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करोड़ों के कोऑपरेटिव बैंक घोटाले के मास्टरमाइंड की तलाश तेज एसओजी ने दो शागिर्दों को उठाया

गोंडा। करीब साढ़े बाइस करोड़ के कोपरेटिव बैंक घोटाले के मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी के लिए एसओजी टीम ने बालपुर क्षेत्र में छापेमारी तेज कर दिया है। एसओजी टीम ने तीन दिन पहले बालपुर में मास्टरमाइंड के यहां छापेमारी किया। उसकी छापेमारी से ठीक कुछ समय पहले मास्टरमाइंड को एसओजी के छापेमारी की भनक लग गई और वह फरार होने में कामयाब हो गया। 

इसके बाद एसओजी टीम ने मास्टरमाइंड के दो शागिर्दों को बालपुर क्षेत्र से उठा लिया। एसओजी टीम ने दोनों शागिर्दों की जमकर सेवा सत्कार किया। इसके बाद सत्तापक्ष के एक माननीय के हस्तक्षेप करने के चलते उनको छोड़ दिया गया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक सत्तापक्ष के माननीय ने घोटाले के मास्टरमाइंड को दशहरा के बाद न्यायालय में हाजिर कराने का वादा किया है। इससे इस बात का भंडाफोड़ हो जाता है कि कोपरेटिव बैंक घोटाले का मास्टरमाइंड बालपुर क्षेत्र का रहने वाला है और सत्तापक्ष के माननीयों का वरदहस्त उसे प्राप्त है।
 उल्लेखनीय है कि गत दिनों जिले में कोऑपरेटिव बैंक से जुड़े एक बड़े वित्तीय घोटाले का भंडाफोड़ हुआ था। इसमें ऋण वितरण में भारी अनियमितता करते हुए करीब 21.47 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई है। इस मामले में बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक, मैनेजर, कैशियर और 12 खाताधारकों सहित कुल 16 लोगों के खिलाफ नगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया था।

यह मामला उत्तर प्रदेश स्टेट कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड की महारानीगंज शाखा से जुड़ा है। बैंक के मुख्य प्रबंधक भुवन चंद्र सती ने तत्कालीन पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल से शिकायत किया था। आंतरिक जांच में 205 खातों और 5 आंतरिक खातों से 2147.78 लाख रुपये की गड़बड़ी सामने आने के बाद कार्रवाई की गई।

जांच में सामने आया कि तत्कालीन शाखा प्रबंधक पवन कुमार पाल ने अपने परिवार और करीबी लोगों के साथ मिलकर एक सिंडिकेट बनाया। बिना पात्रता और बिना सही दस्तावेजों के फर्जी तरीके से लोन स्वीकृत कराए गए।

फर्जी और कूटरचित कागजातों के जरिए ऋण पास किए गए और फिर उन पैसों को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर निजी इस्तेमाल में लाया गया। कुछ मामलों में नए लोन की रकम से ही पुरानी किस्तें जमा कर खातों को एनपीए होने से बचाया गया जिससे बैंक मुख्यालय को भनक न लगे।


 पवन कुमार पाल (तत्कालीन शाखा प्रबंधक), अजय कुमार (तत्कालीन प्रबंधक), सुशील कुमार गौतम (तत्कालीन सहायक कैशियर), सुमित्रा पाल, संजना सिंह, राज प्रताप सिंह, जय प्रताप सिंह, फूल मोहम्मद, राघव राम, शिवाकांत वर्मा, रितेंद्र पाल सिंह, गीता देवी वर्मा, दुष्यंत प्रताप सिंह, मोहम्मद असलम और प्रतीक कुमार सिंह समेत 16   आरोपियों के विरुद्ध इतने बड़े घोटाले का मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले में करीब दर्जनभर अभियुक्त पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं। सदर तहसील के निवासी एक अभियुक्त की एक करोड़ से ज्यादा  संपत्ति की कुर्की की जा चुकी है।