बालपुर गोण्डा। हलधरमऊ विकास खण्ड की एक ग्राम पंचायत में मनरेगा में नाबालिग से मजदूरी कराए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। शिकायत के बाद प्रशासन ने इसे प्रथम दृष्टया सही मानते हुए जांच के आदेश जारी किए हैं। साथ ही नाबालिग को बालिग दर्शाकर उसका पंजीकरण करने वाले वीसी का लाइसेंस निरस्त करने का निर्देश भी दिया गया है।
ग्राम पंचायत पहाड़ापुर निवासी अन्नू पुत्र अख्तर अली ने उपजिलाधिकारी नेहा मिश्रा से लिखित शिकायत साक्ष्य संलग्न करते हुए की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि गांव का अब्दुल मारूफ वर्ष 2025 से मनरेगा के तहत लगातार मजदूरी कर रहा है और उसके नाम से जॉब कार्ड भी निर्गत किया गया है, जबकि वह नाबालिग है। शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों में विद्यालयी अभिलेख शामिल हैं, जिनमें संबंधित बालक की जन्मतिथि फरवरी 2010 अंकित है। इसके अलावा भुगतान सूची में उसका नाम दर्ज होने और नियमित भुगतान प्राप्त होने के प्रमाण भी संलग्न किए गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए उपजिलाधिकारी ने विद्यालय के अंकपत्र एवं प्रधानाध्यापक के प्रमाण पत्र के आधार पर नाबालिग होने की पुष्टि होने की बात कही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति नाबालिग को बालिग दर्शाकर मनरेगा में पंजीकरण कराता है, तो यह न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि सरकारी योजनाओं में घोर धांधली की श्रेणी में आता है।
उपजिलाधिकारी ने पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच नायब तहसीलदार को सौंपते हुए संबंधित वीसी का लाइसेंस निरस्त करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी। इस मामले ने एक बार फिर मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजना की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।