
गोण्डा। जिले के तरबगंज थाने में तैनात एक उपनिरीक्षक पर रिश्वत लेकर मुकदमे को दबाने का गंभीर आरोप लगा है। डीआईजी देवीपाटन परिक्षेत्र अशोक कुमार शुक्ला के हस्तक्षेप के बाद दरोगा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
मन्नीपुर गांव निवासी किंग उपाध्याय ने 9 जुलाई को डीआईजी कार्यालय पहुंचकर शिकायत की थी। किंग का आरोप है कि तरबगंज थाने में तैनात उपनिरीक्षक ओम प्रकाश यादव ने मारपीट के एक मामले में चार्जशीट लगाने के एवज में उनसे 30 हजार रुपए लिए थे। पैसे लेने के बाद दरोगा ने मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगा दी। किंग उपाध्याय ने बताया कि एक महीने तक वह दरोगा से अपना पैसा वापस मांगते रहे। न फोन उठाया गया और न ही मैसेज का जवाब मिला। पीड़ित ने डीआईजी को दरोगा को भेजे गए मैसेज के स्क्रीनशॉट भी दिखाए।
इसी क्रम मे डीआईजी अशोक कुमार शुक्ला का एक वीडियो वायरल हुआ। वीडियो में डीआईजी तरबगंज थाना अध्यक्ष श्रीधर पाठक को फोन पर जमकर फटकार लगा रहे थे। डीआईजी ने कहा- "आपके थाने के दरोगा ने चार्जशीट के नाम पर 30 हजार रुपए ले लिए, बाद में मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगा दी। आप वहां कर क्या रहे हैं? एसएचओ का काम है कि थाने में भ्रष्टाचार न होने पाए। अब इनका पैसा वापस कराओ, नहीं तो तुम्हें सस्पेंड करूंगा।"
डीआईजी के निर्देश पर शनिवार देर शाम 6:10 बजे तरबगंज थाने में उपनिरीक्षक ओम प्रकाश यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1938 की धारा 7 में मुकदमा दर्ज किया गया। मामले की जांच सीओ तरबगंज उमेश्वर प्रताप सिंह को सौंपी गई है।
इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। डीआईजी की इस सख्ती को भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
डीआईजी की फटकार के बाद दरोगा पर दर्ज हुआ भ्रष्टाचार का मुकदमा हड़कंप
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