. ऐसे में उसे नेतन्याहू और उनकी सरकार पर पीस प्लान के रोडमैप को लागू करने के लिए दबाव बनाना चाहिए. बासेम नईम ने कहा, "हम उम्मीद करते हैं कि मध्यस्थ देश और अमेरिका बिन्यामिन नेतन्याहू और उनकी सरकार पर दबाव डालेंगे, क्योंकि ये ही समझौते के गारंटर हैं." दरअसल, इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने ग़ज़ा को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 15 पॉइंट प्लान को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है. नेतन्याहू ने कहा है कि जब तक हमास को पूरी तरह निरस्त्र (बग़ैर हथियार के) नहीं किया जाता, तब तक ग़ज़ा से इसराइली सेना की वापसी नहीं होगी. नेतन्याहू ने रविवार को हुई कैबिनेट बैठक में कहा, "इसराइल 15 पॉइंट डॉक्यूमेंट को ख़ारिज करता है. इसराइली सेना अपने सैनिकों और नागरिकों के लिए पैदा होने वाले ख़तरों को रोकने के लिए कार्रवाई जारी रखेगी." उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब ग़ज़ा में युद्धविराम को लेकर इसराइल और हमास के बीच मतभेद बने हुए हैं. दोनों पक्षों के बीच इसराइली सेना की वापसी को लेकर असहमति है. उल्लेखनीय है कि पिछले महीने ट्रंप के बोर्ड ऑफ़ पीस ने दावा किया था कि ग़ज़ा में हमास और अन्य सशस्त्र समूहों के पूर्ण निरस्त्रीकरण को लेकर समझौता हो गया है. हालांकि, हमास ने इस पर अलग रुख़ जाहिर किया था. संगठन का कहना था कि वह तभी हथियार छोड़ेगा, जब इसराइल अपनी सैन्य कार्रवाई रोककर ग़ज़ा से सेना वापस बुलाएगा. बीबीसी हिंदी के लाइव पेज पर आपका स्वागत है. मैं बीबीसी संवाददाता रौनक भैड़ा अब से दोपहर दो बजे तक आप तक अहम ख़बरें पहुंचाऊंगा. कल के लाइव पेज की ख़बरें पढ़ने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. बीबीसी न्यूज़ हिन्दी पर मौजूद इन अहम ख़बरों को पढ़ने के लिए इनके साथ दिए गए लिंक पर क्लिक करें. - मक्का समझौता: अरब मीडिया क्या लिख रहा है, मिस्र के न होने पर क्यों उठ रहे हैं सवाल - झारखंड: सरकार के साथ इन मांगों पर बनी सहमति लेकिन स्टूडेंट आंदोलन रहेगा जारी - ममता बनर्जी की कार पर फेंका गया कीचड़, पूर्व मुख्यमंत्री ने जानलेवा हमले का किया दावा - डैम पर छलांग लगाकर स्कूल जाते बच्चों के वायरल वीडियो 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स्रोत: BBC Hindi